27/04/2026
Osho......... सब तरफ महत्वाकांक्षा सिखाई जा रही है। दौड़ो। तेज़ी से दौड़ो क्योंकि दूसरे दौड़ रहे हैं। पीछे मत रह जाना। दौड़ भारी है, संघर्ष गहरा है, गलाघोंट प्रतियोगिता है। चाहे गला ही काटना पड़े दूसरे का तो काट देना मगर कुछ करके बता देना। इस दौड़ में सारा उपद्रव खड़ा हो रहा है।
अहंकार है महत्वाकांक्षा। अहंकार है 'मैं कुछ नहीं हूँ' इसकी पीड़ा को भुलाने का उपाय। मनस्वी कहते हैं कि जिस दिन व्यक्ति यह समझ लेता है कि अगर मैं कुछ नहीं हूँ, तो ठीक, बिल्कुल ठीक, मैं कुछ नहीं हूँ। मैं शून्य हूँ तो शून्य हूँ और अपने शून्य से राजी हो जाता है, उसी दिन अहंकार समाप्त हो जाता है।