18/06/2026
🥀 बुढ़ापे की लाठी जब एक साथ टूट जाए: बालोतरा का यह रुला देने वाला हादसा! 🥀
कहते हैं कि एक पिता के लिए उसका बेटा उसके बुढ़ापे की सबसे मजबूत लाठी होता है, जो उसकी हर फिक्र और जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठा लेता है। लेकिन बालोतरा जिले के कोटका गांव में जो हुआ, उसने एक पिता की दुनिया ही उजाड़ कर रख दी। एक ही झटके में भंवरलाल जी के आंगन की सारी खुशियां उजड़ गईं।
मजदूरी के लिए घर से एक साथ निकले उनके चार जवान बेटे— उदाराम (39), रेखाराम (35), जोगाराम (31) और सबसे छोटा 29 साल का विशणाराम, अब इस दुनिया में नहीं रहे। पाटोदी गांव के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे (कार और रोडवेज बस की टक्कर) में चारों सगे भाइयों की एक साथ मौत हो गई।
एक बुजुर्ग पिता पर क्या बीत रही होगी, जब वो रोते हुए कहता है कि "कल तक चार थे, आज एक भी नहीं है... मेरे करम फूट गए"। जो छोटे-छोटे बच्चे कल तक पिता की गोद में खेलते थे, जैसे जोगाराम का 6 महीने का बेटा, आज उनके सिर से साया उठ गया है। सबसे छोटा बेटा विशणाराम जो बोल भी नहीं सकता था, वो भी जाते-जाते इशारों में जल्दी लौटने का वादा करके गया था।
बेटे सिर्फ परिवार का खर्च नहीं चलाते, वे एक पिता का गुरूर, उनका आसरा और उनका पूरा भविष्य होते हैं। आज उस घर में कोई कमाने वाला नहीं बचा।
ईश्वर इन चारों भाइयों की पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और भंवरलाल जी व उनके परिवार को यह वज्रपात सहने की शक्ति प्रदान करें। 🙏 अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि! ॐ शांति!