DAD LOVER

DAD LOVER आपके ही नाम से जाना चाहता हूं 'पापा' ��
?

एक बार एक थिएटर में एक शार्ट फ़िल्म दिखाई गई । जब फ़िल्म शुरू हुई तो सामने एक सफेद रंग का पंखा दिख रहा था , आस पास कोई हलच...
14/08/2024

एक बार एक थिएटर में एक शार्ट फ़िल्म दिखाई गई । जब फ़िल्म शुरू हुई तो सामने एक सफेद रंग का पंखा दिख रहा था ,
आस पास कोई हलचल नही सिर्फ रुका हुआ एक सफेद पंखा.. ये दृश्य करीब 6 मिनट तक चला तो लोग आपत्ति जताने लगे कुछ शिकायत करने लगे तो कुछ उठ कर जाने लगे .... 6 मिनट के बाद सीन का कैमरा उस पंखे से नीचे आता है एक बेड पर जिसपे एक अपाहिज बच्चा लेटा हुआ और ऊपर की ओर देख रहा होता है जिसकी रीढ़ की हड्डी में फैक्चर की वजह से वो हिल डुल भी नही सकता.. .... ...
फिर एक आवाज आती है

" अभी इस शार्ट फ़िल्म में मात्र 6 मिनट तक एक ही दृश्य लगातार दिखाया गया आप सभी को , उन 6 मिनटों में कई लोग चिल्लाने लगे धैर्य नही रख पाए और कई उठ कर जाने लगे ,, दूसरी तरफ एक बच्चा है जो पैरालाइज्ड है और वो अपने जीवन के ज्यादातर घंटे बस इसी दृश्य को ही देखता रहता है।।...

कभी-कभी हमें खुद को दूसरों की जगह रखकर यह समझने की ज़रूरत होती है कि हमें जो ईश्वर ने दिया है उसकी महत्ता कितनी है और हमें ऐसे स्वरूप को प्रदान करने के लिए ईश्वर का शुक्रिया अदा करना चाहिए ।।
. हमेशा अपनी समस्याओं को उनसे तुलना करें जो हमसे कई गुना समस्याओं से घिरे होतें है पर साहस नही खोतें... 🙏🙏🙏

कर्नाटक के मलनाड क्षेत्र में स्थित सेट्टिसारा गांव में एक 17 साल के किशोर ने अकेले अपने दम पर एक कुंआ खोद दिया। इसका कार...
30/04/2024

कर्नाटक के मलनाड क्षेत्र में स्थित सेट्टिसारा गांव में एक 17 साल के किशोर ने अकेले अपने दम पर एक कुंआ खोद दिया। इसका कारण जानकर आप हैरत में पड़े बिना नहीं रह सकेंगे। पवन कुमार नामक यह छात्र कुछ दिनों से कुंआ खोदने की योजना बना रहा था। दरअसल, उसकी मां दूर से पानी ढोकर लाती थीं और यह देखकर पवन परेशान होता था। यही वजह है कि एक दिन उसने कुंआ खोदने का निर्णय कर लिया।

पवन की मां नेत्रावती सागर के एक प्रिटिंग यूनिट में काम करती है और पिता रसोइया का काम करते हैं। इस इलाके में पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिकतर लोगों के आंगन में अपना एक कुंआ है, लेकिन गरीब परिवार होने की वजह से पवन के आंगन में अब तक कुंआ नहीं था।

लगातार हो रही परेशानियों को दूर करने के लिए पवन ने खुद कुंआ खोदने का बीड़ा उठाया। उसने एक स्थानीय जल विशेषज्ञ से संपर्क किया और अकेले ही लगातार 45 दिनों तक खुदाई की।

पवन ने 26 फरवरी को खुदाई शुरू की थी और बीच में अपने परीक्षा के लिए 10 दिन का ब्रेक लिया। 20 अप्रैल को कुंआ खुदाई का काम खत्म हो गया। यह 55 फुट गहरा है।

“कड़ी धूप में पत्थरों की खुदाई एक मशक्कत वाला काम है। 53 फुट की खुदाई के बाद जब पानी की धार फूटी तो मैं बेहद खुश हुआ। करीब 2 फुट और खोदने के बाद यह काम खत्म हो गया। मैं अब खुश हूं कि मेरी मां को अब पानी लाने के लिए सामुदायिक कुएं की तरफ नहीं जाना पड़ेगा। वह काम से लौटकर आएगी तो उसका समय बचेगा।”

पवन की यह कहानी साबित करती है कि हममें से प्रत्येक में दशरथ मांझी का संकल्प छुपा हुआ है। जरूरत है अपनी क्षमता पहचानने की।

तनाव के उन क्षणों में मजबूत लोग भी आत्महत्या कर लेते हैं..वो लोग जिनके पास सब कुछ है शान ... शौकत ... रुतबा ... पैसा .. ...
14/06/2023

तनाव के उन क्षणों में मजबूत लोग भी आत्महत्या कर लेते हैं..
वो लोग जिनके पास सब कुछ है
शान ... शौकत ... रुतबा ... पैसा .. इज्जत
इनमें से कुछ भी उन्हें नहीं रोक पाता ..

तो फिर क्या कमी रह जाती है ???

कमी रह जाती है उस ऊँचाई पर
एक अदद दोस्त की

कमी होती है उस मुकाम पर
एक अदद राजदार की

एक ऐसे दोस्त की जिसके साथ "चांदी के कपों" में नहीं
किसी छोटी सी चाय के दुकान पर बैठ
सकते ..

जो उन्हें बेतुकी बातों से जोकर बन कर हंसा पाता ...

वह जिससे अपनी दिल की बात कह हल्के हो सके..
वह जिसको देखकर
अपना स्ट्रेस भूल सके

वह दोस्त
वह यार
वह राजदार

उनके पास नहीं होता
जो कह सके तू सब छोड़ ... चाय पी मैं हूं ना तेरे साथ ...
और आखिर में
यही मायने कर जाता है...

सारी दुनिया की धन दौलत
एकतरफ...सारा तनाव एक तरफ ..

वह दोस्त एक तरफ !!!

लेकिन अगर आपके पास
वह दोस्त है
वह यार है

तो कीमत समझिये उसकी...

चले जाइए एक शाम उसके साथ
चाय पर ...

जिंदगी बहुत हसीन बन जाएगी......

याद रखिए आपके तनाव से यदि कोई लड़ सकता है तो वो है आपका दोस्त और उसके साथ की एक कप गर्म चाय !!!

[ #स्त्री]स्त्री की सफलता में सबसे बड़ा रोड़ा होता है उसका स्वास्थ्य।  कभी मासिक दर्द से कराह रही है, तो कभी गर्भ धारण करक...
16/03/2023

[ #स्त्री]
स्त्री की सफलता में सबसे बड़ा रोड़ा होता है उसका स्वास्थ्य। कभी मासिक दर्द से कराह रही है, तो कभी गर्भ धारण करके उल्टी, मितली, चक्कर, यूरिन निकल जाने की समस्या झेल रही है, तो कभी रजोनिवृत्ति की बेला में समय असमय रक्तस्राव, सिरदर्द, मूड स्विंग्स, रक्तचाप बढ़ना-घटना झेल रही है। ये लिस्ट स्त्री के उन कष्टों की है जो सामान्य है, सेहतमंद हैं।
इन सबको आसानी से न झेल पाने वाली स्त्रियाँ इससे भी कहीं कहीं अधिक भयंकर स्वास्थ्य समस्याओं से घिरी होतीं हैं। रक्तस्राव अधिक हो तो परेशानी, कम हो तो समस्या। गर्भाशय में अक्सर ही सिस्ट या ट्यूमर हो जाता है। मिसकैरेज शरीर को जितना तोड़ जाता है उतना एक नार्मल डिलीवरी नहीं तोड़ती। मिसकैरेज से बच गयी तो सीज़ेरियन मुँह खोले दानव की तरह प्रतीक्षा करता है। संतान न हो पा रही हो तो ज़रा उस स्त्री का दर्द पूछिये जो आई वी एफ सेंटर्स के चक्कर लगा रही है। शरीर की एक एक कोशिका हिल जाती है। टेस्ट पर टेस्ट, टेस्ट पे टेस्ट, इंजेक्शन्स पर इंजेक्शन्स... एक स्थिति ऐसी आती है, पेशेंट स्त्री बिस्तर पर मुर्दा देह की तरह पड़ी होती है....भोंक दो जो कुछ भी भोंकना हैं...ड्रिप है,सुई है, एनेस्थीसिया है या खंजर कुछ पता नहीं चलता। पता तब चलता है जब एक-एक घाव चीख-चीखकर कहता है, मुझे भरना है!
संभोग दोनों के लिये एक आनंददायी क्रिया है, पर यदि वास्तव में स्त्री को भी आनंद मिले तब। अधिकतर तो यही होता है स्त्री के मन में इससे होने वाले वेजाइनल इन्फेक्शन का भय मंडरा रहा होता है। निवृति के बाद उसे पाँच मिनट भी नींद में समाने का सुख नहीं होता, उसे भागना होता है वॉशरूम की तरफ। फिर भी इस संक्रमण से बचने का कोई उपाय नहीं..!
ऑफिस में , बाज़ार में, पार्टी में, मेले में, ठेले में...न जाने कब तक यूरिन रोककर मुस्कराना पड़ेगा..नहीं पता। ब्लेडर भरकर फटने की कगार पर आ जाये तब भी कहीं किसी सड़क के किनारे बैठ नहीं सकते। इज़्ज़त, यूरिन इंफेक्शन से बड़ी चीज़ है!
ये सारे कष्ट उनके है जिन्होंने सामान्य जीवन जिया है। उनके बारे में तो मैंने लिखा ही नहीं जिन्होंने यौन शोषण सहा, बलात्कार झेला, तेज़ाब की आग झेली, पति के हाथों पिटाई सही।
सच यही है इन सब हेल्थ इश्यूज़ के कारण ही स्त्री जितनी कार्यक्षमता रखती है उतना कर पाने में सक्षम नहीं होती। कहीं न कहीं हर पायदान पर पिछड़ती चली जाती है।
बस इसीलिए तुम अपना ख़्याल ख़ूब ख़ूब रखना....क्योंकि तुमने अपना ख़्याल नहीं रखा तो तुम्हारा ख़्याल रखने कोई नहीं आएगा, और कहा जायेगा 'उसे' तो अक्ल ही नहीं है कि ख़्याल कैसे रखा जाता है। 😌💖🙏

04/03/2023

आजकल के लड़के #नौकरी लगने के तुरंत बाद शादी करके दुलहन को सीधे नौकरी पर ले जाते हैं तथा सारा पढ़ाई का कर्ज , खेती का काम सब झंझट माता पिता के पास छोड़ जाते हैं । वो सबसे पहले शहर में #प्लाट लेने की सोचते हैं तथा माता पिता की ओर कम ध्यान देते हैं जो बहुत दुखदाई है ।
#फेसबुक पर माता पिता को भगवान ज्यादा वो ही लोग लिखते हैं जिनके माता पिता दयनीय स्थिति मे होने के बाद भी उनसे आशा नही करते ।कभी वो लोग गाँव आते हैं तो अपनी जेब पैसा नही देने हेतु माता पिता से खेती , भैंस आदि की कमाई का हिसाब अपनी पत्नी के सामने लेते हैं तथा उन्हें बहुत सुनाते हैं ।पत्नी भी उनमें कमी निकालकर अपना धर्म पूरा करती है।
यह माजरा करीब 90% लोगों का है जो शहर मे लोगों को #जन्मदिन की पार्टी देकर अपनी झूठी शान का बखान करते हैं । वो अपने पत्नी बच्चों के अलावा किसी पर एक पैसा खर्च नही करते ।
क्या इस हालत मे #समाज_सुधार की ओर अग्रसर माना जा सकता है।गाँव के अधिकांश लोग इसी तरह दुःखी हैं क्योंकि उनको बच्चे की नौकरी के कारण #व्रद्ध_पैंसन भी नही मिलती।
मा बाप कितने सपने सजोकर उन्हें पेट काटकर पढाते हैं फिर नौकरी या तो लगती नही या लगने के बाद बेगाने होना दुःखद है।आजकल लड़को की नौकरी लगे या ना लगे घर का काम तो मरते दम बुढों को ही करना पडता है।बच्चों को पढ़ाने का मा बाप को यही पुरस्कार है जी।
जो लोग #शोसल_मीडिया पर बड़ी बडी बातें करते हैं तथा लोगों का आदर्श बने हुए हैं तथा बड़े पदों पर आशीन हैं उनमें से अनेक भी अपने रिशतेदारों , माता पिता के प्रति निष्ठुर भाव रखते हैं ।🙏🙏cp

03/03/2023

जब शादी की तारीख फिक्स हो जाती है तो लड़की का बाप लड़के के बाप से पूछता है कितनी बारात लाओगे?
लड़के का बाप कहता है तीन सौ।
लड़की का बाप बोलता है इतनी बारात बहुत ज्यादा हो जाएगी, दो सौ बारात ले आना।
लड़के का बाप कहता है दो सौ बारात में हमें नहीं होगी हमारी इज्जत चली जाएगी। गांव में हर घर से कम से कम एक आदमी तो पूछना ही पड़ेगा तो सिर्फ गांव के दो सौ लोग हो जाएंगे फिर हमारे रिश्तेदार और घर की औरतें हो जाएंगी, जिसे नहीं पूछेंगे वही बुरा मान जाएगा इसलिए कम से कम तीन सौ लोग आएंगे। हम तो आपके हालात देखकर तीन सौ बाराती ला रहे हैं वरना हमारा परिवार इतना बड़ा है कि और इतने नाते रिश्तेदार हैं कि हमें चार सौ बाराती से ज्यादा लाना चाहिए।

कुछ दिनों बाद जब उसी लड़के वालों के घर में कोई बीमार हो जाता है तो पूरे गांव में कोई एक यूनिट खून देने वाला नहीं मिलता। सोशल मीडिया में अपील करना पड़ता है। अगर किसी से झगड़ा हो जाता है तो पूरे गांव में दो लोग ऐसे नहीं मिलते जो कोर्ट में चलकर ज़मानत ले लें।

मेरा मानना है कि बारात में सिर्फ उन्हें ही लेकर जाना चाहिए जो एक यूनिट ब्लड दे सकें और जो कोर्ट में खड़े होकर तुम्हारी जमानत ले सकें।

बस यही तुम्हारे हैं बाकी सब गैर हैं।
🙏

वह घूंघट नहीं काढ़तीपुरुषों से करती हैं बातेंमिलाती है हाथनहीं शर्माती सकुचातीजोर से हंसती हैतर्क करती हैहर बड़े-छोटे की...
28/02/2023

वह घूंघट नहीं काढ़ती
पुरुषों से करती हैं बातें
मिलाती है हाथ
नहीं शर्माती सकुचाती
जोर से हंसती है
तर्क करती है
हर बड़े-छोटे की आंखों में आंखें डाल
पुरुषों के साथ करती है काम

वह करती है बहस खुलेआम
स्त्री-पुरुष सम्बन्धों पर, एड्स पर,
गर्भवस्था में उत्पन्न होने वाली
समस्याओं पर,
सड़कों बसों ट्रेनों में
घूरती लपलपाई कुंठित भूखी
आकृतियों को सबक सिखाने को
रहती है तत्पर...

मेरे पड़ोसियों की नज़र में
वह औरत बुरी है। 💖🙏

एक चरित्रहीन औरतपर मै हैरान हूँ.. !!वो मुझे आज तक मिली नही..ऐसा भी नहीं है किमैने उसे सही से तलाशा नहीमै गया थावहां जिस ...
18/02/2023

एक चरित्रहीन औरत
पर मै हैरान हूँ.. !!

वो मुझे आज तक मिली नही..
ऐसा भी नहीं है कि
मैने उसे सही से तलाशा नही

मै गया था
वहां जिस ओर
दर्शन ,जाति और समाज
इशारा करते हैं
उस अड्डे पर

मै उन तमाम
औरतों के पास भी गया
जो देह को लेकर
बाजार सजाती थी ..
जो क्लबो मे अर्धनग्न हो..
नाचती गाती थी ...
जो हर रोज वासना के
नये नये किरदार निभाती थी ..
पति से आंखे चुरा..
गैर मर्द की बाहों मे प्रेम ढूढंती थी ..
मैने वो तमाम औरते देखी...
पर मै हैरान था.. !!

उनमें कही भी....
वो चरित्रहीन औरत नही थी
हां मजबूर औरते ज़रूर दिखी
पर वहां हर औरत के पीछे
एक पुरुष जरूर छिपा था
कायर कामुक वासना की कीचड़ मे
सर से पांव तक लिपत ..!!

शायद यही था....वो..
जिसने सबसे पहले
औरत को चरित्रहीन कहा..
🌹🙏

कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से कूदकर जान दी थीऐसा पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज हैऔर कुछ औरतें अपनी इच्छा से चिता में जलकर मरी थ...
06/01/2023

कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से कूदकर जान दी थी
ऐसा पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज है
और कुछ औरतें अपनी इच्छा से चिता में जलकर मरी थीं
ऐसा धर्म की किताबों में लिखा हुआ है

मैं कवि हूँ, कर्त्ता हूँ
क्या जल्दी है

मैं एक दिन पुलिस और पुरोहित दोनों को एक साथ
औरतों की अदालत में तलब करूँगा
और बीच की सारी अदालतों को मंसूख कर दूँगा

मैं उन दावों को भी मंसूख कर दूंगा
जो श्रीमानों ने औरतों और बच्चों के खिलाफ पेश किए हैं
मैं उन डिग्रीयों को भी निरस्त कर दूंगा
जिन्हें लेकर फ़ौजें और तुलबा चलते हैं
मैं उन वसीयतों को खारिज कर दूंगा
जो दुर्बलों ने भुजबलों के नाम की होंगी।

मैं उन औरतों को
जो अपनी इच्छा से कुएं में कूदकर
और चिता में जलकर मरी हैं
फिर से ज़िंदा करूँगा और उनके बयानात
दोबारा कलमबंद करूँगा
कि कहीं कुछ छूट तो नहीं गया?
कहीं कुछ बाक़ी तो नहीं रह गया?
कि कहीं कोई भूल तो नहीं हुई?

क्योंकि मैं उस औरत के बारे में जानता हूँ
जो अपने सात बित्ते की देह को एक बित्ते के आंगन में
ता-जिंदगी समोए रही और कभी बाहर झाँका तक नहीं
और जब बाहर निकली तो वह कहीं उसकी लाश निकली
जो खुले में पसर गयी है माँ मेदिनी की तरह

औरत की लाश धरती माता की तरह होती है
जो खुले में फैल जाती है थानों से लेकर अदालतों तक

मैं देख रहा हूँ कि जुल्म के सारे सबूतों को मिटाया जा रहा है
चंदन चर्चित मस्तक को उठाए हुए पुरोहित और तमगों से लैस
सीना फुलाए हुए सिपाही महाराज की जय बोल रहे हैं।

वे महाराज जो मर चुके हैं
महारानियाँ जो अपने सती होने का इंतजाम कर रही हैं
और जब महारानियाँ नहीं रहेंगी तो नौकरानियाँ क्या करेंगी?
इसलिए वे भी तैयारियाँ कर रही हैं।

मुझे महारानियों से ज़्यादा चिंता नौकरानियों की होती है
जिनके पति ज़िंदा हैं और रो रहे हैं

कितना ख़राब लगता है एक औरत को अपने रोते हुए पति को छोड़कर मरना
जबकि मर्दों को रोती हुई स्त्री को मारना भी बुरा नहीं लगता

औरतें रोती जाती हैं, मरद मारते जाते हैं
औरतें रोती हैं, मरद और मारते हैं
औरतें ख़ूब ज़ोर से रोती हैं
मरद इतनी जोर से मारते हैं कि वे मर जाती हैं

इतिहास में वह पहली औरत कौन थी जिसे सबसे पहले जलाया गया?
मैं नहीं जानता
लेकिन जो भी रही हो मेरी माँ रही होगी,
मेरी चिंता यह है कि भविष्य में वह आखिरी स्त्री कौन होगी
जिसे सबसे अंत में जलाया जाएगा?
मैं नहीं जानता
लेकिन जो भी होगी मेरी बेटी होगी
और यह मैं नहीं होने दूँगा।

पंक्तियां : रमाशंकर यादव "विद्रोही"

किसी सफल इंसान के प्रेम में तो लाखों लड़कियां पड़ जाती हैं।बहुत कम लड़कियां चुनती हैसंघर्ष और असफलताएँ।कोई लड़कीतुम्हारें भव...
29/12/2022

किसी सफल इंसान के प्रेम
में तो लाखों लड़कियां
पड़ जाती हैं।
बहुत कम लड़कियां
चुनती है
संघर्ष और असफलताएँ।
कोई लड़की
तुम्हारें भविष्य के
झंझावतों को भांप कर भी
साथ खड़ी हो
महंगी साड़ी और गहनों से
ज्यादा तुम्हारें बाहों
के हार के लिये तरसती हो
तो मत जाने देना तुम
उसे यूँ ही।

थाम कर रखना उसके हाथों को।

क्योंकि जिस रोज तुम
टूट कर बिखर जाओगे,
खीझ जाओगे इस दुनिया से,
निराश होकर घर लौटोगे,
वो राह तकती
मुस्कुराती मिलेगी
तुम्हारें घर के चौखट पर।

रिसोर्ट मे शादियां ! 💐नई सामाजिक बीमारी  🎊हम बात करेंगे शादी समारोहो में होने वाली भारी-भरकम व्यवस्थाओं और उसमें खर्च हो...
28/12/2022

रिसोर्ट मे शादियां ! 💐
नई सामाजिक बीमारी 🎊

हम बात करेंगे शादी समारोहो में होने वाली भारी-भरकम व्यवस्थाओं और उसमें खर्च होने वाले अथाह धन राशि के दुरुपयोग की!

सामाजिक भवन अब उपयोग में नहीं लाए जाते हे
शादी समारोह हेतु यह सब बेकार हो चुके हैं
कुछ समय पहले तक शहर के अंदर मैरिज हॉल मैं शादियां होने की परंपरा चली परंतु वह दौर भी अब समाप्ति की ओर है!
अब शहर से दूर महंगे रिसोर्ट में शादीया होने लगी है!

शादी के 2 दिन पूर्व से ही ये रिसोर्ट बुक करा लिया जाते हैं और शादी वाला परिवार वहां शिफ्ट हो जाता है
आगंतुक और मेहमान सीधे वही आते हैं और वहीं से विदा हो जाते हैं।
इतनी दूर होने वाले समारोह में जिनके पास अपने चार पहिया वाहन होते हैं वहीं पहुंच पाते हैं!
और सच मानिए समारोह के मेजबान की दिली इच्छा भी यही होती है कि सिर्फ कार वाले मेहमान ही रिसेप्शन हॉल में आए!!
और वह निमंत्रण भी उसी श्रेणी के अनुसार देता है
दो तीन तरह की श्रेणियां आजकल रखी जाने लगी है

किसको सिर्फ लेडीस संगीत में बुलाना है !
किसको सिर्फ रिसेप्शन में बुलाना है !
किसको कॉकटेल पार्टी में बुलाना है !
और किस वीआईपी परिवार को इन सभी कार्यक्रमों में बुलाना है!!
इस आमंत्रण में अपनापन की भावना खत्म हो चुकी है!

सिर्फ मतलब के व्यक्तियों को या परिवारों को आमंत्रित किया जाता है!!
महिला संगीत में पूरे परिवार को नाच गाना सिखाने के लिए महंगे कोरियोग्राफर 10-15 दिन ट्रेनिंग देते हैं!
मेहंदी लगाने के लिए आर्टिस्ट बुलाए जाने लगे हैं!
हल्दी लगाने के लिए भी एक्सपर्ट बुलाए जाते हैं!
ब्यूटी पार्लर को दो-तीन दिन के लिए बुक कर दिया जाता है !
प्रत्येक परिवार अलग-अलग कमरे में ठहरते हैं जिसके कारण दूरदराज से आए बरसों बाद रिश्तेदारों से मिलने की उत्सुकता कहीं खत्म सी हो गई है!!
क्योंकि सब अमीर हो गए हैं पैसे वाले हो गए हैं!
मेल मिलाप और आपसी स्नेह खत्म हो चुका है!
रस्म अदायगी पर मोबाइलो से बुलाये जाने पर कमरों से बाहर निकलते हैं !
सब अपने को एक दूसरे से रईस समझते हैं!
और यही अमीरीयत का दंभ उनके व्यवहार से भी झलकता है !
कहने को तो रिश्तेदार की शादी में आए हुए होते हैं
परंतु अहंकार उनको यहां भी नहीं छोड़ता !
वे अपना अधिकांश समय करीबियों से मिलने के बजाय अपने अपने कमरो में ही गुजार देते हैं!!

विवाह समारोह के मुख्य स्वागत द्वार पर नव दंपत्ति के विवाह पूर्व आलिंगन वाली तस्वीरें, हमारी विकृत हो चुकी संस्कृति पर सीधा तमाचा मारते हुए दिखती हैं!

अंदर एंट्री गेट पर आदम कद स्क्रीन पर नव दंपति के विवाह पूर्व आउटडोर शूटिंग के दौरान फिल्माए गए फिल्मी तर्ज पर गीत संगीत और नृत्य चल रहे होते हैं!
आशीर्वाद समारोह तो कहीं से भी नहीं लगते है
पूरा परिवार प्रसन्न होता है अपने बच्चों के इन करतूतों पर पास में लगा मंच जहां नव दंपत्ति लाइव गल - बहियाँ करते हुए मदमस्त दोस्तों और मित्रों के साथ अपने परिवार से मिले संस्कारों का प्रदर्शन करते हुए दिखते हैं!

मंच पर वर-वधू के नाम का बैनर लगा हुआ होता है!
अब वर वधू के नाम के आगे कहीं भी चि० और सौ०का० नहीं लिखा जाताक्योंकि अब इन शब्दों का कोई सम्मान बचा ही नहीं
इसलिए अंग्रेजी में लिखे जाने लगे है

हमारी संस्कृति को दूषित करने का बीड़ा एसे ही अति संपन्न वर्ग ने अपने कंधों पर उठाए रखा है

मेरा अपने मध्यमवर्गीय समाज बंधुओं से अनुरोध है
आपका पैसा है , आपने कमाया है,
आपके घर खुशी का अवसर है खुशियां मनाएं,
पर किसी दूसरे की देखा देखी नही!
कर्ज लेकर अपने और परिवार के मान सम्मान को खत्म मत करिएगा!
जितनी आप में क्षमता है उसी के अनुसार खर्चा करिएगा
4 - 5 घंटे के रिसेप्शन में लोगों की जीवन भर की पूंजी लग जाती है !
और आप कितना ही बेहतर करें
लोग जब तक रिसेप्शन हॉल में है तब तक आप की तारीफ करेंगे!
और लिफाफा दे कर आपके द्वारा की गई आव भगत की कीमत अदा करके निकल जाएंगे!
मेरा युवा वर्ग से भी अनुरोध है कि
अपने परिवार की हैसियत से ज्यादा खर्चा करने के लिए अपने परिजनों को मजबूर न करें!

आपके इस महत्वपूर्ण दिन के लिए
आपके माता-पिता ने कितने समर्पण किए हैं यह आपको खुद माता-पिता बनने के उपरांत ही पता लगेगा!

दिखावे की इस सामाजिक बीमारी को अभिजात्य वर्ग तक ही सीमित रहने दीजिए!

अपना दांपत्य जीवन सर उठा के, स्वाभिमान के साथ शुरू करिए और खुद को अपने परिवार और अपने समाज के लिए सार्थक बनाइए ! 🙏💖🙏

बहुत साल पहले राजश्री प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनी फिल्म "विवाह" में वह भावुक फिल्मांकन देखकर आंखें गीली हो गई थी और आ...
17/12/2022

बहुत साल पहले राजश्री प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनी फिल्म "विवाह" में वह भावुक फिल्मांकन देखकर आंखें गीली हो गई थी और आज वास्तविक जीवन में उसका सजीव चित्रांकन देखकर आंखें पुनः नीरसिंचित हो गई ।

अवधेश और आरती आप दोनों को ही दाम्पत्य जीवन की कोटि कोटि शुभकामनाएं । ईश्वर आपकी हर मनोकामना पूरी करे ।

िवाह_ऐसा_भी..................
उत्तर प्रदेश से एक दिल को खुश कर देने वाली ख़बर आई है. जहां एक युवक ने शादी से मात्र 8 घंटे पहले हादसे का शिकार हुई अपने अपंग मंगेतर को अपनाकर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की.
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिसे के कुंडा इलाके की रहने वाली आरती मौर्य की शादी नजदीक के ही गांव के अवधेश के साथ तय हुई थी. 8 दिसंबर को बारात आनी थी. दोनों ही घरों में शहनाइयां बज रही थीं. परिवार के सदस्य और दूसरे मेहमान तैयार हो रहे थे, तभी दोपहर एक बजे के करीब एक छोटे बच्चे को बचाने के चक्कर में दूल्हन आरती का पैर फिसल गया और वो छत से नीचे गिर गई. उसकी रीढ़ की हड्डी पूरी तरह टूट गई. कमर और पैर समेत शरीर के दूसरे हिस्सों में भी चोट आई. उसे प्रयागराज के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया.

डॉक्टरों ने जब ये बताया कि फिलहाल वो अपंग हो गई है और कई महीने तक बिस्तर से नहीं हिल सकती तो सभी के होश उड़ गए. आरती के घरवालों और दूसरे लोगों को लगा कि लड़के वाले अब शादी तोड़ देंगे, क्योंकि इलाज के बावजूद उसके पूरी तरह ठीक होने की उम्मीद थोड़ी कम थी. परिवार वालों ने दूल्हे अवधेश और उसके घरवालों को दुल्हन आरती की छोटी बहन से शादी का ऑफर दिया.

लेकिन अवधेश ने कहा कि वो इस हालत में भी न सिर्फ आरती को पत्नी के तौर पर अपनाएगा, बल्कि शादी भी उसी दिन तय वक्त पर ही होगी. अवधेश ने कहा भले उसे अस्पताल के बेड पर जाकर ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम के सहारे इलाज करा रही आरती की मांग भरनी पड़े, लेकिन शादी नहीं टलेगी. अवधेश की जिद पर डाक्टरों की टीम से परमीशन लेकर आरती को दो घंटे बाद एम्बुलेंस से वापस घर लाया गया. उसे स्ट्रेचर पर लिटाकर शादी की रस्में अदा की गईं. ऑक्सीजन और ड्रिप लगी होने की सूरत में ही उसकी मांग भरी गई. आम दुल्हनों की तरह आरती की भी विदाई हुई. ये अलग बात है कि ससुराल जाने के बजाय वो वापस अस्पताल लाई गई. अगले दिन होने वाले ऑपरेशन के फार्म पर खुद अवधेश ने पति के तौर पर दस्तखत किए....🙏

Address

Ghazipur
Ghazipur

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when DAD LOVER posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to DAD LOVER:

Share

Category