21/01/2022
*पुलिस भर्ती से वंचित रखने को 'घटा' दी होनहार की हाइट*
*- हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग का कारनामा*
*- पेपर लीक व भ्रष्टाचार को लेकर चर्चाओं में रहने के बाद अब खेल रहे नया 'खेल'*
*अजय दीप लाठर/खबर खखाटा 24❌7*
कभी पेपर लीक तो कभी भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियां बटोरने वाले हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग का नया कारनामा सामने आया है। यह कारनामा ताजा चल रही हरियाणा पुलिस की भर्ती से जुड़ा है। तमाम प्रक्रियाओं से गुजरने वाले एक होनहार युवा को भर्ती से वंचित रखने के लिए उसकी 'हाइट' को ही घटा दिया गया। आयोग के इस कदम से यह होनहार बुरी तरह आहत है और किसी भी स्तर पर उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
देखा जाए तो हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन इन दिनों भर्ती प्रक्रियाओं पर नजर रखने के बजाए कुछ अलग ही तरह का राग अलापने में लगे हुए हैं। खबरनवीसों के जरिए छपवाया जा रहा है कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं, भर्ती माफिया परेशान कर रहा है। जबकि, अभी तक न तो उन्होंने कोई लिखित शिकायत ही पुलिस को दी है और न ही पुलिस ने मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए किसी तरह का मामला दर्ज किया है। हालांकि, चेयरमैन के इस बयान के बाद भर्ती आयोग और हरियाणा सरकार की जमकर फजीहत भी हो रही है कि प्रदेश में इस तरह का भी कोई माफिया सक्रिय है और सरकार पिछले 7 साल से मूकदर्शक है। सूचना तो यहां तक मिल रही हैं कि चेयरमैन खबरों में बने रहना चाहते हैं और जेड प्लस सिक्युरिटी लेने की चाहत में इस तरह के बयान दे रहे हैं। खैर, सच्चाई जाे भी हो, फिलहाल इतना जरूर है कि उनकी नाक के नीचे योग्य युवाओं को भर्ती से बाहर करने की साजिश बखूबी रची जा रही हैं।
ताजा मामले के अनुसार, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग इन दिनों हरियाणा पुलिस में मेल कॉन्स्टेबल (जीडी) की भर्ती प्रक्रिया चला रहा है। इसके तहत फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट लिए जा रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया के तमाम चरण पार करते हुए प्रवीण कुमार, रोल नंबर 420410860, कैटेगिरी-बीसीए को भी 11 जनवरी को फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट के लिए बुला लिया गया। अभी तक के तमाम चरणों में अव्वल रहा प्रवीण कुमार यहां भी उम्मीद के अनुसार खरा साबित हुआ। नियमों के मुताबिक उसकी नॉर्मल छाती 81 सेंटीमीटर होनी चाहिए थी, जो 86.4 सेंटीमीटर मिली, तो एक्सपेंडिड छाती 85 सेंटीमीटर के मुकाबले 94.6 सेंटीमीटर पाई गई। छाती का फुलाव 4 सेंटीमीटर होने की कंडीशन थी, जो दोगुने से भी कहीं अधिक 8.2 सेंटीमीटर पाया गया। प्रवीण अपनी अभी तक की परफॉर्मेंस से पूरी तरह खुश था, लेकिन उसकी खुशी उस समय काफूर हो गई, जब उसके हाथ में फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट की रिपोर्ट आई। इसमें उसकी हाइट 167 सेंटीमीटर बताई गई, जबकि नियमों के अनुसार 168 सेंटीमीटर होनी चाहिए थी। प्रवीण का दावा है कि उसकी हाइट मांगी गई 168 सेंटीमीटर के मुकाबले 169 सेंटीमीटर है। इस बात के प्रमाण के तौर पर उसने 13 जनवरी को सिविल अस्पताल भिवानी की ओर से जारी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी दिखाया, जिसमें उसकी हाइट 169 सेंटीमीटर दर्ज है।
प्रवीण कुमार कहते हैं कि पुलिस भर्ती के लिए सबसे जरूरी हाइट होती है। इसे कोई भी, किसी भी तरह छिपा नहीं सकता। जब हाइट पूरी न हो, तो कोई तैयारी भी क्यों करेगा। साथ ही वह कहते हैं कि हाइट का प्रमाण तो वे खुद जीते-जागते हैं, और कोई भी उनकी हाइट को माप सकता है। जब 11 जनवरी को उनकी हाइट 167 सेंटीमीटर बताई गई तो दुनिया की कोई भी ताकत इस हाइट को 48 घंटे के अंदर 169 सेंटीमीटर नहीं कर सकती। वे कहते हैं कि उन्होंने लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा, मापदंड आदि के लिए भरपूर तैयारी की थी। उनका सपना था कि खाकी वर्दी पहन कर वे भी प्रदेश की सेवा करेंगे, लेकिन जिस तरीके से उनकी हाइट कम मापते हुए उन्हें बाहर किया गया है, यह सरासर गलत है। प्रवीण कहते हैं कि उन्होंने शुरू से ही अपनी तैयारी पर फोकस किया हुआ था और अब उन्हें यह भी नहीं पता कि कहां पर आवाज उठाई जा सकती है। और, न ही उनके पास इस तरह के संसाधन हैं, जो अपनी बात को सरकार तक पहुंचा सकें। वे कहते हैं कि यह उन जैसे युवाओं को भर्ती से बाहर रखने की साजिश है और संभव है कि नापतोल करने वालों ने उनकी तरह ही और युवाओं को भी अपना शिकार बनाया हो। अब देखना है कि प्रवीण कुमार का दुखड़ा प्रदेश सरकार और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग तक पहुंचता है या फिर उन्हें यूं ही मन मसोस कर रहना पड़ेगा।
*- अजय दीप लाठर, लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं।*