04/05/2021
संघ के लोगो को ही मारने पीटने की खबरें क्यों आ रही है बंगाल से?
संघ के वर्कर दो तीन साल से वहां बैठे है, और बीजेपी के लिए जमीन बना रहे हैं। क्या इन्हें पीटा जाना सही है।?
उत्तर यही है- कानून अपना काम करे।
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पर कानून क्या कहता है, इसे भी जानिए जरा।
कानून कहता है कि किसी भी समाजिक संगठन को "एक्टिविटीज ऑफ पोलिटीकल नेचर" कंडक्ट करने यानि राजनैतिक गतिविधियों को करने की इजाजत नही है।
समाजिक संगठन के नाम पर राजनीति करने के लिए विदेश से पैसे लेना प्रतिबंधित है। देश से चन्दा जमा करें, तो भी सरकार को हिसाब, सदस्यों की सूची, वार्षिक गतिविधि और परिणामो का प्रतिवेदन देना होता है। और यदि नही दिया तो पंजीयन खत्म। सजा और पेनाल्टी भी अलग से है। अगर पोलिटीकल नेचर का काम करते हुए पकड़े गए तो पंजीयन कैसिंल होगा।
कानून कहता है कि राजनैतिक गतिविधि करनी है, तो बिल्कुल कीजिये, लेकिन आप राजनैतिक दल बनाइये। उसका विधान बनाइये, उसका पंजीयन चुनाव आयोग में कराइये। चन्दा लीजिये, देश और विदेश से लीजिए। सरकार बाकायदा उस चन्दे पर 100% टैक्स डिडक्शन देती है। इसके बाद जमकर राजनीति कीजिये।
RSS (Royal Secret Service) यानि संघ न तो पंजीकृत है, न ही उसका कोई विधान है, न कोई लिखित उद्देश्य है, न स्पस्ट सदस्यता है, न इसको पैसे देकर पालने वालों का कहीं हिसाब है, इसकी जो मर्जी आये, वो चोला पहन लेता है। पर देश का बच्चा बच्चा जानता है कि संघ एक अतिवादी राजनितिक परपस वाला संगठन है।
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तो अब इस बात को ठीक से समझिये। औरों को समझाइये। बताइये और चेतना फैलाइये।
"भाजपा का राजनैतिक गतिविधि करना, जायज है। आरएसएस का राजनैतिक गतिविधि करना नाजायज है"
ठीक से समझिये। खुलेआम कहा जाता है संघ तो भाजपा का पितृ सन्गठन है। ऐसे कैसे भाई? भाजपा एक पोलिटीकल पार्टी है। उसकी निष्ठा, वफादारी, एवम पहला और एकमात्र उत्तरदायित्व भारत की जनता के प्रति होना चाहिए। भारत की सत्ता चाहने वाले, जनता से सत्ता लेकर किसी और को नाजायज बाप कैसे बना सकता है?
और अगर वह किसी बाहरी संग़ठन का प्रतिनिधि बनकर, उसका एजेंडा मात्र पूरा करने को बना है, तो जनाकांक्षाओं के नाम पर जनादेश क्यो ले रहे हो? ये धोखा है, और इस धोखे से संघ देश की सत्ता पर काबिज हो चुका है।
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बंगाल में संघ के लोग क्यों बैठे हैं?? और अगर वे धूर्त्तता के साथ, धर्म सँस्कृति की आड़ में पोलिटीकल कैंपेन कर रहे हैं, तो रोका जाना चाहिए। कानूनन रोका जाना चाहिए। मगर कानून नही है। कानून तो पंजीकृत संगठन के लिए है। व्यवस्था में झोल निकालकर ये लोग ऑर्गनाइज्ड पोलिटीकल काम कर रहे हैं।
लोकतन्त्र में राजनीतिक जनमत निर्माण का कार्य, मान्य लोकतांत्रिक तरीके से बाहर, धर्म और संस्कृति के बहाने से संघ कर रहा है। वह साधु के वेश में सीता अपहरण की मंशा रखने वाले पौराणिक पात्र से कम नही।
घुसपैठिया राजनीतिक कर्म करने वाले इस सन्गठन की हिम्मत कांग्रेस सरकारों के निकम्मेपन की वजह से बढ़ी है, मगर अब इसे किसी को गर्दन से पकड़ना होगा। कानून व्यवस्था, संस्थाओं का पंजीयन स्टेट का मसला है। राज्य की सरकारे सक्षम हैं वे संघ नाम के इस स्लिपरी दैत्य को सींग से पकड़ें। संघ खोखले और डरपोक लोगों का संगठन है,इसे कंट्रोल करना इतना कठिन नही।
और अगर कठिन हो, तो भी कीजिये। अगर आप भारत के लोकतन्त्र को इस विषबेल के दंश से बचाना चाहते हैं, तो लीगल हर्डल बनाइये। जब तक ये नही होगा, संघ भी न रुकेगा, और क्षुब्ध विरोधी मौका देख चौराहे पर घसीटते रहेंगे।
यदि राज्य सरकारें संघ पर कार्यवाही नहीं करती हैं तो यही माना जाएगा कि वे नहीं चाहतीं कि इन अंग्रेजों के गुप्तचरों और सत्ता लोभियों से जनता को छुटकारा मिले। जनता को जब जहां मौक़ा मिलेगा वो इन ग़द्दारों को सबक़ सिखाती ही रहेगी।
जय हिन्द, जय भारत।
Note:- अगले अंक में पढ़िएगा रॉयल सीक्रेट सर्विस का अंग्रेजों से संबंध।
#जनताvsनेता #गर्व_से_कहो_हम_भारतीय_हैं