Akhil Bhartiya Parivar Himachal Pradesh

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02/09/2021
12/08/2021

भाजपा को 2019-20 में 3623 करोड़ रूपये का चंदा मिला है। जिसमें से 2500 करोड़ रूपये से अधिक Electoral Bonds से प्राप्त हुए है। वही Electoral Bonds जिनके देने वाले का नाम पता गुप्त रखा जाता है। क्या J P Nadda जी जवाब देंगे कि ये 2500 करोड़ रूपये आपको किसने दिए हैं और क्यों दिए हैं? अब शायद आपको पता चले कि भाजपा किस तरह पैसे से सत्ता और सत्ता से फिर पैसे का खेल खेल रही है।

#जनताvsनेता #गर्व_से_कहो_हम_भारतीय_हैं

04/05/2021

संघ के लोगो को ही मारने पीटने की खबरें क्यों आ रही है बंगाल से?

संघ के वर्कर दो तीन साल से वहां बैठे है, और बीजेपी के लिए जमीन बना रहे हैं। क्या इन्हें पीटा जाना सही है।?

उत्तर यही है- कानून अपना काम करे।
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पर कानून क्या कहता है, इसे भी जानिए जरा।

कानून कहता है कि किसी भी समाजिक संगठन को "एक्टिविटीज ऑफ पोलिटीकल नेचर" कंडक्ट करने यानि राजनैतिक गतिविधियों को करने की इजाजत नही है।

समाजिक संगठन के नाम पर राजनीति करने के लिए विदेश से पैसे लेना प्रतिबंधित है। देश से चन्दा जमा करें, तो भी सरकार को हिसाब, सदस्यों की सूची, वार्षिक गतिविधि और परिणामो का प्रतिवेदन देना होता है। और यदि नही दिया तो पंजीयन खत्म। सजा और पेनाल्टी भी अलग से है। अगर पोलिटीकल नेचर का काम करते हुए पकड़े गए तो पंजीयन कैसिंल होगा।

कानून कहता है कि राजनैतिक गतिविधि करनी है, तो बिल्कुल कीजिये, लेकिन आप राजनैतिक दल बनाइये। उसका विधान बनाइये, उसका पंजीयन चुनाव आयोग में कराइये। चन्दा लीजिये, देश और विदेश से लीजिए। सरकार बाकायदा उस चन्दे पर 100% टैक्स डिडक्शन देती है। इसके बाद जमकर राजनीति कीजिये।

RSS (Royal Secret Service) यानि संघ न तो पंजीकृत है, न ही उसका कोई विधान है, न कोई लिखित उद्देश्य है, न स्पस्ट सदस्यता है, न इसको पैसे देकर पालने वालों का कहीं हिसाब है, इसकी जो मर्जी आये, वो चोला पहन लेता है। पर देश का बच्चा बच्चा जानता है कि संघ एक अतिवादी राजनितिक परपस वाला संगठन है।
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तो अब इस बात को ठीक से समझिये। औरों को समझाइये। बताइये और चेतना फैलाइये।

"भाजपा का राजनैतिक गतिविधि करना, जायज है। आरएसएस का राजनैतिक गतिविधि करना नाजायज है"

ठीक से समझिये। खुलेआम कहा जाता है संघ तो भाजपा का पितृ सन्गठन है। ऐसे कैसे भाई? भाजपा एक पोलिटीकल पार्टी है। उसकी निष्ठा, वफादारी, एवम पहला और एकमात्र उत्तरदायित्व भारत की जनता के प्रति होना चाहिए। भारत की सत्ता चाहने वाले, जनता से सत्ता लेकर किसी और को नाजायज बाप कैसे बना सकता है?

और अगर वह किसी बाहरी संग़ठन का प्रतिनिधि बनकर, उसका एजेंडा मात्र पूरा करने को बना है, तो जनाकांक्षाओं के नाम पर जनादेश क्यो ले रहे हो? ये धोखा है, और इस धोखे से संघ देश की सत्ता पर काबिज हो चुका है।
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बंगाल में संघ के लोग क्यों बैठे हैं?? और अगर वे धूर्त्तता के साथ, धर्म सँस्कृति की आड़ में पोलिटीकल कैंपेन कर रहे हैं, तो रोका जाना चाहिए। कानूनन रोका जाना चाहिए। मगर कानून नही है। कानून तो पंजीकृत संगठन के लिए है। व्यवस्था में झोल निकालकर ये लोग ऑर्गनाइज्ड पोलिटीकल काम कर रहे हैं।

लोकतन्त्र में राजनीतिक जनमत निर्माण का कार्य, मान्य लोकतांत्रिक तरीके से बाहर, धर्म और संस्कृति के बहाने से संघ कर रहा है। वह साधु के वेश में सीता अपहरण की मंशा रखने वाले पौराणिक पात्र से कम नही।

घुसपैठिया राजनीतिक कर्म करने वाले इस सन्गठन की हिम्मत कांग्रेस सरकारों के निकम्मेपन की वजह से बढ़ी है, मगर अब इसे किसी को गर्दन से पकड़ना होगा। कानून व्यवस्था, संस्थाओं का पंजीयन स्टेट का मसला है। राज्य की सरकारे सक्षम हैं वे संघ नाम के इस स्लिपरी दैत्य को सींग से पकड़ें। संघ खोखले और डरपोक लोगों का संगठन है,इसे कंट्रोल करना इतना कठिन नही।

और अगर कठिन हो, तो भी कीजिये। अगर आप भारत के लोकतन्त्र को इस विषबेल के दंश से बचाना चाहते हैं, तो लीगल हर्डल बनाइये। जब तक ये नही होगा, संघ भी न रुकेगा, और क्षुब्ध विरोधी मौका देख चौराहे पर घसीटते रहेंगे।

यदि राज्य सरकारें संघ पर कार्यवाही नहीं करती हैं तो यही माना जाएगा कि वे नहीं चाहतीं कि इन अंग्रेजों के गुप्तचरों और सत्ता लोभियों से जनता को छुटकारा मिले। जनता को जब जहां मौक़ा मिलेगा वो इन ग़द्दारों को सबक़ सिखाती ही रहेगी।

जय हिन्द, जय भारत।
Note:- अगले अंक में पढ़िएगा रॉयल सीक्रेट सर्विस का अंग्रेजों से संबंध।
#जनताvsनेता #गर्व_से_कहो_हम_भारतीय_हैं

28/04/2021

Lok Sabha is composed of representatives of the people chosen by direct election on the basis of the adult suffrage. The maximum strength of the House envisaged by the Constitution is 552, which is made up by election of upto 530 members to represent the States, upto 20 members to represent the Unio...

https://www.facebook.com/1180364408779992/posts/1836804306469329/
17/03/2021

https://www.facebook.com/1180364408779992/posts/1836804306469329/

बहुत ही दुख और चिंता पैदा करने वाली ख़बर है। आखिर सत्ताधारी दल के सांसद ने आत्महत्या क्यों कि? ऐसी क्या मजबूरी थी कि सांसद को अपनी जान देना उचित लगा? आखिर जो व्यक्ति जनता का प्रतिनिधि चुन कर आया हो वह मानसिक रूप से इतना कमज़ोर तो नहीं हो सकता कि आत्महत्या कर ले। आखिर किस बात का और कितना दबाव था सांसद जी पर इसकी उच्चस्तरीय जाँच होनी चाहिए।

अखिल भारतीय परिवार पार्टी की संवेदनाएँ शोकाकुल परिवार के साथ हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दे।
https://www.jansatta.com/national/himachal-pradesh-bjp-mp-ram-swaroop-sharma-found-dead-delhi-residencehimachal-pradesh-bjp-mp-ram-swaroop-sharma-found-dead-at-delhi-residence/1663854/

इससे पहले दादर और नागर हवेली के सांसद महोदय जी ने भी ऐसे ही आत्महत्या कर ली थी।

https://www.abplive.com/news/india/dadra-nagra-haveli-mp-mohan-delkar-commits-suicide-in-mumbai-hotel-ann-1784740

#जनताvsनेता
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15/03/2021

मान्यवर कांशीराम जी को उनकी जयंती पर शत:शत: नमन।

03/02/2021

सावधान रहिए, अब आपका नेता आपको गलत जानकारी देकर निजीकरण और देश की संपत्ति को बेचने का लाभ बताएगा।

जी हाँ, अब एक नया खेल चालू होगा, जिसे कहा जाता है मनोविज्ञान का खेल। यदि आप कोई गलत फ़ैसला लें तो उसे सही साबित करने के लिए नेता यह उपाय करते हैं। अपने गलत फ़ैसले से होने वाले बड़े नुक़सान को तो छुपा लेते हैं परन्तु उससे होने वाले छोटे लाभ या काल्पनिक लाभ का ज़ोर शोर से बखान करने लगते हैं। सरकार क्यों सरकारी संपत्ति ( इसे सरकारी संपत्ति कहना गलत है यह जनता की ही संपत्ति होती है और सरकार केवल उसकी संरक्षक होती है) बेच रही है, इसके लिए कुतर्क दिए जाएँगे और “मासूम भक्त” बिना अपना दिमाग लगाएँ उन्हीं बातों को सच मान लेंगे कि बात में दम तो है। इस तरह तो बात में दम तो चोरी करने वाले, लूटपाट करने वालो की में भी होता है तो क्या उनके अपराध को माफ किया जा सकता है?
मुख्यतः अब तीन तरह के कुतर्क चलाए जाऐंगे
1. भारत पर क़र्ज़ा है और उस क़र्ज़ को उतारने की कोशिश है सरकारी संपत्ति को बेचना , जबकि सच यह है कि 2014 से अब तक न जाने कितनी सरकारी कंपनियाँ या को पूरी तरह बेची जा चुकी हैं या फिर उनमें सरकार ने अपनी हिस्सेदारी बेची है पर फिर भी भारत सरकार को और क़र्ज़ा लेना पड़ा है और हमारा क़र्ज़ा कम होने की बजाएँ बढ़ा है।
2. दूसरी तर्क दिया जा सकता है कि सरकारी कर्मचारी कामचोर होते हैं इसलिए वे काम नहीं करते हैं तो सरकार कंपनियों तो बेच देगी तो फिर वहाँ काम सही ढंग से होगा , वैसे तो यह पूरी तरह निराधार है पर फिर भी यदि इस बात को मान लें कि कुछ सरकारी कर्मचारी सही ढंग से काम नहीं भी करते हैं तो उन कर्मचारियों को निकाला जाना चाहिए न कि कंपनी को ही बेच दिया जाए। और यह तर्क उन कंपनियों को बेचने के लिए तो दिया जा सकता है जो घाटे में चल रही हैं परंतु जो कंपनियाँ मुनाफ़ा कमा रही हैं वहाँ तो यह कुतर्क पूरी तरह धराशायी हो जाता है। वैसे जो कंपनियाँ घाटे में भी चल रही है उसके लिए भी काफी हद तक सरकार की गलत नीतियाँ ही ज़िम्मेदार हैं। जब भारत का प्रधानमंत्री JIO का प्रचार करेगा, उसी को सभी सुविधाएँ देगा तो BSNL तो घाटे में जाएगी ही, पर यह विषय अलग है जिसपर कभी और चर्चा करूँगा।
3. तीसरा कुतर्क दिया जा सकता है कि दुनियाँ के कई देश ऐसे ही संपन्न बने हैं, पर यह भी पूरी तरह से निराधार है, दुनियाँ का एक भी देश इस तरह अपनी संपत्ति को कौड़ियों के भाव बेचकर संपन्न नहीं हुआ है। और यदि मान भी लें कि कुछ देशों ने ऐसा किया भी हो तो उनका मुक़ाबला भारत से नहीं किया जा सकता।
असल में यह किसी भी देश की सरकार की घोर नाकामयाबी होती है कि उसे अपना ख़र्च चलाने के लिए अपनी संपत्ति या कंपनियों, सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को बेचना पड़े। पिछले वर्ष भी सरकार ने जो विनिवेश ( सरकारी संपत्ति को बेचना) का लक्ष्य रखा था उससे कम ही सम्पत्ति बिक पाई और इस कारण सरकार पर क़र्ज़ का बोझ और बढ़ गया। असल में पुरखों की संपत्ति वही औलादें बेचती हैं जो नाकारा होती हैं। सरकारी कंपनियों को बेचकर जहाँ एक ओर यह सरकार अपने ख़र्चे पूरे करने की नाकाम कोशिश कर रही है वहीं साथ ही साथ दलितों/पिछड़ों को मिलने वाले प्रतिनिधित्व को भी पीछे के दरवाज़े से समाप्त कर रही है। जब सरकारी कंपनियाँ ही नहीं होंगी तो फिर उनमें मिलने वाली नौकरियों में आरक्षण या प्रतिनिधित्व देने की ज़िम्मेदारी सरकार पर नहीं होगी। यह आपकी, हमारी और हर “भारतीय” की संपत्ति की खुली लूट है। बाक़ी मर्ज़ी आपकी है कि आप कुतर्क को मानते हैं और फैलाते हैं, या वास्तविकता को स्विकार करते हैं और वास्तविकता को जन-जन तक पहुँचाते हैं।
जय हिन्द, जय भारत

20/01/2021

भारत का प्रधानमंत्री पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की पार्टी को फ़ण्ड करवाए यह संभव ही नहीं है!

जब पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री की बेटी यह बयान देती हैं कि “इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीके इंसाफ़ को भाजपा के नेता फ़ण्ड करते हैं और बदले में इमरान खान कहते हैं कि मोदी जी को 2019 का चुनाव जीतना चाहिए” तो पाकिस्तान और भारत में खलबली मचनी ही थी।

लोग शक करने लगे कि कहीं पुलवामा और बालाकोट का हमला लोगों की आँख में धूल धौंकने का एक दोस्ताना मैच तो नहीं था?

अखिल भारतीय परिवार पार्टी का मानना है कि यह बहुत ही गंभीर आरोप है और बिना सबूत दिए किसी को भी भारत के प्रधानमंत्री पर इस तरह के गंभीर आरोप लगाने का कोई अधिकार नहीं है।

हमारा मानना है कि मोदी जी चाहे कुछ भी हों पर इस तरह दुश्मन देश की पार्टी या उसके नेता से मिलकर भारत के जवानों को शहीद करने का षड्यंत्र नहीं रच सकते, हमारे निहत्थे जवानों को बारूद से नहीं उड़वा सकते।

हम इन आरोपों की कड़ी निंदा करते हैं और भारत सरकार से और ख़ासकर से मोदी जी से यह कहना चाहते हैं कि मोदी जी हमें विश्वास नहीं है कि आपने या भाजपा के किसी भी नेता ने इमरान खान की पार्टी का प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई समर्थन किया होगा। फिर भी देश हित में आपको और भाजपा को सामने आकर इसके बारे में बोलना चाहिए, यह बहुत ही गंभीर आरोप है, देश का प्रधानमंत्री किसी दल या पार्टी का नहीं पूरे देश का होता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा जी बताएं कि जिस व्यक्ति का नाम लिया जा रहा है उस “ इंदर दोसांझ” का भाजपा से कोई संबंध है या नहीं ?

https://m.timesofindia.com/world/pakistan/pakistan-opposition-demand-swift-verdict-against-imran-and-his-party-in-graft-case/articleshow/80354036.cms

https://www.aninews.in/news/world/asia/imran-khan-biggest-thief-pti-foreign-funding-case-biggest-fraud-maryam-nawaz20210119195345

#जनताvsनेता

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