06/10/2026
आज 6 अक्तूबर 2026 को झारखंड आंदोलन के प्रखर सेनानी, धनबाद बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता कंसारी मंडल की पुण्यतिथि है।
यह दिन कोयलांचल और पूरे झारखंड के सामाजिक-राजनीतिक व विधिक जगत के लिए एक ऐसे व्यक्तित्व को याद करने का है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन संघर्ष, विचार और सादगी के लिए समर्पित कर दिया।
कंसारी मंडल जी के जीवन, उनके आदर्शों और समाज के प्रति उनके योगदान को रेखांकित करता एक संस्मरणात्मक आलेख नीचे प्रस्तुत है, जिसे आप अपनी प्रस्तुति या प्रकाशन के लिए आगे बढ़ा सकते हैं:-
कंसारी मंडल:- संघर्ष, विचार और सादगी की अमिट विरासत
छह अक्तूबर एक ऐसी पुण्यतिथि है, जो धनबाद और झारखंड के सामाजिक-राजनीतिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए हमेशा भावुक कर देने वाली रहेगी। यह दिन उस व्यक्तित्व को याद करने का दिन है, जिसने अपने पूरे जीवन को संघर्ष, विचार, सादगी और नि:स्वार्थ जनसेवा की कसौटी पर कसकर जिया। झारखंड आंदोलनकारी और धनबाद बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्रद्धेय कंसारी मंडल (81 वर्ष) भले ही आज हमारे बीच भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन वैचारिक और सामाजिक रूप से उनकी विरासत आज भी कोयलांचल के जन-मन में जीवित हैं ।
⚖️ न्याय और समाज सेवा का संगम
कंसारी मंडल जी ने वकालत को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि शोषितों और पीड़ितों को न्याय दिलाने का माध्यम माना। धनबाद सिविल कोर्ट में एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में उनकी पहचान अत्यंत आदरणीय थी। अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए वे सदैव तत्पर रहे, जिसके कारण सहकर्मियों ने उन्हें धनबाद बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुनकर नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी। अदालत के गलियारों में गरीब मुवक्किलों के लिए उनका नरम और संवेदनशील रुख उनकी सादगी का सबसे बड़ा प्रमाण था।
✊ झारखंड आंदोलन में अमूल्य भूमिका
एक सच्चे झारखंड आंदोलनकारी के रूप में कंसारी मंडल जी ने अलग राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण वैचारिक व जमीनी भूमिका निभाई। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ उनका जुड़ाव गहरा और लंबा रहा। वे तीन बार झामुमो के धनबाद जिला अध्यक्ष रहे और विषम परिस्थितियों में भी संगठन को वैचारिक रूप से मजबूत बनाए रखा। उन्होंने धनबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर जन-आकांक्षाओं को राजनीतिक आवाज देने का भी प्रयास किया था।
🤝 सामाजिक एकजुटता और सादगी का प्रतीक
राजनीति और कानून के अलावा, समाज को जोड़ने में उनका योगदान अतुलनीय था। झारखंड सुड़ी समाज कल्याण समिति के केंद्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अलख जगाई और समाज के गरीब व पिछड़े तबके के उत्थान के लिए लगातार काम किया। उनकी सबसे बड़ी पूंजी उनका "सादगीपूर्ण व्यक्तित्व" और "सहज सुलभ स्वभाव" था, जिसने उन्हें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हर वर्ग का प्रिय बना दिया।
🕯️ अमिट विरासत
विजयादशमी के समय अचानक अस्वस्थ होने के बाद 6 अक्तूबर को असरफी अस्पताल में उनका निधन हो गया था, जिससे पूरे कोयलांचल में शोक की लहर दौड़ गई थी। आज उनकी पुण्यतिथि पर, धनबाद बार एसोसिएशन से लेकर राजनीतिक गलियारों तक, उनके योगदान को शिद्दत से याद किया जाता है। कंसारी मंडल जी का जीवन यह सीख देता है कि सार्वजनिक जीवन में रहकर भी ईमानदारी, वैचारिक दृढ़ता और सादगी के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय कैसे पहुँचाया जा सकता है।
उन्हें शत्-शत् नमन और विनम्र श्रद्धांजलि! 💐🙏