09/07/2025
9 जुलाई 2025 की हड़ताल का कोल इंडिया पर असर:
कोयला उत्पादन ठप:
धनबाद और निरसा क्षेत्र में कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियों (BCCL और ECL) की सभी कोलियरी पूरी तरह बंद रहीं। इससे कोयला उत्पादन और डिस्पैच पर भारी असर पड़ा।
झारखंड के कोयलांचल में, खासकर BCCL, CCL, और ECL की खदानों में हड़ताल का गहरा प्रभाव देखा गया, जहाँ उत्पादन पूरी तरह रुक गया।
राजमहल कोल परियोजना में भी कोयला खनन और डिस्पैच कार्य पूरी तरह बंद रहा।
हड़ताल की सफलता:
यूनियनों (INTUC, CITU, AITUC, HMS) ने दावा किया कि हड़ताल व्यापक रूप से सफल रही। उदाहरण के लिए, SECL में यूनियनों ने 80% सफलता का दावा किया, जबकि प्रबंधन ने 51% कर्मचारी उपस्थिति की बात कही।
अखिल भारतीय कोयला मजदूर संघ के कार्यकारी अध्यक्ष आर.पी. सिंह ने कहा कि हड़ताल खासकर CCL में बहुत सफल रही।
हड़ताल का कारण:
यह देशव्यापी हड़ताल चार नए श्रम संहिताओं के विरोध, कोयला उद्योग के निजीकरण को वापस लेने, और 44 श्रम कानूनों को लागू करने की मांग को लेकर थी।
कोल इंडिया के मजWdूरों ने केंद्र सरकार की "मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट-समर्थक" नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रभाव का दायरा:
कोल इंडिया के अलावा, हड़ताल का असर बैंकिंग, डाक, परिवहन, बिजली, और निर्माण जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ा। झारखंड में कोयला बेल्ट में हड़ताल को व्यापक समर्थन मिला।
हालांकि, कुछ यूनियनों जैसे BMS ने हड़ताल को राजनीति से प्रेरित बताकर इसमें हिस्सा नहीं लिया और मजदूरों से दूर रहने की अपील की।
निष्कर्ष: 9 जुलाई 2025 की हड़ताल ने कोल इंडिया की खदानों, खासकर झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र में, कोयला उत्पादन और डिस्पैच को पूरी तरह ठप कर दिया। यह हड़ताल मजदूरों और किसानों की मांगों को लेकर थी, और यूनियनों के दावे के मुताबिक इसका व्यापक असर र�