27/05/2026
"पेपर लीक प्रदेश" बनता उत्तर प्रदेश! क्या यही है सुशासन का नया मॉडल?
उत्तर प्रदेश का शिक्षा तंत्र एक ऐसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है जिसका इलाज सरकार के पास नजर नहीं आ रहा है। एक के बाद एक परीक्षाओं का लीक होना अब इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित भ्रष्टाचार का प्रमाण बन चुका है।
अभी हाल ही में AKTU में बीटेक कंप्यूटर नेटवर्क की परीक्षा का पेपर लीक होना यह बताने के लिए पर्याप्त है कि हमारी सुरक्षा प्रणाली कितनी लचर और खोखली हो चुकी है। क्या प्रदेश की भाजपा सरकार में बिना 'लीक' के कोई भी परीक्षा संपन्न कराना नामुमकिन हो गया है?
NEET जैसी संवेदनशील परीक्षा में सेंधमारी और फिर SSC GD जैसी भर्ती परीक्षाओं में धांधली की खबरें युवाओं के मनोबल को तोड़ रही हैं। मेहनत करने वाला छात्र आज सड़कों पर है और नकल माफिया और भ्रष्ट तंत्र का बोलबाला है। ऐसा लगता है जैसे उत्तर प्रदेश 'पेपर लीक' के मामले में विश्व रिकॉर्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सवाल सरकार से है:
आखिर कब तक युवा अपनी मेहनत पर पानी फिरते देखते रहेंगे?
पेपर तैयार करने से लेकर उसे परीक्षा केंद्र तक सुरक्षित पहुँचाने की कोई ठोस नीति क्यों नहीं है?
क्या सरकारी तंत्र पूरी तरह से अक्षम हो चुका है?
युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार को अपनी विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए और एक पारदर्शी, सुरक्षित और फूल-प्रूफ (Leak-proof) परीक्षा प्रक्रिया को तुरंत लागू करना चाहिए। सिर्फ दावे करने से युवाओं के सपने पूरे नहीं होंगे, उनके लिए जवाबदेही तय करनी होगी!