Shankar Lal INC

Shankar Lal INC ब्लॉक अध्यक्ष, रानी बाग, वार्ड-60
(2)

14/10/2026

मोदी की महंगाई से टूटी जनता की कमर👇🏻👇🏻

जननायक नेता प्रतिपक्ष श्री Rahul Gandhi जी के आह्वान पर पूरा भारत दिल्ली की सड़कों पर है। लोकतंत्र को बचाने की इस लड़ाई मे...
13/10/2026

जननायक नेता प्रतिपक्ष श्री Rahul Gandhi जी के आह्वान पर पूरा भारत दिल्ली की सड़कों पर है।

लोकतंत्र को बचाने की इस लड़ाई में आप भी हमारे साथ आइए!

जननायक नेता प्रतिपक्ष श्री Rahul Gandhi जी के आह्वान पर पूरा भारत दिल्ली की सड़कों पर है। लोकतंत्र को बचाने की इस लड़ाई मे...
13/10/2026

जननायक नेता प्रतिपक्ष श्री Rahul Gandhi जी के आह्वान पर पूरा भारत दिल्ली की सड़कों पर है।

लोकतंत्र को बचाने की इस लड़ाई में आप भी हमारे साथ आइए!
Congress

11/10/2026

नवरात्रि के प्रथम दिन करिए जगत जननी मां विंध्यवासिनी का दर्शन,

मां विंध्यवासिनी आप सभी पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें.

#नवरात्रि ाता_दी #माँ_शैलपुत्री #शारदीय_नवरात्रि जयमातादी

11/10/2026

दस अक्तूबर

कल गुंडों का दिन था। हज़ारों हज़ार जवानों की तैनाती के बीच गुंडे कहाँ से आ गए? जब ये हिंसा कर रहे थे तब उन्हें तुरंत काबू में क्यों नहीं किया? दरअसल यह सब कुछ एक जगह नहीं हो रहा था। किसी एक के पास इनकी रिकार्डिंग नहीं है। स्वतंत्र पत्रकारों की टोली अलग-अलग जगहों पर थी। सबके कैमरे में पुलिस की हिंसा
और गुंडों की हिंसा के बहुत सारे प्रसंग रिकॉर्ड किए गए हैं। अगर आप इन वीडियो को एक्स और इंस्टा पर स्क्रोल करते हैं तब दस अक्तूबर के प्रदर्शन की समझ पूरी तरह बदल जाती है। देश की न्यायपालिका से क्या उम्मीद की जाए, उनका डर ही होता तो पुलिस यह सब नहीं होने देती। देश भर से सुरक्षा बलों को लाने के बाद भी सौ पचास गुंडे लड़के-लड़कियों को दौड़ा कर पीट रहे थे। उनके बाल खींच रहे थे। पत्रकारों को मारा जा रहा था। तो यह सरकार गुंडों की मदद लेनी लगी है। पहले उन गुंडों को स्वतंत्र रुप से पनपने दिया, धर्म की रक्षा के नाम पर और अब उन्हें राजनीतिक प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करने लगी है। पत्रकारों और ख़ासकर लड़कियों के ख़िलाफ करने लगी है।

पुलिस ने प्रेस को ख़ूब धक्का दिया है। सड़क किनारे इंटरव्यू चल रहा है और तभी पुलिस खींच कर ले जाती है।
इसके बाद भी अलग-अलग जगहों पर मौजूद स्वतंत्र पत्रकारों ने बहुत सारे सबूत जमा कर लिए हैं। ठीक है कि वो सारे वीडियो मेरे पास नहीं है या किसी ऐसे के पास जो इन सब वीडियो को समेट कर एक रिपोर्ट बनाता। कॉपीराइट की भी समस्या गंभीर है। इस हंगामे में आप किसे संपर्क करेंगे और कब तक जवाब आएगा। तभी कल का मेरा वीडियो अधूरा सा लगा और अब चुभ रहा है कि इस प्रदर्शन की मुख्य तस्वीर तो गुंडे थे। उनकी गुंडागर्दी थी। पुलिस की चुप्पी थी और पुलिस की हिंसा थी। दस अक्तूबर को एक महिला पत्रकार(नाम नहीं मालूम) हिम्मत के साथ खड़ी है। कैमरे से रिकॉर्ड कर रही है। तीन-चार गबरू नौजवान पहले एक लड़के को मारते हैं। बाल खींचते हैं। सड़क पर पटक देते हैं और लातों से मारते हैं। फिर एक लड़की को दबोच लेते हैं। उसके कपड़े फाड़ देते हैं। उस एक महिला पत्रकार के वहाँ टिके रहने से सब दर्ज हो गया है। पता है कोर्ट कुछ नहीं करेगा, पुलिस कुछ नहीं करेगी। इसी से पता चलता है कि इनकी सरकार जनता के समर्थन से नहीं, इन्हीं सबके दम पर चल रही है। पुलिस और कोर्ट की तरफ से अनदेखी नहीं की जाती तो ज़बरदस्ती वोट चोरी को पवित्र बनाने वाले समर्थकों को भी मुश्किल होता। वो भी इन सबका विरोध करने लग जाते कि जो हुआ है, ग़लत हुआ है। वह नहीं कर पा रहे हैं इसलिए सत्तर के दशक के किस्सों की चादर ओढ़ कर घूम रहे हैं। पुराना बता रहे हैं। नया नहीं बता पा रहे हैं।

इन स्वतंत्र पत्रकारों के रहने से किसी भी आंदोलन का कवरेज बदल जाता है। इंस्टा पर जाकर देखते हैं तो कई घटनाओं के वीडियो चल रहे हैं। इनमें किसी कोण से पुलिस की ज़्यादती दर्ज हो रही है तो किसी कोण से गुंडो की हिंसा। इन वीडियो के बिना कोई भी रिपोर्ट मुकम्मल नहीं हो सकती और न किसी एक रिपोर्ट में इन सबकी दास्तां समेटी जा सकती थी स्केल इतना व्यापक था। न वीडियो में हिंसा के अलग-अलग रुप ही नहीं, साहस के भी अनेक रुप इनकी रिपोर्टिंग में मिल जाएंगे। ये पत्रकार जितना जोखिम उठाते हैं, उतना कोई नहीं। लड़कियाँ, युवा महिला पत्रकार पुलिस की हिंसा का भी सामना कर रही हैं मगर उसका प्रतिकार भी कर रही हैं। तन कर खड़ी हो जाती हैं। इन युवा महिला पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों की हिम्मत अलग ही लेवल की है। इनकी ही हिम्मत थी कि सरकार इस बार हज़ारों हज़ार पुलिस लेकर आई, दिल्ली के बड़े हिस्से में इंटरनेट बंद कर दिया, लोगों को घर से उठाया, घर पर नज़रबंद किया तब भी उसे गुंडों की मदद लेनी पड़ी या गुड़ों को छूट देनी पड़ी ताकि उसकी मदद हो जाए।

इसके बाद भी लोग निकले हैं। कितने सारे युवा वकील प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए आगे गए। उनके साथ भी मारपीट हुई। सुप्रीम कोर्ट के वकील शादान फ़रासात को टांग कर ले जाने का दृश्य वीडियो में दर्ज है। वकीलों के भी कपड़े फाड़े गए और उनके साथ भी पुलिस ने हिंसा की है। उन्हें भी हिरासत में लिया गया। सबने किसी अज्ञात भविष्य और नष्ट कर दिए गए लोकतंत्र को बचाने के लिए चोट सहे हैं। दस अक्तूबर का एक और ख़तरनाक पहलू है। सरकार जेन ज़ी के पीछे उनके घरों तक पहुंच गई है। हर राज्य में इस उम्र के बच्चे अब निगाह में आ गए हैं। उनकी प्रोफाइलिंग हो रही है।सरकार ने जेन ज़ी को अपना दुश्मन मान लिया है।

, Protest, Police,

09/10/2026

मेरे हिसाब से कल का आंदोलन बिना हुए ही सफल हो गया। इसके लिए सरकार का धन्यवाद। अब 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर एक आदमी पहुंचे या ना पहुंचे, आप यह नहीं कह सकते कि आंदोलन में कोई पहुंचा ही नहीं। क्योंकि जब पहुंचने ही नहीं दिया जा रहा। जब आप देश के हर हिस्से से दिल्ली पहुंचने वाली ट्रेनें रद्द कर रहे हैं। दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशन बंद कर रहे हैं। ओला-उबर टैक्सी बंद कर रहे हैं। दिल्ली आने वाली हर ट्रेन और बस के भीतर से लोगों को डिटने कर रहे हैं। रेलवे स्टेशन से, बस अड्डे तक से लोगों को उठा रहे हैं। लोगों को घरों में नज़रबंद कर रहे हैं। एक आदमी सब्ज़ी भी लेने जा रहा है तो उसके साथ एक कॉन्सेटबल जा रहा है। दिल्ली में पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्स की हज़ारों टुकड़ियां तैनात की जा रही हैं। डिटेंशन सेंटर बनाए जा रहे हैं। तो इससे ज़्यादा सफल आंदोलन क्या होगा। कोई आंदोलनकारी कोशिश करके भी इस तरह भारत बंद नहीं कर सकता था। जितना इससे डरकर मोदी सरकार ने कर दिया है।
और हां, अगर आप सोचते हैं कि 10 को आंदोलन नहीं हुआ तो विफल है, तो आप ग़लत समझ रहे हैं। क्योंकि 10 अक्टूबर से आंदोलन का ऐलान है, केवल एक दिन 10 अक्टूबर का नहीं है। अब चाहे वो 10 को 11 को या 12-15 को। अब तो यह शुरू हो गया है। वैसे देखें तो यह आंदोलन पिछली 2 अक्टूबर से चल रहा है। और अब थमने वाला नहीं है। कितने दिन लोगों को बंधक बनाओगे।
शुक्रिया मोदी सरकार। घर-घर तक इस आंदोलन की ख़बर पहुंचने के लिए

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर लोकतांत्रिक आवाज़।लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी...    Rahul Gand...
09/10/2026

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर लोकतांत्रिक आवाज़।

लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी...



Rahul Gandhi Indian National Congress Indian National Congress - Delhi

08/10/2026

*प्रिय कांग्रेसजन,*

वर्तमान परिस्थितियों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे एवं लोकतंत्र को बचाने के लिए *श्री राहुल गांधी जी निरंतर संघर्ष कर रहे हैं।* उनका यह संघर्ष लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए हम सभी के सामने एक जीता-जागता उदाहरण है।

ऐसे समय में हम सभी कांग्रेसजनों की जिम्मेदारी बनती है कि हम राहुल गांधी जी के कदम से कदम मिलाकर उनके संघर्ष को मजबूती दें और इस विरोध की आवाज़ को जन-जन तक पहुंचाएं।

इसी उद्देश्य से आप सभी से मेरा आग्रह है कि आज, *दिनांक 8 अक्टूबर 2026 को दोपहर 1:30 बजे अपने साथियों संग बड़ी संख्या में राजघाट पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं और राहुल गांधी जी के संघर्ष में उनके साथ मजबूती से खड़े हों।*

आपकी एकजुटता और आपका साथ हमारे संघर्ष को और मजबूत करेगा तथा राहुल गांधी जी के लोकतंत्र बचाने के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करेगा।

**देवेंद्र यादव*
*अध्यक्ष*
*दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी**

✊🔥 वोट चोरों के खिलाफ हल्ला बोल!जनता के वोट की ताकत से बड़ा कुछ नहीं।चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबद...
07/10/2026

✊🔥 वोट चोरों के खिलाफ हल्ला बोल!

जनता के वोट की ताकत से बड़ा कुछ नहीं।
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकता है।

📢 आवाज़ उठाइए, सवाल पूछिए और लोकतंत्र की मजबूती के लिए अपनी भागीदारी निभाइए।

वोट की रक्षा — लोकतंत्र की रक्षा! 🇮🇳

#वोटचोर

07/10/2026

भारत के साथ देशद्रोह करने वाले कोई भी हों - मोदी, शाह, ज्ञानेश या भागवत, बचेंगे नहीं।

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RANI BAGH
Delhi
110034

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