26/11/2021
मोदी जी या योगी जी आप सपने बहुत बड़े बड़े दिखाते हैं, काम भी शुरू कर देते हैं, कॉंग्रेस के भूमि अधिग्रहण कानून की वजह से आपको भूमि अधिग्रहण में कोई दिक्कत नहीं होती है, 2G,3G, 4G या 5G से सरकार हवा बेचकर भी खूब कमाई कर रही है, पेट्रोल पर भी बहुत कमाई हुयी है, public money का इस्तेमाल संतुलित तरीके से होना चाहिए, देश बहुत बड़ा है, Delhi NCR ही भारत नहीं है, Corona काल में आपने देख ही लिया, गंगा में तैरती लाशों को शायद आप भूल गए, पहले मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करे, जो सुविधाएं विकसित की गई हैं उनका बेहतर इस्तेमाल किया जाय, 8 मार्च 2019 को Ghaziabad में सिविल एविएशन टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया था. वायुसेना के हिंडन एयरबेस से लगे सिविल एयरपोर्ट से पहली व्यावसायिक उड़ान सेवा शुरु हुई थी जिसके तहत नौ सीटों वाले एक विमान ने उत्तराखंड के पिथौड़ागढ़ जिले के लिए उड़ान भरी थी. यह भी चुनाव के पहले शुरू किया गया था , लगभग विकास , रोजगार, सुन्दरता के वैसे ही दावों के साथ जैसा अज जेवर के बारे में हैं .
इस टर्मिनल को चालीस करोड़ रूपये खर्च कर बनाया गया था .यहाँ यात्रियों की सुविधा के लिए आठ चेक-इन काउंटर, चार जांच बूथ, दो आगमन स्थल और 90 गाड़ियों को खड़ा करने के लिए पार्किंग की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रति घंटे ट्रमिनल पर 300 यात्रियों की आवाजाही की सुविधा होगी। इस सिविल एन्क्लेव में व्यस्त समय में 300 यात्री आ और जा सकते हैं।
दावा किया गया था कि इस हवाई अड्डे से उड़ानें शुरू हो जाने के बाद सबसे ज्यादा फायदा गाजियाबाद, पूर्वी दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर के नागरिकों को मिलेगा, जो अभी तक फ्लाइट पकड़ने के लिए दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जाना पड़ता था। इससे उन्हें फ्लाइट के समय से करीब दो घंटे पहले निकलना पड़ता था। खूब प्रचार हुआ की यहाँ से पिथौरागढ़ (उत्तराखंड),नाशिक (महाराष्ट्र),कन्नूर (केरल), फैजाबाद (उत्तर प्रदेश), हुबली (कर्नाटक), शिमला (हिमाचल प्रदेश), कालाबुर्गी (गुलबर्ग, कर्नाटक), जामनगर (गुजरात) के लिए उड़ान मिलेगी .यहां भी पता नहीं कौन सलाहकार होते हैं अगर पटना, प्रयाग राज, वाराणसी, रांची, दरभंगा जैसी जगहों के लिए उड़ान की व्यवस्था होती तो बेहतर रहता क्युकि इस area की avadi इन्हीं जगहों की है, शायद लोग इसका फायदा उठाते, लेकिन दिमाग से पैदल अधिकारी public money के इस्तेमाल का कोई अलग ही इरादा रखते हैं, बन्दे भारत ट्रेन शुरू किया है, बहुत अच्छा है, वाराणसी, प्रयाग राज और कानपुर से आने वाले यात्रियों को ghaziabad station पर उतरने की सुविधा दे दी जाती तो आधी ट्रेन यहीं खाली हो जाय, लोगों का समय बचता, अनावश्यक गाड़ियों के इस्तेमाल से बचाकर प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग भी मिलता, गैर जिम्मेदार अधिकारियों को तो दण्डित किया जाना चाहिए, हमलोग इस क्षेत्र में रहते हैं, दुःख होता है देखकर, हिंडन airport की
हकीकत तो यह है की पहले तो Covid के नाम पर और उसके बाद अज्ञात कारणों से यहाँ से उड़ान हैं ही नहीं , इस हवाई अड्डे की तरफ आने वाले रास्ते – चाहे भजनपुरा की तरफ से हो या फिर मोहन नगर की तरफ से या फिर दिलशाद गार्डन के रास्ते --- एक भी सडक बगैर गड्ढे , अतिक्रमण और बहुत से वाहनों के एक साथ चलने के कारण जाम, गलत दिशा में वहां चलने , गंदगी का शिकार है , यहाँ अटक की हवाई अड्डे से पाँच सौ मीटर दूर की सडक भी धंस गई थी – यहाँ इस airport के कारण न तो किसी भी एक व्यक्ति को रोजगार मिला और न ही विकास के पापा कहीं घुमते दिखे – दुर्भाग्य है की जिन लोगों को ढो कर जेवर के उदघाटन में लाया जा रहा है , वे कभी इस एयरपोर्ट में घूस भी नहीं पायेंगे – विकास और चमक के दावे के लिए हिंडन हवाई अड्डा देख लें .
यह केवल ठेका देने, जमींन के अधिग्रहण में पैसा बनाने, रियल एस्टेट वालों को माल बनाने का अवसर देने के लिए होता है, कहने की जरूरत नहीं , ऐसे ही बड़े ठेकों से चुनाव के अघोषित खर्चे पूरे होते हैं - मिडिया घरानों को विज्ञापन मिलते हैं -- जिस जमीन पर गेंहू उगता है वहां कंक्रीट बो दी जाती है, खेती के लिए जमीन कहां विकसित कर रहे हैं? जरा ध्यान इस पर भी दीजियेगा...