05/06/2026
जब लोग खिड़कियों से लटक रहे थे और कई लोगों की सांसें थमने लगी थीं, तब वसीम रज़ा आग की लपटों की ओर दौड़ पड़े।
मैक्स हॉस्पिटल में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करने वाले वसीम किसी रेस्क्यू टीम का हिस्सा नहीं थे। उन्हें आपदा प्रबंधन का कोई विशेष प्रशिक्षण भी नहीं मिला था। लेकिन जब उन्होंने लोगों को इमारत में फंसा देखा, तो वे मदद के लिए आगे बढ़ गए।
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल-कम-गेस्ट हाउस में भीषण आग लग गई थी। घना धुआं पूरे भवन में भर गया और कई मेहमान अंदर फंस गए। इनमें से कई लोग इलाज के लिए दिल्ली आए हुए थे।
इस अफरा-तफरी के बीच वसीम रज़ा ने लोहे की खिड़की की ग्रिलें काटने में मदद की, नीचे गद्दे बिछवाए ताकि लोग कूदकर अपनी जान बचा सकें, बेहोश लोगों को बाहर निकाला और सांस लेने में संघर्ष कर रहे लोगों को CPR देकर बचाने का प्रयास किया।
वह फायरफाइटर नहीं थे।
वह वहां ड्यूटी पर भी नहीं थे।
वह सिर्फ एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने किसी को मरते हुए देखने के बजाय मदद करना चुना।
जब धुएं से इमारत भर गई और हर सेकंड किसी की जिंदगी तय कर रहा था, तब वसीम रज़ा ने यह नहीं सोचा कि यह किसकी जिम्मेदारी है।
सात जिंदगियां बचीं क्योंकि एक व्यक्ति ने तय किया कि किसी न किसी को आगे आना ही होगा।
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