03/06/2026
बसपा सुप्रीमो, 2007 में जब असेंबली इलेक्शन के लिए निकली थी ,तो बीजेपी ने भ्रम जाल फैलाया था के वो मान्यवर कांशी राम से भी अधिक पॉपुलर एवं बड़ी नेता है, और पूर्ण बहुमत से जीती , सी एम बनी।
39 विधायक एक ही जाति के थे, सतीश मिश्राजी की सामाजिक इंजीनियरिंग का नतीजा था।
204 में से 39 का अर्थ, बसपा सुप्रीमो बीजेपी की कठपुतली बन कर रही 5 साल ,अत: 2012 तक कठपुतली की तरह सी एम रही, बहुजन अस्मिता ताक पर रखी रहै गई। भ्रमित रही कि बहुत बड़ी नेता है, भाईचारा ,मेल मिलाप , बहुजन सोच, रैली आदि खत्म हो गई। डर के रहने लगी, सतीश मिश्रा जी अपनी चाल में सफल होते रहे। फलस्वरूप 2012 ,2017,2022 में आकर लखनऊ विधान सभा में जीरो सदस्य हो गये । 2024 में पार्लियामेंटबम जीरो एम पी की संख्या हो गई।
लेकिन अंधभक्त एवं चाटुकार की संख्या इतनी है कि आज भी सुप्रीमो को प्रधान मंत्री बनाना चाहती है। किसी की हिम्मत नहीं है के हकीकत में बात करें।
2024 आम चुनाव में बीजेपी से अधिक सीटों पर सुप्रीमो ने टिकट दिये, दिल्ली एस3ंबली में 68/70 ,लेकिन जीरो परिणाम।
यही हाल रहा बिहार, बंगाल में , लेकिन बीजेपी को जिताने में सफलता बराबर मिली, बहुजन समाज की सुख दुख से क्या लेना ।
एक नई रणनीति , किसी से गठबंधन नहीं करेंगे। बहुत सफल रही बहुजन राजनीति को तिलांजलि देने में।
बीजेपी आज 45 पार्टीज से गठबंधन में है, लेकिन बसपा सुप्रीमो , कोई गठबंधन नहीं करेंगी।
नए नए जुमले, बहुजन की जगह ,सर्व जन ( बहुजन खत्म), ब्राह्मणों ने सुप्रीमो की आँखों पर पट्टी बांध दी है कि ब्राह्मण उन्हें 2027 में सी एम बना देंगे। ब्राह्मणों की वकालत !
सही अर्थों में ,राजनीति से कुछ भी लेना देना नहीं, 2012 के बाद बसपा ने कोई चुनाव नहीं लड़ा ,केवल टिकट का व्यापार किया गया ।
बहुजन साथियों जागो!
ईमानदार राजनीति ही बहुजन समाज को सम्मान दिल सकती है ,अन्यथा सब कुछ समाप्त हो रहा है।
भ्रम जाल से बाहर निकलो ।
आपकी अपनी पार्टी रिपब्लिकन समाज पार्टी में आपका स्वागत।
2027 में फिर से एक नया इतिहास बनाना है कि सुप्रीमो ने बहुजन समाज से साथ ईमानदारी नहीं बरती , नतीजा होगा बाप का अंत।
जय हो रिपब्लिकन समाज पार्टी !!! ईमानदार बहुजन राजनीति की पुनः एक मिसाल।
डॉ बी एस सत्यार्थी