12/05/2026
“माननीय प्रधानमंत्री जी,
जब भी देश पर कोई चुनौती आती है, सबसे पहले आम जनता से ही अपील की जाती है—कभी गाड़ियाँ कम चलाने को कहा जाता है, कभी सोना न खरीदने को, कभी त्याग और बचत करने को कहा जाता है। देशहित में जनता हमेशा साथ खड़ी रही है, टैक्स भी देती है, संकट के समय दान भी करती है और हर मुश्किल में सहयोग भी करती है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बार सिर्फ़ जनता ही कुर्बानी दे? क्या जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और विधायकों की भी कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती? क्या वे अपनी सुविधाओं, वेतन-भत्तों और विशेषाधिकारों में कटौती कर देश के सामने उदाहरण पेश नहीं कर सकते?
अगर देशहित में त्याग ज़रूरी है, तो इसकी शुरुआत ऊपर से होनी चाहिए। जब जनता देखेगी कि उसके नेता भी अपने हिस्से का त्याग कर रहे हैं, तब उसका विश्वास और मज़बूत होगा। देश सेवा केवल जनता का कर्तव्य नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे हर व्यक्ति की पहली ज़िम्मेदारी है।”