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You And Me - Episode 2 : Pundit Nehru - Anwar Jamal : शुजा ग़ैर-मुन्सलकIt centres around our first Prime Minister Pundit...
13/11/2017

You And Me - Episode 2 : Pundit Nehru - Anwar Jamal : शुजा ग़ैर-मुन्सलक

It centres around our first Prime Minister Pundit Jawaharlal Nehru. This Episode is a Ghazal written by Mohd Anwar Jamal Faiz. The ghazal intends to outline the sketch of the work and visions of a true nationalist and a secular soul of India.

http://www.bas1.com/2017/11/you-and-me-episode-2-pundit-nehru-anwar.html

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You And Me - Episode 1 : Aruna Asaf Ali - Anwar Jamal : तेजस्विनी अरुणा Tejaswini Aruna - The Hindi Poem penned down rem...
13/11/2017

You And Me - Episode 1 : Aruna Asaf Ali - Anwar Jamal : तेजस्विनी अरुणा

Tejaswini Aruna - The Hindi Poem penned down remembering Bharat Ratna - Aruna Asaf Ali. The Heroine of the 1942 Quit India Movement.

http://www.bas1.com/2017/07/aruna-asaf-ali-hindi-poem-
tejaswini.html

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राष्ट्रीय आंदोलन फ्रंट चलाएगा ‘भारत जोड़ो अभियान’-----------------------------राष्ट्रीय आंदोलन फ्रंट ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ क...
08/08/2017

राष्ट्रीय आंदोलन फ्रंट चलाएगा ‘भारत जोड़ो अभियान’

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राष्ट्रीय आंदोलन फ्रंट ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के हीरक जयंती वर्ष को अनोखे अंदाज में मनाएगा। इसके तहत फ्रंट की केन्द्रीय कमेटी ने साल भर चलने वाले आयोजनों की रूपरेखा तैयार की है, जिसमें फ्रंट के साथी इस साल को ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ के रूप में मनाएंगे। इसकी शुरुआत खास दिन 9 अगस्त 2017 से जन्तर-मन्तर से की जा रही है। उस दिन का खासा ऐतिहासिक महत्व है।

इसी दिन 1942 को महात्मा गाँधी ने बम्बई के ग्वालिया टैंक से ऐतिहासिक भाषण देते हुए कहा था मंत्र है छोटा सा मंत्र जो मैं आपको देता हूँ। उसे आप अपने हृदय में अंकित कर सकते हैं और अपनी साँस द्वारा व्यक्त कर सकते हैं। वह मंत्र है - करो या मरो ! या तो हम भारत को आज़ाद कराएँगे या इस कोशिश में अपनी जान दे देंगे। अपनी गुलामी का स्थायित्व देखने के लिए हम जिंदा नहीं रहेंगे। गांधी के इसी भाषण के साथ समूचा देश आज़ादी की आखिरी लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर उतर गया था।

राष्ट्रीय आंदोलन फ्रंट का मानना है कि आजादी आसानी से नहीं मिली बल्कि उसके लिए हमारे पुरखों ने भारी कीमत चुकाई थी। आजादी हासिल करना जितना कठिन था उससे भी कठिन चुनौती उसे बनाए रखना है। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए जिस तरह लोग एकजुट हुए थे, उसे उस समय कुछ राजनैतिक संगठनों ने बांटने की कोशिश की तो आज फिर विभाजन करने की कोशिशें हो रही हैं। अंदर ही अंदर बंटे देश को किसी बाहरी दुश्मन की आवश्यकता नहीं होती, उसके लिए आपसी फूट, ईष्र्या और घृणा ही सबसे खतरनाक दुश्मन का काम करती है। ऐसा करने वाले लोग अंग्रेजों वाली फूट डालो राज करो की नीति पर चलते हुए देश के सामाजिक सद्भाव को खराब करने का काम कर रहे हैं। ये लोग आजादी की लड़ाई के उसूलों से नहीं, आजादी की लड़ाई में हिस्सा न लेने वालों के उसूलों से प्रेरणा पाते हैं। इसके बावजूद फं्रट का मानना है कि अपने ही इन भाइयों के खिलाफ भारत छोड़ो का नारा नहीं दिया जा सकता। फ्रंट उनके खिलाफ नहीं बल्कि उनकी विभाजनकारी सोच के खिलाफ है।

इस माहौल को देखते हुए फ्रंट के साथी ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ का आह्वान करते हैं। इस अभियान के तहत फ्रंट से जुड़े लोग एक दूसरे की कलाई पर तिरंगा रक्षा सूत्र बांधकर एक दूसरे से प्रेम और सहयोग करने की सौगन्ध लेंगे। साथ ही प्रार्थना करेंगे कि हमारे हृदय से हर प्रकार की घृणा का अंत हो। सबसे पहले और उसके बाद भी एक भारतीय के रूप में पहचाने जाएं। यही फ्रंट की नियति है और यही उसका ध्येय है।

National Movement Front
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01/08/2017

* RIP Comrade and Scientist Dr PM Bhargava *

Veteran molecular biologist and a vehement critic of genetically modified crops, Pushpa Mittra Bhargava, died at his home in Hyderabad on Tuesday. He was 89. Bhargava was the founding director of the CCMB.

We should remember that Mr Bharghav remained well engaged with issues in science and policy. He was a strident critic of genetically modified crops and multinational seed companies.

He had led what came to be called the Award Wapsi programme in 2015 when scientists and litterateurs returned their awards against the rising intolerance in India. Mr. Bhargava returned his Padma Bhushan — in solidarity with writers and artistes. He stood for protest against the climate of religious conservatism. He stood against incidents such as lynching of Akhlaq in Dadri, murder of scholar, M.M. Kalburgi. Bhargava also moved the Supreme Court against an initiative by former education minister to introduce astrology in universities.

As reported by The Hindu, He was a tireless crusader against irrationality and superstition. He had the ability to connect seemingly disparate dots and had an overarching vision about the future.

It is a great loss for the country. He brought modern cell and molecular biology to India. And, honest and upright to a fault, he was fearless when it came to his beliefs.

We mourn his loss.
Rest in peace Dr PM Bhargav

Hindi Poetry Culture revived. The Classic and the only Hindi poem remembering Bharat Ratna - Aruna Asaf Ali. तेजस्विनी अ...
28/07/2017

Hindi Poetry Culture revived. The Classic and the only Hindi poem remembering Bharat Ratna - Aruna Asaf Ali.

तेजस्विनी अरुणा
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अरुणा अरुणा
कैसी करुणा
दिल मे तेरे बसती थी ।
भारत रत्न
तू शांति-ध्वज
तू तूफ़ानी हस्ती थी ।।

आसफ़ और
तेरी वो जोड़ी
सर्वत्र चमकती थी ।
तेरे क़िस्से के
हर हरफ़ो में
प्रेम-ग़ज़ल मचलती थी ।।

हो आंदोलन या
जेल की बेड़ी
तू तो बस मतवाली थी ।
देश अंतर्मन
श्यामलपट पर
तूने धूम मचा ली थी ।।

गूंजित है
तेरे कंठ की -
'भारत छोड़ो' - मधुमय पुकार ।
तेजस्विनी
तू साधती
बृहत बंधुता, प्रेम, अधिकार ।।

जन मन में
था नाम बड़ा
और सर पे भी इनाम बड़ा ।
अँग्रेज़ों की
नाक मे दम
कर दिया तूने काम बड़ा ।।

गोवालिया
मैदान सुनाए
शौर्य जो तुझमे बसता था ।
ध्वज हिंद का
तेरे हस्त में
इठलाता था हंसता था ।।

उन्नयनकारी
निडर, दयालु
तू निस्वार्थ स्नेहिल थी ।
सत्गुन तेरा
अगाध और देह
देश-प्रेम पुष्प से मली थी ।।

बेल संग्राम
माँ भारती
तेरे आँचल में भी पली थी ।
हर दमन दंश
ललकारती
तू अरुणा आसफ़ अली थी ।।

© अनवर जमाल 'बरबर' ग़ाज़ीपुरी

27/07/2017

प्रो० यशपाल, आज देश के सूर्यग्रहण के समय टर्निंग पॉइंट कौन बताएगा?
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आज़ाद भारत के सबसे कठिन टर्निंग पॉइंट पर प्रो० यशपाल हमें छोड़कर चले गए. सन 1995 की बात है. भारत में पूर्ण सूर्यग्रहण पड़ने वाला था. अंधविश्वासों से भरे समाज में उस दिन लगभग ब्लैक आउट जैसा माहौल था. हर कोई अपने खिड़की-किवाड़ बंद किये घर में कैद था. एक गर्भवती महिला के घर में तो खिड़की की दरारों में कागज ठूंस दिया गया था. कोई कहता था सूर्यग्रहण देखने से लोग अंधे हो जायेंगे. कोई कहता था ग्रहण के सूर्य की रौशनी पड़ते ही गर्भवती महिलाओं के गर्भ गिर जायेंगे. यानी सूरज डूबने वाला था और अन्धेरा छाने वाला था. एक अन्धविश्वासी भीरु समाज इस डर से डरा अपने खोल में सिमट गया था.

ऐसे समय में एक नेहरूवियन (वो खुद को नेहरु युग का वारिस मानते थे) दूरदर्शन पर लोगों के दिल से डर मिटाने की अपील कर रहा था. सन जैसे सफ़ेद बाल और बेहद शांत व्यक्तित्व का एक वैज्ञानिक संत मुस्कुराते हुए बता रहा था कि अगर सूर्यग्रहण नहीं देखा तो जीवन भर पछताओगे. हम जैसे किशोर जो पैदा तो उसी जकड़े समाज में हुए थे, के लिए प्रो० यशपाल एक फ़रिश्ता थे जो हमें अज्ञान के अंधेरों से ज्ञान के उजालों की ओर लेकर जा रहे थे.

बेहद सरल तरीक़े से उन्होंने कहा कि कोई पुराना एक्सरे लेकर उससे सूर्यग्रहण देखो. अगर एक्सरे न हो तो अपने हाथ की उँगलियों को जोड़कर उसकी झिरी से सूर्य की एक झलक देखो. बस नंगी आँखों से सूर्य मत देखना क्योंकि देख ही नहीं पाओगे. मेरे जैसे कलात्मक प्रतिभा के धनी और बाग़ी के लिए यह तो अपने आस-पास के समाज से बगावत का मौक़ा था. मैंने एक एक्सरे लिया और पुरानी फ़ाइलों को काटकर चश्मे तैयार कर लिए. चश्मे इसलिए कि मैंने जीवन में शायद ही कोई काम अकेले किया हो. जब तक सबको न बिगाड़ लूं, चैन नहीं मिलता.

उसके बाद मैं नियत समय पर अपनी बहन के साथ छत पर चढ़ गया. फिर पड़ोस की छत से अपने दोस्त बुलाये जिनका साथ दिली प्रेम था. सब इकठ्ठा हुए और सूर्य ग्रहण की प्रक्रिया देख-देखकर तालियाँ बजने लगीं, शोर होने लगा. लोग चौंके और फिर सावधानी से माजरा समझकर अपने घरों की खिडकियों से झाँकने लगे. हम लोग जो अपनी छत पर तालियाँ पीट रहे थे, उन्हें बाहर आने के लिए उकसाने लगे. लोगों ने हिम्मत की और थोड़ी देर में माहौल बदल गया. इतने सारे चश्मे बनाए ही इसीलिए थे कि हर कोई देख सके. लोग अपने घर बुलाने लगे और मैं दौड़-दौड़कर लोगों को एक्सरे फ़िल्म से उन्हें सूर्यग्रहण दिखाने लगा. धीरे-धीरे लगभग अंधेरा हो गया और मौसम ठंडा हो गया. इस समय सूर्य एकदम ईद के चाँद जैसी कला में आ गया था. पूर्ण सूर्यग्रहण भारत के कुछ ही हिस्सों में दिखाई दिया था. यह कहानी सिर्फ ये बताने के लिए कि हमारी पीढ़ी के पास प्रो० यशपाल थे जो हमें खेल-खेल में वैज्ञानिक बना रहे थे.

एक बार जेएनयू में नेहरु मेमोरियल लेक्चर की सदारत करते हुए नेहरूजी से जुड़े कुछ किस्से सुनाये. वो आज की परिभाषा में देशद्रोह के अड्डे जेएनयू के 2012 तक चांसलर भी रहे. उन किस्सों में एक आप सबके साथ साझा करता हूँ क्योंकि प्रो० यशपाल के देहांत पर आंसू वो भी बहायेंगे जो नेहरूजी को दिन-भर गाली देते नहीं थकते. जिस वक़्त दिल्ली में विभाजन के बाद दंगे हो रहे थे, प्रो० यशपाल किंग्सवे कैंप में लगे शरणार्थी शिविर में वालंटियर हो गए (स्वयंसेवक लिखने से भाई लोग कुछ और अर्थ लगा लेंगे). वो बताते हैं कि एक सुबह अचानक एक कार आकर रुकी जिसे नेहरु खुद ड्राइव कर रहे थे. नेहरु ने तकरीबन बीस साल के यशपाल से कड़कती आवाज़ में पूछा— इस शिविर का सुपरवाइसर कौन है? प्रो० यशपाल ने बताया कि सब यहीं आसपास हैं. नेहरु बोले— उनको बोलो मुझे शरणार्थियों से बात करनी है.

तुरंत लोगों को इकठ्ठा किया गया और एक मेज रख दी गयी जिस पर खड़े होकर नेहरु ने शरणार्थियों को ढाढ़स बंधाना शुरू किया और अपनी तरफ से नफरत न करने की अपील की. इन शरणार्थियों में ज्यादातर सिख और हिन्दू थे जो तब के पश्चिमी पाकिस्तान से अपना सबकुछ लुटाकर आये थे. उनमें एक नौजवान बिफर उठा और कहने लगा कि जैसे मुसलमानों ने मेरे परिवार को काट डाला है, मैं मुसलमानों को काट डालूँगा. प्रो० यशपाल बताते हैं कि 58 साल के नेहरु उस मेज से भीड़ के अन्दर कूद पड़े और दोनों हाथों से उस लड़के के बाल पकड़कर हिलाने लगे. नेहरु ज़ार-ज़ार रो रहे थे और लगभग रिरियाते हुए कह रहे थे— हमें इस देश को पाकिस्तान नहीं बनने देना है, मैं इस देश को पाकिस्तान नहीं बनने दूंगा.

आज जिस दौर में वो लोग सत्तानशीन हैं जिनका सपना भारत को पाकिस्तान बनाने का है, हमारे बीच नेहरु तो कब के नहीं रहे, आज उस पीढ़ी की एक और प्रज्ज्वलित ज्योति बुझ गयी. प्रो० यशपाल, आज इस देश के सूर्यग्रहण के समय में हम लोगों को टर्निंग पॉइंट कौन बताएगा?
(लेखक आज़ादी की लड़ाई के प्रचार-प्रसार को समर्पित संगठन राष्ट्रीय आन्दोलन फ्रंट के महासचिव हैं.)
26 जुलाई 2017
सौरभ बाजपेयी
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तेजस्विनी अरुणा - The Classic and the only Hindi poem remembering Bharat Ratna - Aruna Asaf Ali. Written by Mohd Anwar J...
17/07/2017

तेजस्विनी अरुणा - The Classic and the only Hindi poem remembering Bharat Ratna - Aruna Asaf Ali. Written by Mohd Anwar Jamal Faiz.

http://www.bas1.com/2017/07/aruna-asaf-ali-hindi-poem-tejaswini.html

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01/02/2016

How beautiful our country is. It's just few people who try to infuse communalism. We should be one.

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