08/05/2026
शादी की सालगिरह मुबारक हो प्रिय
देखते देखते 19 वर्षों के इस पड़ाव को हम दोनों ने पार कर लिया....और ऐसा लगता है कि मानो कल की ही तो बात थी शादी।
. मुझे याद है मौसी के घर में किसी की शादी थी...मुझे उस शादी में शामिल होने के लिए जाना था। 2005 के आस पास का समय था। मै शामिल हुआ...और बाद में पता चला कि मेरे रिश्ते के लिए... लड़की के तरफ से देखने वाले आयेंगे।... उससे पहले भी कितने लोग देखने के लिए आए थे... मैने चाचाजी को बोला था..मेरे लिए दहेज की बोली मत लगाना....बेचना मत...यह शब्द तब भी था मेरे लिए....और आने वाले समय के लिए बच्चों के लिए भी वही शब्द है।
.अब जब लड़के और लड़की दोनों एक दूसरे को देखने के बाद तसल्ली करते है...कुछ दिन साथ रहते है...उसके बाद भी शादी एक मजाक सा बनकर रह गया है....उस दौर में मेरे साथ अडिग कमद से कदम मिलाकर खड़ा रहना... सच कहूं तो यह "स्वर्ग" ही तो है, यह इसी जन्म वाला स्वर्ग है।
..उस समय मुझे देखने के लिए आपके पिताजी, आपके भाई साहब और भाई साहब के ससुर जी आए थे....तब मुझे आवाज दी गई थी....मै क्रिकेट खेल रहा था शाम का समय था.... तब मुझे देखा गया। ... भैया बेना डोलाते हुए कह रहे थे...पूरे दिन ऑफ़िस में ऐसी में रहते है इसीलिए पसीना आ रहा है बहुत।
हां, जब तक मैं पैसा नहीं कामता था तब तक..मेरे लिए जाति और रंग दोनों मेरे मन में हीन भावना भरते थे। जैसे जैसे पैसा कमाने लगा... लोगो के प्रति... समाज के प्रति...मेरे विचार बदलते गए...मै खुद से प्रेम करने लगा....और उस प्रेम में आपने चार चांद लगा दिया।
.. मुझे सांवला नहीं.. काला ही कहेंगे...तेज तपती दोपहरी में हमारा रंग और ... प्रकृति हो जाता है। ..,मुझे स्वीकार करना... बिना देखे...बिना टेलीफोनिक बात चित के.. इतने भी पुराने जमाने के नहीं थे....लेकिन शादी के बाद प्रेम होना....मै सच कहूं तो "स्वर्ग" यही है, इसी जन्म में है...।
आपकी असली परीक्षा तब थी जब मेरे जेब में पैसे नहीं थे...दिल्ली जैसे महानगर में तीसरे माले पर रहना... बिना कूलर, बिना एसी.... बेड के ऊपर पानी छिड़कर ठंडा करना....और नींद के लिए गर्मी में इंतजार करना...अपने बखूबी साथ निभाया...बिना किसी द्वेष और क्लेश के ... आपने साथ दिया। तीन बच्चों के दिल्ली जैसे महानगर में परवरिश करना...कितना मुश्किल दौर से गुजरे है...मेरे अलावा कोई साक्षी है ... वो आप है।...मै सदैव पूरे जीवन आपका आभारी रहूंगा।
..अब जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो गौरवान्वित महसूस करता हूं...। मुझे कुछ रिग्रेट नहीं है जीवन से... जो मिला उसको मैने सहर्ष स्वीकार किया, चाहे वह दुःख हो अथवा सुख। मै आज चालीस वर्ष से ज्यादा उम्र होने के बाद भी बीपी और शुगर से दूर रह पाया हूं...तो इसमें भी आपका योगदान है....आज आय के अनेक श्रोत है.... उसमें भी आपका योगदान है। ..दिल्ली जैसे महानगर में अपने काम का सेटअप है... उसमें भी आपका योगदान है।
मुझे अब खराब और अच्छे समय में अंतर न के बराबर दिखता है...ऐसा लगता है कि मेरे महादेव मेरे लिए हर पल मेरे साथ खड़े है। मै जैसा सोचता हूं... ठीक वैसा ही होता है.... जहां महादेव हो... वहां तो सब ठीक ही होगा।
कहते है ...जहां शांति है... जहां सुकून है...
वहां जरूर महादेव जी है।
. हे प्रिय, मुझे सम्पूर्ण करने के लिए शादी की सालगिरह की पुनः बधाई और आपको शुभकामनाएं।
बहुत बहुत, सम्मान, स्वाभिमान, प्यार और आभार।