15/08/2026
माँ, माटी और परम्परा को आगे बढ़ाते हुए Gen Y पीढ़ी
मुझे याद है जब एक छोटी सी छत पर उस छत की औकात से ज्यादा लोग सोते थे ...तब लेदरा (पुराने कपड़े को तह करके सिलाई... धागे के गहरी बुनाई, सिलाई) और लेदरा का खोल (कवर) साड़ी या धोती....हुवा करता था।
तब बाजार से कुछ भी खरीदने की क्षमता नहीं के बराबर हुआ करता था लगभग सभी परिवारों का। स्वेटर बुनना और वही स्वेटर जब तक शरीर का साइज न बदले तब तक पहनना....फिर धीरे धीरे लुधियाना और सूरत ने देश में ख़रीदारी का दौर बदल दिया.. सस्ती चीजें... फैंसी चीजें।
.मैने इस महीने नोटिस किया कि घर में चार पांच पायदान.... यानि घर में प्रवेश से लेकर रूम में प्रवेश तक ... बाजार से खरीदे हुए पायदान गायब है और .. श्रीमती जी के हाथ से बने हुए पायदान दिख रहे है....वही खोल (कवर) जो फट चुके थे उसका भी उपयोग... बुनने के बार पायदान के रूप में...हो चुका है।
यूटयूब से ..अलग अलग भोजन विधि में पारंगत होने के बाद.....यह एक नई हुनर है।
. चुकी यह साड़ी से बना हुआ है तो.. धोने के बाद सूखने में भी ज्यादा समय नहीं लेता ...और घर को सुन्दर बनाने में मदद भी करता है।
मुझे बहुत खुशी हुई, दिल्ली जैसे महानगर में रहते हुए .. गांवों के माँ, माटी और परम्परा को आगे बढ़ाने में मदद करते हुए श्रीमती जी ने मुझे गांवों से जोड़कर रखा हुआ है....यही हुनर कदर करवाता है और पैसे बचाता है।
. दो शब्द लिखने से मै अपने आप को रोक नहीं पाया।
आभार श्रीमती जी।