23/08/2024
वाराणसी=22/08/2024 दिन (गुरूवार) को प्रातः 11 बजे गोेंड वीरांगना महारानी दुर्गावती स्मृति भवन न्यास, चक्का एवं जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आदिवासी बाहुल्य ग्राम सभा-चक्का, वि0ख0-हरहुआ, वाराणसी में आयोजन किया गया। छठवां वर्ष भोजली जनपद वाराणसी के गोंड समुदाय द्वारा अपने घरों से लाये गये भोजली (जरई) को आदिवसी भुमक द्वारा पूजन किया गया उसके पश्चात गोणउ नृत्य ,भोजली गीत गाते हुए गांव के चारो तरफ जात्रा प्रारम्भ किया गया और वरूणा पदी के तट पर भोजली घाट पर भोजली का विर्सजन कर किया गया तथा बड़ोदव का समुरिन कर महिलाओं ने जरई को अपने भाई एवं पिता के कान पर सम्मान पूर्वक रख कर अपने बड़ों से आशीर्वाद प्राप्त किये।
इस अवसर पर तिरूमाल दिनेश कुमार गोंड-वीरांगना महारानी दुर्गावती स्मृति भवन न्यास ने कहा कि आदिवासी समाज के मुख्य पर्व में भोजली जात्रा का विशेष महत्व है। साथ ही कहा कि भोजली जात्रा पर्व में गोंड आदिवासी समाज की आस्था एवं मान्यता है कि भोजली पंडूम (पर्व) मानव उत्पत्ति के समय से ही गोंड कोयावंशियांे ने खेती प्रक्रिया प्रारम्भ किया साथ ही अपने फसलो को और उन्नत बनाने के लिए एवं अपने परिवार को खुशहाली तथा विकास के लिए करते हैं। इसके साथ ही दिनेश कुमार गोंड ने कहा कि हम अपनी संस्कृति के रक्षा कर ही अपने आप को भविष्य में विकास कर सकते हैं।
इस अवसर पर जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के सचिव-तिरूमाल बृजभान मरावी ने कहा कि आदिवासी समाज का पहचान उनकी आदिम संस्कृति से है। क्यों की आदिवासी समाज की आज खत्म होती संस्कृति का संरक्षण के लिए सरकार को भी इनके संरक्षण हेतु आगे आना होगा तभी देश के आदिवासी समाज की विलुप्त होती अनोखी संस्कृति को सहेजा जा सकता है।
भोजली जात्रा के समापन पर भुमक सुक्खू मरावी ने कहा कि वर्षा ऋतु के पोरा (सावन) माह में साफ-सुथरा मिट्टी की पिण्डी तैयार कर उसमें सात प्रकार के अनाजों के बीज को बोने के पश्चात अंकुरित होने के लिए एक पाख तक स्वच्छ जल देकर पौधे तैयार करते है, तैयार पौधे को भोजली पर्व के दिन फसल एवं उपज में वृद्धि के साथ ही परिवार के सुख समृद्धी के साथ ही जल-जंगल-जमीन की रक्षा हेतु भोजली दाईना (देवी) की सुमिरन कर महोत्सव/जात्रा में सम्मिलित होते है जो हमारे एकता का प्रतिक है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में दीना नाथ गोंड, विनोद कुमार, राकेश कुमार, अनील कुमार, सुनिल कुमार, अरविन्द कुमार, गब्बर गोंड, रानी देवी, पूजा, प्रियंका गोंड, महेन्द्र प्रताप गोडसे, दिनेश प्रधान, मनोज कुमार गोंड, बनवारी गोंड,संदीप कुमार, रामदयाल, भैया लाल, हीरालाल, लौटन, डाक्टर गोंड, अशोक भुमक, कमल गोंड, मनोज कुमार गोंड के साथ ही चन्दौली, गाजीपुर, मीरजापुर आदि जनपदों से सैकड़ों आदिवासी समुदाय उपस्थित रहे।