12/08/2026
79 साल की आज़ादी… लेकिन सवाल आज भी वही!
जब देश गुलाम था, तब भी लोग शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार को महत्वपूर्ण मानते थे।
जब देश आज़ाद हुआ, तब भी लोगों की प्राथमिकता शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार ही थी।
और आज, जब देश अपनी आज़ादी की 79वीं वर्षगांठ मना रहा है, तब भी आम जनता की सबसे बड़ी जरूरतें शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार ही हैं।
79 वर्षों में साल बदलते रहे, हालात बदलते रहे, चेहरे बदलते रहे…लेकिन क्या बदला?
गरीब और जरूरतमंद आज भी अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा, बेहतर चिकित्सा और सम्मानजनक रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पता है क्यों?
क्योंकि कहीं न कहीं जिम्मेदार हम खुद भी हैं।
हमने अपने वास्तविक मुद्दों को पीछे छोड़कर अपने-अपने स्वार्थों को आगे रखा।शिक्षा पर सवाल करने के बजाय धर्म पर सवाल करने लगे,रोजगार मांगने के बजाय नफरत के मुद्दों में उलझ गए,चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाने के बजाय एक-दूसरे से सवाल करने लगे।
राजनीति करने वालों ने भी वही मुद्दे उठाए, जिन पर जनता सबसे ज्यादा बंट सकती थी।
और परिणाम हमारे सामने है—
आजादी के 79 साल बाद भी हम शिक्षा मांग रहे हैं,बेहतर चिकित्सा मांग रहे हैं,रोजगार मांग रहे हैं।
सवाल यह नहीं कि कौन सा धर्म बड़ा है?
सवाल यह है कि हमारे बच्चों का भविष्य कितना बेहतर है?
सवाल यह नहीं कि
कौन किससे नफरत करता है?
सवाल यह है कि युवाओं के हाथ में रोजगार कब होगा?
सवाल यह नहीं कि हम किस पहचान पर गर्व करें?
सवाल यह है कि गरीब और जरूरतमंद को सम्मान के साथ शिक्षा और चिकित्सा कब मिलेगी?
देश धर्म से नहीं,शिक्षा से मजबूत होगा।देश नफरत से नहीं,रोजगार से मजबूत होगा।देश विवादों से नहीं,बेहतर चिकित्सा और बेहतर व्यवस्था से मजबूत होगा।
इस स्वतंत्रता दिवस पर एक सवाल खुद से जरूर पूछिए—
हमने आज़ादी तो हासिल कर ली…
लेकिन क्या हमने अपने असली मुद्दों से भी आज़ादी हासिल की?
सोचिए… क्योंकि बदलाव की शुरुआत जनता से ही होती है। 🇮🇳
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Abhishek Jain Bittu
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