22/08/2026
खड़गे जी के साथ हुआ तथाकथित ‘शुद्धिकरण’ सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि उस गहरी जातिवादी मानसिकता का भयावह चेहरा है, जो आज भी हमारे समाज में जिंदा है।
सोचिए—जब देश के एक राष्ट्रीय पार्टी अध्यक्ष को ही जाति के नाम पर ‘अशुद्ध’ मानने की मानसिकता खुलेआम सामने आ सकती है, तो आम दलित, पिछड़े और वंचित नागरिकों के साथ क्या होता होगा?
और अगर सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग इस पर चुप रहना चुनते हैं, तो यह चुप्पी भी बहुत कुछ कहती है।
यह सिर्फ खड़गे जी का अपमान नहीं है। यह संविधान, समानता और हर उस भारतीय का अपमान है जिसे अपनी जाति के कारण कभी ‘कमतर’ समझा गया।
अब सवाल साफ है—हम संविधान वाला भारत चाहते हैं या ऐसा भारत, जहाँ जाति के नाम पर ‘शुद्धिकरण’ को सामान्य बना दिया जाए?
Indian National Congress