13/05/2026
अगर मेहनत से ज्यादा कीमत leaked papers की होने लगे तो समझ लीजिए समस्या सिर्फ शिक्षा व्यवस्था में नहीं, पूरे System में है।
NEET-UG 2026 रद्द होने के बाद करीब 23 लाख विद्यार्थी अचानक अनिश्चितता के बीच खड़े कर दिए गए। महीनों की मेहनत, कोचिंग, मॉक टेस्ट, मानसिक दबाव और परिवार की उम्मीदों का बोझ उठाने के बाद अब सवाल सिर्फ परीक्षा का नहीं, पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का है।
आरोप है कि एक "guess paper" में मौजूद कई सवाल असली रसायन विज्ञान खंड से मिलते थे। लेकिन सवाल सिर्फ paper leak का नहीं है। सवाल ये है कि अगर इतना बड़ा सामग्री परीक्षा से पहले खुलेआम घूम रही थी तो निगरानी एजेंसियाँ, परीक्षा संस्थाएँ और पूरा तंत्र आखिर कर क्या रहा था?
सबसे बड़ी बात – इसका असर सभी विद्यार्थियों पर बराबर नहीं पड़ता। जिनके पास पैसा, संसाधन और दोबारा तैयारी का मौका है, वे किसी तरह संभल जाते हैं। लेकिन गरीब, ग्रामीण और पहली पीढ़ी के कई विद्यार्थियों के लिए ऐसा एक हादसा कई बार पूरे सपने के टूट जाने जैसा होता है और शायद सबसे खतरनाक स्थिति तब पैदा होती है जब युवाओं को धीरे-धीरे ये महसूस होने लगे कि: मेहनत तो जरूरी है लेकिन अगर सिस्टम कमजोर हो जाए, तो कई बार मेहनत भी हार जाती है।