01/06/2026
दो कौड़ी के शिक्षक नहीं हैं, दो कौड़ी की वो मीडिया है—
जो देश की मूल समस्याओं पर चुप है,
जो पेट्रोल-डीजल की लूट पर चुप है,
गिरते रुपये पर चुप है,
मणिपुर पर चुप है,
पेपर लीक और CBSE के फियास्को पर चुप है,
कमजोर होती अर्थव्यवस्था पर चुप है,
किसान-मजदूर की समस्या पर चुप है,
बेरोजगारी और महंगाई पर चुप है।
पेपर लीक और घपलों पर देश का छात्र आवाज़ उठाए तो 'पाकिस्तानी' और शिक्षक आवाज़ उठाए तो 'दो कौड़ी का'
मतलब इस देश के लगभग मीडिया ने अपने आपको उस स्थान पर खड़ा कर दिया, जहां दलाली और तलवे चाट खबरें और टीवी शो चलाना ही पत्रकारिता रह गई है।
देश के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली उस एंकर मेडम को कान खोलकर सुन लेना चाहिए कि....शिक्षक साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण दोनों उसकी गोद में खेलते हैं। उसका धन ज्ञान होता है, वो आप जैसे पत्रकारों की तरह टॉमी नहीं होता जो सरकारों के तलवे चाटे।
देश सब देख रहा है। समय सबके साथ न्याय करेगा।