राजेश कुमावत

राजेश कुमावत सर्व धर्म समा वृत्तिः सर्व जाति समा मतिः ।
सर्व सेवा परानीति , रीतिः संघस्य पद्धति । ।

दाल-बाटी केवल स्वाद नहीं, वीरों का 'सर्वाइवल फूड' था। युद्ध के दौरान, राजपूत सैनिक आटे के गोले बनाकर उन्हें तपती रेत में...
26/04/2026

दाल-बाटी केवल स्वाद नहीं, वीरों का 'सर्वाइवल फूड' था।
युद्ध के दौरान, राजपूत सैनिक आटे के गोले बनाकर उन्हें तपती रेत में दबा देते थे। दिन भर की तपती धूप और रेत की गर्मी में, वे अपने आप पक जाते थे। ☀️🔥

शाम को जंग से लौटकर, सैनिक इन गोलों को फोड़कर घी और दाल के साथ खाते थे। यह सरल भोजन उनके संघर्ष, सादगी और लचीलेपन का प्रतीक है। 💪🍚

आज भी, जब हम दाल-बाटी का आनंद लेते हैं, तो हमें उस वीरतापूर्ण इतिहास को याद करना चाहिए। क्या आपने कभी दाल-बाटी के इस पहलू के बारे में सोचा था?
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#दालबाटी #राजपूती_संस्कृति #भारतीय_भोजन

आपका प्रथम बार ध्वज प्रणाम कब हुआ था
22/04/2026

आपका प्रथम बार ध्वज प्रणाम कब हुआ था

भगवान विष्णु के छठवें अवतार, शस्त्र और शास्त्र के ज्ञान, शक्ति और न्याय के प्रतीक भगवान परशुराम जन्मोत्सव की आपको और आपक...
19/04/2026

भगवान विष्णु के छठवें अवतार, शस्त्र और शास्त्र के ज्ञान, शक्ति और न्याय के प्रतीक भगवान परशुराम जन्मोत्सव की आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं🙏🙏🚩🚩 #जयपरशुरामजी

 #अक्षय_तृतीया के शुभ अवसर पर भगवान विष्णु के छठवें तथा भगवान शिव के संयुक्त अवतार, युद्ध कला में निपुण, अवतार कालीन सर्...
19/04/2026

#अक्षय_तृतीया के शुभ अवसर पर भगवान विष्णु के छठवें तथा भगवान शिव के संयुक्त अवतार, युद्ध कला में निपुण, अवतार कालीन सर्वश्रेष्ठ गुरु, हैहय वंश के क्षत्रियों से 21 बार पृथ्वी को विहीन करने वाले भगवान परशुराम जी के प्रगटोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं...

भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास की शुक्ल तृतीया को हुआ था। इस दिन अक्षय तृतीया मनाई जाती है। अक्षय तृतीया के दिन जन्म लेने के कारण परशुराम की शक्ति की अक्षय नहीं होती हैं। कलयुग में आज भी भगवान परशुराम जीवित है।

परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार थे। महर्षि वेदव्यास, अश्वत्थामा, राजा बलि, श्री हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, ऋषि मार्कंडेय सहित उन आठ अमर किरदारों में होती है जिन्हें कलयुग तक अमर माना जाता है।

परशुराम भगवान विष्णु और भगवान शंकर के संयुक्त अवतार माने जाते है ।परशुराम के बचपन का नाम राम भी माना जाता है। इनके पिता बचपन में इन्हें राम कहकर बुलाते थे। इनके चार भाई भी थे।

परशुराम ने अपने पिता की मौत और माता के अपमान का बदला लेने के लिए इस धरती से हैहय वंश के क्षत्रियों का 21 बार सर्वनाश किया था। परशुराम ब्राह्राण के कुल में पैदा हुए लेकिन कर्म क्षत्रिय था। उनके क्रोथ से मनुष्य, देवता और राक्षस सभी घबराते थे। परशुराम त्रेता युग और द्वापरयुग दोनों में थे।

परशुराम अपने माता-पिता की आज्ञाकारी संतान थे एक बार पिता के आदेश का पालन करने के लिए उन्होंने अपनी माता का सिर काट दिया था। बाद में पिता से विनती कर माता को दोबारा जीवित होने का वरदान भी प्राप्त किया।

एक बार परशुराम भगवान शिव के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत पहुंचे, लेकिन भगवान गणेश ने उन्हें मिलने नही दिया। इस बात से क्रोधित होकर उन्होंने अपने फरसे से भगवान गणेश का एक दांत तोड़ दिया था ।

परशुराम ने भगवान शिव की कठिन तपस्या की, जिसके कारण भगवान शंकर ने उन्हें युद्ध कला में निपुण होने का वरदान दिया साथ खास शस्त्र फरसा दिया था । इसी कारण से इनका नाम परशुराम पड़ा ।

हिंदुत्व का अर्थ केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समरस पद्धति है।यह हमें सिखाता है कि हम अपने मार्ग पर दृढ़ रहे...
17/04/2026

हिंदुत्व का अर्थ केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समरस पद्धति है।

यह हमें सिखाता है कि हम अपने मार्ग पर दृढ़ रहें, लेकिन साथ ही दूसरों के साथ मिलकर चलें और सभी का सम्मान करें।

परम् पूज्य मोहन भागवत जी के अनुसार, संघ की प्रार्थना इन्हीं मूल्यों को प्रतिबिंबित करती है और शाखा में आने वाले स्वयंसेवकों में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति के संस्कार विकसित किए जाते हैं।

 #राष्ट्रीय_स्वयंसेवक_संघ के  #बाल_स्वयंसेवक नटखट और परिवार के सबसे प्रिय छोटे सुपुत्र  #चित्रांश के  #जन्मदिवस के शुभ अ...
06/04/2026

#राष्ट्रीय_स्वयंसेवक_संघ के #बाल_स्वयंसेवक नटखट और परिवार के सबसे प्रिय छोटे सुपुत्र #चित्रांश के #जन्मदिवस के शुभ अवसर पर आप सभी को एक संदेश देना चाहता हूं बच्चों में धार्मिक संस्कार बचपन से ही देना चाहिए। धार्मिक पाठशाला #संघ_की_शाखा में अध्यापन से बच्चों में धर्म के प्रति जाग्रति आती है

क्योंकि आज के बच्चे की कल_के_भविष्य है। समाज को संस्कारित करना है तो बच्चों को संस्कारित करना आवश्यक है। बच्चों के शारीरिक_और_मानसिक विकास के लिए पसीना बहाने वाला खेल आवश्यक है तभी बच्चोें का मानसिक विकास होगा तभी वे समाज के आदर्श नागरिक बन सकेंगे पाश्चात्य संस्कृति दूर रखकर हमारी संस्कृति_की_रूबरू कराने का प्रयास करें इसी के लिए आप अपने बच्चों को नजदीकी RSS_की_शाखा में भेजें इन्हीं अपेक्षाओं के साथ

उज्जवल_भविष्य के लिए आप सभी भाइयों और बहनों का शुभ्आशीष_और_स्नेह बना रहे ऐसी मेरी आप सभी से अपेक्षा है....

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे…जोधपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जोधपुर महानगर द्वारा आयोजित "शाखा संगम-2026" के विराट एवं ...
06/04/2026

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे…

जोधपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जोधपुर महानगर द्वारा आयोजित "शाखा संगम-2026" के विराट एवं भव्य आयोजन में सहभागी बन अत्यंत गौरवान्वित हूँ।

जोधपुर के पोलो मैदान में 200 शाखाओं के स्वयंसेवक पधारे, जिनके बीच मैं हमेशा की भांति माँ भारती के प्रति निष्ठा और राष्ट्र प्रेम के अद्भुत-अदम्य वातावरण से ऊर्जावान हुआ।

गर्व है, मैं भी स्वयंसेवक हूँ!

क्या आप "श्वास" लिए बिना जी सकते हैं। जी नहीं। ऐसा होना असंभव है। इसी प्रकार से दूसरों के साथ मधुर संबंध भी "सच्चे विश्व...
06/04/2026

क्या आप "श्वास" लिए बिना जी सकते हैं। जी नहीं। ऐसा होना असंभव है। इसी प्रकार से दूसरों के साथ मधुर संबंध भी "सच्चे विश्वास" के बिना संभव नहीं हैं।
अर्थात यदि आप ऐसा चाहते हैं, कि "दूसरे लोगों के साथ आपके संबंध लंबे समय तक मधुर बने रहें, तो इसके लिए आप दोनों को परस्पर "सच्चे विश्वास" की आवश्यकता है।"
आपको दूसरों पर सच्चा विश्वास होना चाहिए, और दूसरों को आप पर सच्चा विश्वास होना चाहिए। केवल दिखावे का नहीं। तभी यह संभव है,
कि आप दोनों में मधुर संबंध लंबे समय तक बने रहें।" "इसलिए आप अपना व्यवहार शुद्ध बनाएं।"

*पवन पुत्र केसरी नंदन हनुमान हनुमान जी के "अवतरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और बहुत-बहुत बधाई..* 🙏🏻🥰🚩
02/04/2026

*पवन पुत्र केसरी नंदन हनुमान हनुमान जी के "अवतरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और बहुत-बहुत बधाई..* 🙏🏻🥰🚩

"संगठन ही राष्ट्र की प्रमुख शक्ति होती है। संसार में कोई भी समस्या हल करनी हो तो वह शक्ति के आधार पर ही हो सकती है। शक्त...
01/04/2026

"संगठन ही राष्ट्र की प्रमुख शक्ति होती है। संसार में कोई भी समस्या हल करनी हो तो वह शक्ति के आधार पर ही हो सकती है। शक्तिहीन राष्ट्र की कोई भी आकांक्षा कभी भी सफल नहीं होती। परन्तु सामर्थ्यशाली राष्ट्र कोई भी काम, जब चाहे तब अपनी इच्छानुसार कर सकता है।"

-डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार


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