Bhartiya janta party chhindwara - m.p.

Bhartiya janta party chhindwara - m.p. BHARTIYA JANTA PARTY Yuva morcha media CELL CHHINDWARA (M.P.) DISTRICT UNIT

Bhartiya Janta party (BJP)
भारतीय जनता पार्टी भारत का एक राष्ट्रवादी राजनैतिक दल है। इस दल की स्थापना ६ अप्रैल १९८० में हुई थी। इस दल के वर्तमान अध्यक्ष राजनाथ सिंह है। भारतीय जनता पार्टी संघ परिवार नामक वटवृक्ष की प्रमुख शाखा के रूप में उभर कर सामने आई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को इसके विरोधियों द्वारा साम्प्रदायिक प्रतिक्रियावादी कहा जाता रहा है। उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से बहुत से आरोप ल

गाये गये किन्तु संघ परिवार इन सबकी चिन्ता किए बिना निरंतर प्रगति के पथ पर बढ़ता ही चला गया। संगठन व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र को राष्ट्रीय एकता, अखण्डता और राष्ट्रीय चेतना का मूलमंत्र मानते हुए सफलता की दूरवर्ती ऊंचाईयों तक पहुंचा है। आज यह संगठन अपने उत्कर्ष पर पहुंच चुका है। अब तो इसके पुराने समय से चले आ रहे विरोधी आलोचक भी यह मानने को विवश हो गए हैं कि भाजपा का कोई विकल्प नहीं है और इसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। सन् १९५१ में डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रवाद के समर्थन में भारतीय जन संघ की स्थापना की। भारतीय जन संघ ने भारतीय राष्ट्रीय काग्रेंस की तुष्टीकरण नीति का तथा राष्ट्रीय एकता और अखंडता और सांस्कृतिक पहचान के मामलों में किसी भी तरह के समझौते का विरोध किया। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की १९५३ में एक कारागार में असामयिक मृत्यु के बाद भारतीय जन संघ के आन्दोलन को आगे बढाने और संघ को जीवित रखने का भार पं. दीनदयाल उपाध्याय के युवा कंधों पर आ गया। अगले १५ वर्षों तक वे संघ के महासचिव बने रहे और संघ का निर्माण किया। उन्होनें संघ के कुछ समर्पित और सक्षम कार्यकर्ताओं के समूह को संघ की पूरी विचारधारा से अवगत कराया और उन्हें सक्षम राजनेताओं के रूप मे तैयार किया। अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी उनमें से थे। १९६८ में पं. दीनदयाल उपाध्याय की हत्या कर दी गयी, उनकी मृत्यु के बाद अटल बिहारी वाजपेयी जन संघ के अध्यक्ष बने।

जन संघ ने १९५२ के पहले आम चुनावों में केवल तीन लोक सभा सीटें जीतीं। अगले दस सालों मे संघ की शक्ति बढी और वह १९६२ तक भारत की सबसे प्रभावी विपक्षी पार्टियों में से एक पार्टी के रूप मे उभर कर आगे आई जिसने काग्रेंस को उत्तर भारत के कई राज्यों में गम्भीर टक्कर दी। संघ ने मुख्य रुप से समान नागरिक संहिता, गोहत्या, जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे की समाप्ति और हिन्दी भाषा के प्रचार जैसे विषयों को अपना मुद्दा बनाया।

१९६७ तक जन संघ ने अपनी विचारधारा से सहमत कुछ राजनैतिक दलों से गठजोड़ कर के उत्तर प्रदेश, दिल्ली तथा कुछ और प्रदेशों में सरकारें बनायी। इन्दिरा गान्धी की सरकार द्वारा लागू किये गये आपातकाल के समय उसके विरोध में संघ सबसे आगे रहा और संघ के हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं को जेलों में बन्द कर दिया गया। इसके बाद संघ, कई और राजनैतिक दलों के साथ, १९७७ में काग्रेंस के विपक्ष के रूप में जनता पार्टी से मिल गया। जनता पार्टी ने १९७७ का आम चुनाव भारी बहुमत से जीता और मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने। अटल बिहारी वाजपेयी को इस सरकार में विदेश मंत्री बनाया गया। जनता पार्टी ज्यादा दिनों तक टिक ना सकी, मोरारजी देसाई ने १९७९ में प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और जनता पार्टी विघटित कर दी गयी।

सन् १९८० में जनता पार्टी के उन कार्यकर्ताओं और नेताओं ने, जो भारतीय जन संघ से जुड़े थे, भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) कि स्थापना की। अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के पहले अध्यक्ष बनाये गये। भा.ज.पा. ने काग्रेंस और इन्दिरा गान्धी की सिख अराजक समुदायों को बढावा देने और बांटने की राजनीति की घोर आलोचना की। सिख नेता दारा सिंह के अनुसार वाजपेयी 'सिख और हिन्दुओं' के बीच सामंजस्य लाये।

भा.ज.पा. ने आपरेशन ब्लु स्टार का कभी समर्थन नहीं किया तथा १९८४ के सिख विरोधी दंगो का दृढ्तापूर्वक विरोध किया। १९८४ के आमचुनाव में भा.ज.पा. सिर्फ दो सीटें ही जीत पायी। आने वाले समय मे पार्टी ने अपनी शक्ति के प्रसार के लिये काम किया जिससे देश के युवा पार्टी की तरफ आकृष्ट हों। इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी पार्टी के अध्यक्ष और संसद में विपक्ष के नेता बने रहे।

भा.ज.पा. रामजन्म भूमि मुद्दे, जिसको विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नेत्रत्व प्राप्त था और जो अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जगह राम मन्दिर का निर्माण के लिये उथाया गया था, की राजनैतिक आवाज बना। लाल कृष्ण आडवाणी पूरे देश में यात्राओं के माध्यम से इस मुद्दे को उठाने और हिन्दू समर्थन पाने मे सफल रहे।

६ दिसम्बर, १९९२ को विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हजारों कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया। अगले कुछ सप्ताहों मे पूरे देश मे हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच दंगे छिड़ गये, जिसमे १००० के ऊपर संख्या में लोग मारे गये। सरकार ने विश्व हिन्दू परिषद पर प्रतिबन्ध लगा दिया और लाल कृष्ण आडवाणी सहित भा.ज.पा. के कई नेताओं को कुछ समय के लिये जेल मे डाल दिय गया। पूरे देश मे इन दंगो कि भीषण भर्त्सना हुई लेकिन भा.ज.पा. को हिन्दुओं का समर्थन और देशव्यापी प्रमुखता प्राप्त हुई।

१९९३ के दिल्ली चुनाव और १९९५ के गुजरात और महाराष्ट्र के चुनावों में भा.ज.पा. विजयी हुई और कर्नाटक के १९९४ के चुनाव मे बहुत अच्छे प्रदर्शन से पार्टी की शक्ति मे बढोतरी हुई। १९९५ नवम्बर में मुम्बई में भा.ज.पा. के महाअधिवेशन में लाल कृष्ण आडवाणी ने घोषणा की कि अगले चुनाव में यदि भा.ज.पा. विजयी होती है तो अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री होंगे। १९९६ के चुनाव में भा.ज.पा. ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं। अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार प्रधानमंत्री बने लेकिन १३ दिनों के बाद उन्हे इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि सरकार के पास बहुमत नहीं था।

१९९८ के लोक सभा के चुनाव में भा.ज.पा. ने कई क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। इस गठबन्धन को राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन का नाम दिया गया। गठबन्धन को बहुमत मिला और अटल बिहारी वाजपेयी एक बार फिर प्रधानमंत्री बने लेकिन १९९९ मे एक पार्टी के समर्थन वापस ले लेने के कारण सरकार गिर गयी।

१९९९ के चुनाव में राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन को पूरा बहुमत मिला और अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और लाल कृष्ण आडवाणी उपप्रधानमंत्री । गठबन्धन को कुल ३०३ सीटें मिली और भा.ज.पा. को १८३। इस बार अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यकाल के ५ वर्ष पूरे किये। प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल ने मिलकर, यशवंत सिन्हा के नेतृत्व में पी. वी. नरसिम्हा राव की सरकार द्वारा लागू की गयी कई नीतियों का काम आगे बढाने, कई बड़ी सरकारी कम्पनियों के निजीकरण, विश्व व्यापार संगठन के दिशा निर्देशों के तहत व्यापार के उदारीकरण, विदेशी निवेश को बढावा देने का काम किया।

२००४ के आम चुनाव में भा.ज.पा. और राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन को अनपेक्षित हार मिली।

मई २००८ मे भा.ज.पा. ने कर्नाटक विधान सभा चुनाव जीता। ऐसा पहली बार हुआ जब भा.ज.पा. ने किसी दक्षिण भारतीय राज्य का चुनाव जीता। २००९ के आम चुनाव में भी भा.ज.पा. को हार का सामना करना पड़ा और पार्टी ने कुल ११६ सीटें ही जीतीं।
अध्यक्ष

राजनाथ सिंह- २०१३-[अब तक]

पूर्व अध्यक्ष

नितिन गडकरी - २०१०-२०१२
राजनाथ सिंह - 2006-2009
लालकृष्ण आडवाणी - 2004-2005
वेंकैया नायडू - 2002-2004
जन कृष्णमूर्ति - 2001-2002
बंगारू लक्ष्मण - 2000-2001
कुशाभाऊ ठाकरे - 1998-2000
लालकृष्ण आडवाणी - 1993-1998
मुरली मनोहर जोशी - 1991-1993
लालकृष्ण आडवाणी - 1986 - 1991
अटल बिहारी वाजपेयी - 1980-1986

16/05/2026

कर्मफल अधिपति, न्याय एवं अनुशासन के अधिष्ठाता, लोकमंगल के संरक्षक श्री शनिदेव के पावन जन्मोत्सव पर मंगलकामनाएँ। ॐ शं शनैश्चराय नमः 🙏

16/05/2026

समय अपने नायक स्वयं चुनता है पार्थ! वही जानता है युग की आवश्यकता को, वही तय करता है भविष्य के लिए मार्ग, और वही निर्धारित करता है योद्धाओं के लक्ष्य... सभ्यताओं का भाग्य समय की उंगलियों पर नाचता है... तुम कुछ करना चाहते हो तो शुभ होने का विश्वास बनाए रखना। शेष तो सब...

Sarvesh Kumar Tiwari

07/05/2026
07/05/2026

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को नई गति मिली है।

प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा गुजरात में दो सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों को मंजूरी मिलना देश के तकनीकी भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

₹3,900 करोड़ के निवेश से ये परियोजनाएँ भारत को हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स में आत्मनिर्भर बनाएंगी, 2,200 से अधिक रोजगार सृजित करेंगी और देश को सेमीकंडक्टर के वैश्विक केंद्र की दिशा में आगे बढ़ाएँगी।

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2258165®=3&lang=2

02/04/2026

संविधान बनाम शरीयत क्यों नहीं?

संविधान का अनुच्छेद 44 यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड लाने के लिए निर्देशित करता है।

मनुस्मृति ऐसे भी जलाने के अलावा किसी काम नहीं आती। अगर राहुल हिंदू हैं तो पता होगा कि हिंदू घरों में रामायण, गीता, भागवत, पुराण की पूजा होती है। मनुस्मृति की नहीं।

शरीयत वर्तमान में लागू है और भारत में मुसलमानों के सिविल पारिवारिक मामलों में यही कानून है।

लेकिन राहुल गांधी सिर्फ मनुस्मृति जैसी विस्मृत किताब की बार बार चर्चा करते हैं ताकि समाज में फूट पड़े।

पर मैंने शरीयत के खिलाफ बोलते राहुल गांधी को कभी नहीं सुना। जबकि शरीयत स्पष्ट रूप से मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का निषेध करता है। शरीयत में तमाम समस्याएँ हैं।

संविधान के अनुच्छेद 44 में सरकार को निर्देश है कि यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड लाए।

राहुल गांधी यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड और शरीयत पर न बोलकर, एक विस्मृत पुस्तक के आधार पर भारतीय सभ्यता को बार बार नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं।

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Chhindwara
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