Niranjan Singh

Niranjan Singh Public Speaker and motivational speaker

25/07/2022

वह पथ क्या, पथिक कुशलता क्या,
जिस पथ पर बिखरे शूल न हों।
नाविक की धैर्य परीक्षा क्या,
जब धाराएं प्रतिकूल न हों।।
:- अज्ञात

जीवन में आप जब विपत्तियों से जूझ रहे हों तो ऐसे में कुछ इंसानों के भेष में छिपे सर्प अपने विष के समान वचनों को भी मुखारविंद से निकालने से बाज नहीं आते। ऐसे समय में आपका आत्मसंयम और कभी न हार मानने वाला व्यक्तित्व बहुत मायने रखता है। उन विषाक्त बाणों को आप तब ही असफ़ल कर पाएंगे जब आपने आत्म-विश्वास का आवरण ओढ़ रखा हो। हर समय आपका ध्यान उन लोगों के ऊपर न होकर स्वयं के उत्थान पर ही होना चाहिए। उन लोगों को अपने शब्दों से नहीं अपनी सफ़लता से आश्चर्यचकित कीजिए। ऐसे चमत्कारों से उन्हें अचंभित कीजिए जिनकी उन्होंने स्वप्न में भी कल्पना न की हो। स्वयं पर और उस परमशक्ति पर विश्वास कीजिए जो आपको कभी असफ़ल नहीं होने देगी। निश्चित ही विजय आपका आलिंगन करेगी।
जय श्री कृष्ण।





20/03/2022

पानी बरस बीज लगाया,फिर एक दिन ऐसा भी आया,
सूख गया जो कुछ बोया था,कितने दिन वो न सोया था।
फ़िर भी खेत न बंजर छोड़े, ऐसा साहस देखा है क्या,
नहीं हुआ तो हो जाएगा, रोने से कुछ होता है क्या।।
:- संदीप द्विवेदी

कितनी बार हमने अपने सपनों को अपने ही पैरों के तले रौंद दिया होगा जब हमने लोगों के डर से वह कार्य नहीं किया जिसको करने से हमारा जीवन बेहतर स्थिति में हो सकता था। कोई ऐसा अवसर हमारे सामने होगा जो हमें जीवन में ऊंचाई की तरफ़ अग्रसर कर सकता था लेकिन हार के डर से उसे पानी का प्रयत्न भी नहीं किया। हार तो आप जब भी जाएंगे जब आप कुछ बेहतर न करने का प्रयास करेंगे। हार से हारा आदमी तो जीत सकता है किन्तु मन से और लोगों से हारा कभी नहीं जीत सकता।इसीलिए ज़ोखिम उठाने का हौसला दिखाओ क्योंकि कभी-2 जीवन में ज़ोखिम न लेना भी सबसे बड़ा ज़ोखिम है। अपनी नाव के स्वयं खेवनहार बनो।

#मैं








26/01/2022

#बाबूजी

एक पिता का स्थान सदैव ईश्वर से भी सर्वोच्च और सर्वोत्तम इसलिए माना जाता है कि उसके बच्चे यदि इस संसार में सबसे ज्यादा सीखते हैं तो केवल अपने पिता से। लेकिन जब वह व्यक्ति, जिसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जाती,और वह सदैव के लिए आपको छोड़कर चला जाए तो फिर उनकी सीख ही इस संसार में आपका मार्गदर्शन करती हैं। आज जब मैंने आलोक श्रीवास्तव जी की इस कविता को अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड किया तो पिताजी के साथ बिताया हर पल मानो मेरी आँखों के सामने मात्र एक कल्पना नहीं बल्कि एक जीवित चलचित्र की तरह प्रस्तुत हो रहा था। मेरी आँखों से अश्रु रूपी मोती गालों से मानो किसी नदी की धारा की तरह बह रहे थे।
लेकिन साथ ही साथ दिल में एक सान्त्वना थी कि उनके जाने के बाद मैंने परिवार को संजोए रखा। उनकी दी गई हर एक जिम्मेदारी का उनका एक आदेश मानकर अंगीकार किया। आपकी सीख सदैव मेरे लिए अंधकार रूपी समस्याओं को सहज निपटारा करने वाली दिव्य ज्योति बनी रहेगी। आप ज्यादा पढ़े-लिखे न होकर भी इतना सिखा गए कि किताबों के ढेर में भी आपका सामाजिक औऱ व्यावहारिक ज्ञान सदैव अनुसरणीय है।

I miss you.

#बाबूजी







14/01/2022

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