03/06/2026
चारों धामों में रील बनाने व मोबाइल मंदिर परिसर में ले जाने पर प्रतिबंध की बात कही जाती है, तो फिर मंदिर परिसरों में नाच-गाने और रील बनाने के वायरल वीडियो आखिर क्या दर्शाते हैं?
देवभूमि उत्तराखंड अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां के मंदिर केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं से अपेक्षा की जाती है कि वे मंदिरों और धार्मिक स्थलों की गरिमा तथा नियमों का पालन करें।
हाल के दिनों में चारधाम क्षेत्रों से कुछ ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें मंदिर परिसरों के आसपास नाच-गाना, रील बनाना या सोशल मीडिया के लिए प्रदर्शन करते हुए लोग दिखाई दे रहे हैं। ऐसे दृश्य स्वाभाविक रूप से उन लोगों की भावनाओं को आहत करते हैं जो इन धामों को श्रद्धा और साधना का स्थान मानते हैं।
उत्तराखंड की संस्कृति प्रकृति, लोकदेवताओं और धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है। यहां की मान्यताएं संयम, श्रद्धा और मर्यादा का संदेश देती हैं। इसलिए सभी यात्रियों और पर्यटकों से विनम्र अनुरोध है कि वे देवस्थलों पर मनोरंजन या सोशल मीडिया प्रसिद्धि से अधिक आस्था और सम्मान को प्राथमिकता दें।
हम सभी का दायित्व है कि देवभूमि की पवित्रता, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक गरिमा को बनाए रखें। उत्तराखंड आने वाले सभी देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों का स्वागत है, लेकिन यह भी अपेक्षा है कि वे यहां की परंपराओं, नियमों और स्थानीय भावनाओं का सम्मान करें।
देवभूमि में आइए, लेकिन आस्था, मर्यादा और सम्मान के साथ। यही उत्तराखंड की संस्कृति और सनातन परंपरा की पहचान है।