10/12/2024
“समेट लो इन नाजुक पलों को, ना जाने ये लम्हे हो ना हो,
हो भी ये लम्हे क्या मालूम, शामिल उन पलों में हम हो ना हो!”
-गुलज़ार
सच में, गुलज़ार साहब से मिलना किसी सपने के सच होने जैसा है! उनसे मुलाकात के लम्हे बेहद यादगार रहे। गुलजार साहब की शख़्सियत और शब्दों का जादू हर दिल को छू लेता है। ईश्वर उनकी कलम और जीवन को हमेशा ऊर्जा और प्रेरणा से भरपूर रखे। मुलाकात के दौरान गुलज़ार साहब द्वारा अपनी आत्मकथा भेंट कर मुझे कृतज्ञ कर दिया। गुलजार साहब से मुलाकात के यह यादगार पल मेरे जीवन में हमेशा प्रेरणा बनकर रहेंगे।