Vikas Manch

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18/12/2022
Honored Sandeep Magotra for becoming District Secretary of BJP Bishnah 17 December (Rampal) New faces have been promoted...
17/12/2022

Honored Sandeep Magotra for becoming District Secretary of BJP
Bishnah 17 December (Rampal)
New faces have been promoted by the BJP to various posts in the Jammu and Kashmir UT and a new face from each region has been brought forward with a new responsibility keeping in view the upcoming assembly elections, senior BJP leader from Bishnah town, Sandeep Singh. Magotra has been given the responsibility of the post of District Secretary of Jammu District Border, due to which he was honored by giving memento and BJP flag in the presence of senior BJP leaders in the BJP office. It was done in the presence of District President Sunil Dutt Shastri, apart from him, district in-charge Rajendra Singh Chib, co-in-charge Harbhajan Singh Pammi, DDC Garu Ram Bhagat, former MLA Ashwini Sharma were specially present. Sandeep Magotra has been given to him, he will follow it with duty and loyalty and create a new direction and new energy to the party workers. Let us tell you that Sandeep Magotra is associated with politics since childhood. He has inherited politics from his father. His father Mr. Virendra Mohan Sharma has been working for many years on the post of District Rural President of BJP party and following his footprints, in 1989 for the first time in the Lok Sabha elections Poster by Sandeep Magotra Worked for the party in the role of boy, after that in the 1996 elections, he was appointed by the party on the method of polling booth agent, after that in the last elections, he was given the responsibility as Mandal Secretary and BJP party in BDC and DDC elections. He gave his 100 percent contribution on the responsibility given by him and in both the elections BJP won with huge majority. In order to connect people with the party, he has been given a new responsibility by the BJP party as the District Secretary and he has taken charge of that.

16/06/2022
जो लोग पूछ रहे हैं "4 साल बाद अग्निवीर क्या करेंगे"❓उनके सभी सवालों के जवाब
16/06/2022

जो लोग पूछ रहे हैं "4 साल बाद अग्निवीर क्या करेंगे"❓

उनके सभी सवालों के जवाब

केन्द्रीय बलों की भर्ती में अग्निवीरों को मिलेगी प्राथमिकता: आदरणीय गृहमंत्री श्री Amit Shah  जी
16/06/2022

केन्द्रीय बलों की भर्ती में अग्निवीरों को मिलेगी प्राथमिकता: आदरणीय गृहमंत्री श्री Amit Shah जी

16/06/2022

*🛑 अनोखा है, इंसानी जिस्म 🛑*
जानिए जिस्म के बारे में

*जबरदस्त फेफड़े*
हमारे फेफड़े हर दिन 20 लाख लीटर हवा को फिल्टर करते हैं. हमें इस बात की भनक भी नहीं लगती. फेफड़ों को अगर खींचा जाए तो यह टेनिस कोर्ट के एक हिस्से को ढंक देंगे.

*ऐसी और कोई फैक्ट्री नहीं*
हमारा शरीर हर सेकंड 2.5 करोड़ नई कोशिकाएं बनाता है. साथ ही, हर दिन 200 अरब से ज्यादा रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है. हर वक्त शरीर में 2500 अरब रक्त कोशिकाएं मौजूद होती हैं. एक बूंद खून में 25 करोड़ कोशिकाएं होती हैं.

*लाखों किलोमीटर की यात्रा*
इंसान का खून हर दिन शरीर में 1,92,000 किलोमीटर का सफर करता है. हमारे शरीर में औसतन 5.6 लीटर खून होता है जो हर 20 सेकेंड में एक बार पूरे शरीर में चक्कर काट लेता है.

*धड़कन, धड़कन*
एक स्वस्थ इंसान का हृदय हर दिन 1,00,000 बार धड़कता है. साल भर में यह 3 करोड़ से ज्यादा बार धड़क चुका होता है. दिल का पम्पिंग प्रेशर इतना तेज होता है कि वह खून को 30 फुट ऊपर उछाल सकता है.

*सारे कैमरे और दूरबीनें फेल*
इंसान की आंख एक करोड़ रंगों में बारीक से बारीक अंतर पहचान सकती है. फिलहाल दुनिया में ऐसी कोई मशीन नहीं है जो इसका मुकाबला कर सके.

*नाक में एंयर कंडीशनर*
हमारी नाक में प्राकृतिक एयर कंडीशनर होता है. यह गर्म हवा को ठंडा और ठंडी हवा को गर्म कर फेफड़ों तक पहुंचाता है.

*400 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार*
तंत्रिका तंत्र 400 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से शरीर के बाकी हिस्सों तक जरूरी निर्देश पहुंचाता है. इंसानी मस्तिष्क में 100 अरब से ज्यादा तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं.

*जबरदस्त मिश्रण*
शरीर में 70 फीसदी पानी होता है. इसके अलावा बड़ी मात्रा में कार्बन, जिंक, कोबाल्ट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फेट, निकिल और सिलिकॉन होता है.

*बेजोड़ झींक*
झींकते समय बाहर निकले वाली हवा की रफ्तार 166 से 300 किलोमीटर प्रतिघंटा हो सकती है. आंखें खोलकर झींक मारना नामुमकिन है.

*बैक्टीरिया का गोदाम*
इंसान के वजन का 10 फीसदी हिस्सा, शरीर में मौजूद बैक्टीरिया की वजह से होता है. एक वर्ग इंच त्वचा में 3.2 करोड़ बैक्टीरिया होते हैं.

*ईएनटी की विचित्र दुनिया*
आंखें बचपन में ही पूरी तरह विकसित हो जाती हैं. बाद में उनमें कोई विकास नहीं होता. वहीं नाक और कान पूरी जिंदगी विकसित होते रहते हैं. कान लाखों आवाजों में अंतर पहचान सकते हैं. कान 1,000 से 50,000 हर्ट्ज के बीच की ध्वनि तरंगे सुनते हैं.

*दांत संभाल के*
इंसान के दांत चट्टान की तरह मजबूत होते हैं. लेकिन शरीर के दूसरे हिस्से अपनी मरम्मत खुद कर लेते हैं, वहीं दांत बीमार होने पर खुद को दुरुस्त नहीं कर पाते.

*मुंह में नमी*
इंसान के मुंह में हर दिन 1.7 लीटर लार बनती है. लार खाने को पचाने के साथ ही जीभ में मौजूद 10,000 से ज्यादा स्वाद ग्रंथियों को नम बनाए रखती है.

*झपकती पलकें*
वैज्ञानिकों को लगता है कि पलकें आंखों से पसीना बाहर निकालने और उनमें नमी बनाए रखने के लिए झपकती है. महिलाएं पुरुषों की तुलना में दोगुनी बार पलके झपकती हैं.

*नाखून भी कमाल के*
अंगूठे का नाखून सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ता है. वहीं मध्यमा या मिडिल फिंगर का नाखून सबसे तेजी से बढ़ता है.

*तेज रफ्तार दाढ़ी*
पुरुषों में दाढ़ी के बाल सबसे तेजी से बढ़ते हैं. अगर कोई शख्स पूरी जिंदगी शेविंग न करे तो दाढ़ी 30 फुट लंबी हो सकती है.

*खाने का अंबार*
एक इंसान आम तौर पर जिंदगी के पांच साल खाना खाने में गुजार देता है. हम ताउम्र अपने वजन से 7,000 गुना ज्यादा भोजन खा चुके होते हैं.

*बाल गिरने से परेशान*
एक स्वस्थ इंसान के सिर से हर दिन 80 बाल झड़ते हैं.

*सपनों की दुनिया*
इंसान दुनिया में आने से पहले ही यानी मां के गर्भ में ही सपने देखना शुरू कर देता है. बच्चे का विकास वसंत में तेजी से होता है.

*नींद का महत्व*
नींद के दौरान इंसान की ऊर्जा जलती है. दिमाग अहम सूचनाओं को स्टोर करता है. शरीर को आराम मिलता है और रिपेयरिंग का काम भी होता है. नींद के ही दौरान शारीरिक विकास के लिए जिम्मेदार हार्मोन्स निकलते हैं.

15/06/2022

आज है तर्म त्याडा !!

आज का दिन डोगरा लोग अपने पितरों के नाम पर समर्पित करते हैं।

पहले स्नान करने के बाद घर के मुखिया द्वारा अपने पितरों के नाम अलग-अलग घड़ा पानी से भर कर उस के साथ एक पंखी, खरबूजा, आम और चीनी वगैरह मनसी जाती है। माना जाता है ऐसा करने पर हमारे पित्तर प्यासे नहीं रहते।

बहुत सारे लोग इस दिन अपने पितरों के नाम मीठे पानी की छबीले और लंगर आदि भी लगाते हैं।

आज के बाद ही डोगरा इलाकों में दंगल आदि की प्रतियोगिताएं भी शुरू हो जाती हैं जिसे लोग काफी पसंद करते हैं।

आस्था से भरे इस डोगरा फेस्टिवल पर हम आपको यही कहना चाहते हैं कि

नाओ..... ते मनसो घड़े !!

15/06/2022

भारत के प्रथम महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह जामवाल 2 जम्मू & कश्मीर स्टेट फोर्स

𝑰𝒎𝒎𝒐𝒓𝒕𝒂𝒍 𝑫𝒐𝒈𝒓𝒂 𝑺𝒂𝒗𝒊𝒐𝒖𝒓 𝑶𝒇 𝑲𝒂𝒔𝒉𝒎𝒊𝒓

ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह जी का जन्म 14 जून 1899 को कश्मीर के सांबा जिले के गांव बगूना ( अब राजेन्द्रपुरा ) में हुआ था ।
चूंकि डोगरा राजपूत परिवार में जन्म लिया था , दादा जनरल बाज सिंह भी महाराजा गुलाब सिंह की सेना में थे , और
पिता सूबेदार लाखा सिंह भी रणभूमि में शहीद हुए थे ,
तो सेना की तरफ झुकाव होना लाजमी था ।
पिता के असामयिक निधन के कारण 6 माह के राजेन्द्र सिंह का पालन पोषण चाचा लेफ्टिनेंट कर्नल गोविंद सिंह जी की देख रख में हुआ ।

1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के पश्चात सेना में जाने का निर्णय लिया और 1921 में ही इन्होंने जम्मू एंड कश्मीर स्टेट फोर्स को ज्वाइन कर लिया ।

अच्छे रिकॉर्ड को देखते हुए 1942 में इन्हें बिर्गेडियर के तौर पर प्रोमोशन मिला ,
1947 में इनके अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल को देखते हुए इन्हें जम्मू कश्मीर स्टेट फोर्स का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया गया ।

इनके जम्मू & कश्मीर फोर्स चीफ बनने के तुरंत बाद ही पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में घुसपैठ शुरू कर दी

21 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तानी कबीलाई फौजों ने कश्मीर को घेर कर ,
6000 कबीलाईयों की इस फौज ने कश्मीर को अपने कब्जे में लेने की कोशिश शुरू कर दी ,
साथ ही जिहाद के नाम पर कश्मीर के स्थानीय मुस्लिमों को भी कबालाईयों ने अपने साथ ले लिया
उन्नत हथियारों से लैस इस फौज ने
कश्मीरी सिख कश्मीरी पंडितों के साथ भीषण बर्बरता करते हुए बारामुला की तरफ से श्री नगर पर कब्जा करने की नियत से श्री नगर की ओर बढ़ना शुरू किया ।
इस घुसपैठ को रोकने के लिए 22 अक्टूबर 1946 को जम्मू कश्मीर स्टेट फोर्स को पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेडने का ऑर्डर मिला ।
महाराजा हरि सिंह जी का आदेश था
जल्द से जल्द जवानों को इक्कठा कर उरी के लिए प्रस्थान करें और
आखिरी गोली आखिरी सांस तक देश की रक्षा करनी है ,

ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह जी ने भी महाराजा हरि सिंह को आश्वाशन दिया कि घुसपैठिए को कश्मीर पर कब्जा करने के लिए उनके शव के ऊपर से जाना होगा ।

ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह जी को मात्र 120 जवान मिले ,
वाहनों की कमी थी तो पूरी टुकड़ी निजी वाहनों से ही उरी के लिए रवाना हो गई,
23 अक्टूबर 1947 को
उरी पहुंचते ही टुकड़ी को दो हिस्सों में बांट दिया गया एक टुकड़ी ने उरी नाला पर मोर्चा संभाला दूसरी गढ़ी पोस्ट पर शत्रु को खदेड़ने के लिए चल दी।
शत्रु दल के पास उन्नत हथियार थे और संख्या बल में भारतीय जवानों से कई गुना ज्यादा थे
शत्रु दल ऊंचाई पर घात लगाए बैठा था इसलिए पहले हमले में भारतीय टुकड़ी को काफी नुकसान झेलना पड़ा ,

बिर्गेडियर राजेन्द्र सिंह जी ने हेड क्वार्टर संपर्क किया और अतिरिक्त सैन्य बल की मांग की ,
अगले दिन कैप्टन ज्वाला सिंह अपने 80 जवानों के साथ उरी पहुंचे ।

संख्या बल और गोला बारूद की कमी होने के बावजूद भी ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह जामवाल के नेतृत्व में टुकड़ी ने कबीलाई घुसपैठियों को मुंहतोड़ जबाव देते हुए दो दिन तक पोस्ट को डिफेंड किया ।
ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह ने एक अन्य टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए ऐसे साहस का परिचय दिया कि उरी रामपुर सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा कहा जाता है कि इस पूरे हमले में बिर्गेडियर राजेन्द्र सिंह जी की सूझ बूझ और पुल को उड़ाने की उनकी रणनीति मील का पत्थर साबित हुई , जिसके कारण पाकिस्तान को भयंकर नुकसान तो हुआ ही था साथ ही साथ भारतीय दल को तैयारी करने के लिए और समय मिला ।
26 अक्टूबर को कबीलाईयों ने पुनः अपनी पूरी शक्ति के साथ एक और हमला किया ,
भारतीय टुकड़ी ने रोड ब्लॉक कर रखा था शत्रु की तरफ से भारी गोलीबारी हो रही थी इसी बीच बिर्गेडियर राजेन्द्र सिंह जी के ड्राइवर को गोली लगी और वह मौके पर ही वीरगति को प्राप्त हो गया और ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह जी को पैर में गोली लगी , अब गाड़ी की स्टीयरिंग की ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह जी के हाथ में थी,
भरी एमएमजी फायरिंग के बीच ब्रिगेडियर अपनी रिवॉल्वर से ही कई दुश्मनों को मार गिराया ,
ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह जी ने अकेले ही इस पोजिशन पर रुकने का फैसला करते हुए ,
अपनी टुकड़ी को डिफेंडिंग पोजिशन पर जाने का ऑर्डर दिया ताकि घुसपैठिए श्री नगर तक ना पहुंचने पाएं ,
काफी देर तक चली गोलीबारी में ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह वीरगति को प्राप्त हुए और कश्मीर को पाकिस्तान के कब्जे में होने से बचा गए और
27 अक्टूबर 1947 को कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग बना

और इसी प्रकार ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह ने अपने क्षत्रिय धर्म विजय या वीरगति को चरितार्थ किया और मातृभूमि के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर किया ।

ये ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह जी की अदम्य वीरता का ही परिणाम है कि
जम्मू कश्मीर आज भारत का अभिन्न अंग है ।

इस अदम्य वीरता के लिए इन्हें 26 जनवरी 1950 को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया ।

शत शत नमन 🙏

✍️
Sachin Pratap Singh Jadoun

 #मोदी_सरकार के 8 साल #सेवा_सुशासन एवं  #गरीब_कल्याण सम्मेलन ज़िला जम्मू।
14/06/2022

#मोदी_सरकार के 8 साल
#सेवा_सुशासन एवं #गरीब_कल्याण सम्मेलन ज़िला जम्मू।

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