many historic places , forts , temples , highest bridge in asia , 3 tehsils and two sub tehsils ,famous Sri Naina Devi Ji Temple , Sah Talai , Luxmi Narayan temple, Bbaba Naher Singh Ji temple etc. बिलासपुर जिला , जिसकी नींव राजा दीपचंद्र ने 1653 ई. में रखी थी। उन्होंने महाभारत कार महर्षि व्यास की स्मृति में इस नगर को बसाया था और इसका मूल नाम व्यासपुर ही रखा था जो बिगड़कर बिलासपुर बन गया। वेदव्यास
ने इस स्थान के पास एक गुफ़ा में तपस्या की थी। सतलज के वामतट पर एक पहाड़ी के नीचे व्यासगुफ़ा अब तक स्थित है। मार्कंडेय का आश्रम भी यहाँ से चार मील दूर है। कहा जाता है कि दोनों ॠषि एक सुरंग द्वारा परस्पर मिलने आते-जाते थे।.....
साठ के दशक में भाखड़ा बांध बनने पर पूरा का पूरा बिलासपुर नगर गोबिंदसागर में जलमग्न हो गया था। झील का जल स्तर घटने पर प्राचीन मंदिरों के अवशेष आज भी सामने उभर आते हैं। भाखड़ा बांध बनने से पूरा देश बिजली से जगमगा उठा तथा पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की भूमि सोना उगलने लगी, लेकिन विस्थापितों की पीड़ा को दूर करने की ओर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।
गु्रखों के अतिक्रमण से पहले 1894 तक बिलासपुर स्वतंत्र पंजाब हिल स्टेट की राजधानी था। ब्रिटिश सेना ने गुरखों को अगले ही वर्ष वहाँ से खदेड़ दिया था। पुराने महल और एक प्रसिद्ध मंदिर समेत लगभग पूरा नगर गोविंदसागर में जलमग्न हो गया था। 1950 के दशक के कुछ बाद नए नगर का निर्माण किया गया था।
बिलासपुर में पहाड़ी की चोटी पर नैना देवी मंदिर है जिसे राजा वीरचंद (697-780 ई.) ने बनवाया था।
बिलासपुर, 'कहलूर' भी कहलाता है।