20/07/2025
#शहीद_दशरथ_महतो
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थाना बिहपुर के लत्तीपुर रेलवे स्टेशन घटना में शहीद 21 वर्षीय आजादी के गुमनाम नौजवान नायक
बिहपुर थाना कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सत्यदेव राय थे। जबकि भागलपुर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष उपेन्द्रनाथ मुखर्जी व सचिव मेवालाल झा थे।
घटना 17 अगस्त 1942 की है। बिहपुर स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में कितना संवेदनशील रहा है आप इस घटना से अंदाज लगा सकते हैं। 9 अगस्त 1942 को मुम्बई के अगस्त क्रांति मैदान से 'करो-मरो का नारा" देते है और बिहपुर कर गुजरता है...
बिहपुर थाना युद्ध समिति के संचालक राजेंद्र झा 'स्वतंत्र' ने एक बैठक बुलाकर तय किया कि थाना, पोस्ट ऑफिस, रजिस्ट्री ऑफिस, डाक बांग्ला, और स्टेशन बगैरह पर कब्जा किया जाए। दूसरे ही दिन इलाके भरके बेशुमार लोग जमा हो गए। जिनके सहयोग से कुछ चुने हुए आंदोलनकारी आगे बढ़े और थाना, रेलवे स्टेशन आदि सभी सरकारी इमारत तथा ऑफिस में आग लगा दी। स्टेशन रक्षा के लिए जो हथियारबंद सिपाही पहरा दे रहे थे। वो इतनी बड़ी भीड़ और इतना ज्यादा जोश देखा उन्हें काठ मार गया। स्टेशन मास्टर, पोस्ट मास्टर सबों ने आग की फैलती हुई लपेट देखकर अपने-अपने घर की रह ली। कुछ देर में सरकार का सारा सामान जल कर राख हो गया। जो चहल-पहल की जगह थी वो शमशान बन गई। काफी लोग लूटपाट में लग गए। सरकारी गोदाम और लड़ाई का सामान लूटना शुरू कर दिया। गल्ला, कपड़े, तेल, फूलेल व अन्य सामान लाखों का माल लूट गया।
नारायणपुर स्टेशन को तोड़-फोड़ कर फूंक डाला गया। पोस्ट ऑफिस के कागजात जला दिए गए। नारायणपुर से नवगछिया तक और बिहपुर से महादेवपुर तक के तार काट फेंके गए और बहुत बड़ी तादाद में रेल की पटरिया उखाड़ फेंकी गई। महादेवपुर घाट से जो रेलगाड़ी आ रही थी, उसको कांग्रेस सरकार की ओर से जप्त कर लिया गया। मुसाफिरों को उतर जाने का आदेश दिया गया। गार्ड और ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके बाद पेट्रोल छिड़क कर समूची गाड़ी में आग लगा दी गई। गाड़ी धुआं और लपटे फेंकते हुए काफी देर तक जलता रहा और अंततः जलकर राख हो गई। उसकी लोहे की बेंच ही ब्रिटिश साम्राज्य की किस्मत पर रोने के लिए बची रही। आंदोलनकारी ने थाने भर में आवाकारी की दुकानों को बंद कर दिया और पोस्ट ऑफिस के कागजात जला दिए गए।
लत्तिपुर स्टेशन पर भी हमला हुआ और उसका बहुत सा सामान नष्ट कर दिया गया। (लत्तिपुर के पश्चिम एक गांव गौरीपुर है जहां अंग्रेज जमीनदार निल्हे साहब की कोठी थी। यहां के किसानो से जबरन नील की खेती करवाई जाती थी। किसानो पर कराई से टैक्स वसूली किया जाता था। किसानो और अंग्रेज जमीनदार के साथ टकराव जारी रहता था। इसी गांव से थाना कमिटी अध्यक्ष सत्यदेव राय थे।) और वहां की रेलवे लाइन छिन्न-भिन्न कर दी गई।
इन्हीं दिनों यह एक घटना हुई । एक गोरा सार्जेंट लगभग एक दर्जन हथियार बंद सिपाहियों को लेकर रेलवे लाइन के किनारे-किनारे भागलपुर जा रहा था। लत्तीपुर के लोगों ने इसे देखा और बंदूक छीन लेने की तुरंत से योजना बनाई। लगभग 40 लोगों की तादाद में सतरूप महतो व इनके 21 वर्षीय बेटा दशस्थ
महतो के नेतृत्व में ये सब गोरा सार्जेंट व पुलिस का पीछा करने लगा। पहले तो इन्हें पीछा करते देख सार्जेंट बंदूक दिखाकर भागना चाहा पर जब ये लोग भागने के बजाय पीछा ही कर रहा है तो गोरा सार्जेंट तेज कदम से भागलपुर की ओर बढ़ने लगा। इधर ये लोग समझा कि अंग्रेज पुलिस टोली के पास गोली नहीं है इसलिए बंदूक दिखा रहा है। तब सतरूप महतो ने कहा इस पर पत्थर मारो और देखो ये लोग क्या करता है। बस देखना क्या था रेलवे किनारे पत्थरों का भरमार ही था। सतरूप महतो अपने बेटा दशरथ महतो से कहा आगे बढ़ते जाओ और पत्थर चलाते जाओ। पुलिस भी जबाव में पत्थर की गोली बंदूक से चलाने लगा।
इन क्रांतिकारियों का हौसला बढ़ता चला गया इन्हें लगा अब इनके पास गोली नही है बस इसे पत्थर मार-मार कर परेशान कर दिया जाए और फिर इसकी सारी बंदूके छीन ली जाए।
पहले इन्होंने कुछ देले फेक जिसके जवाब में सिपाहियों ने भी बंदूक में पत्थर की गोलियां भर-भर कर छोड़ना शुरू किया। लेकिन जब दोनो दल नजदीक हुए तो सतरूप महतो ने अपने लड़के दशरथ माता से कहा की देखो अब न गोरे सार्जेंट को गोली है और न ही सिपाहियों को। देखो न हमारे ढेलों के जवाब में भी यह ढेले और पत्थर ही फेंक रहे हैं। यही मौका है बढ़ो बेटा गोरे सार्जेंट को एक ढीला खींच कर मारो फिर बंदूक को छीन लो। 21 वर्षीय गबरू जवान दशरथ महतो लपक करआगे बढ़े और गोरे सार्जेंट पर जोर से पत्थर दे मारा लेकिन अबकी बार ऑरिजनल गोली चली और तब तक चलती रही जब तक लोग गिर न पड़े और भाग न गए।
गिर पड़ने वालों में 21 वर्षीय गबरू जवान दशरथ महतो जो तत्काल शहीद हो गए।
आज भी लत्तिपुर चौक पर पहुँचते ही एक रोमांच पैदा करता है कितना साहसी था हमारा पुरखा। लेकिन हाय रे नेता विधायक-सांसद कौन है जो सुधि लेगा कि कोई सतरूप महतो थे जो अपने बेटे को आजादी की आंदोलन में शहीद कर दिया।
किया है! हम आपको नमण करते है! आपने हम सबका सिर ऊँचा
शहीद, अमर रहे ! 💐
जय हिंद 🇮🇳