03/12/2025
आज हम सब भारी दिल से एक ऐसे दर्द की बात कर रहे हैं
जिसने न जाने कितने घरों की रोशनी छीन ली,
कितनी माँओं की गोद सूनी कर दी,
और कितने परिवारों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी—
आतंकी हमले।
भारत ने आतंकवाद का ज़हर कई बार झेला है—
26/11 जैसे ज़ख्म आज भी सीने में ताज़ा हैं,
पुलवामा जैसे हमले हमें हर पल याद दिलाते हैं
मुंबई, दिल्ली, कश्मीर, पंजाब…
और अब हाल ही में दिल्ली में हुआ हमला,
जिसने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया।
राजधानी की सड़कों पर गूँजी चीखें,
धुएँ और डर से भरी हवा,
और मासूमों पर बरपा गया कहर—
इन सबने भारत की आत्मा को गहरे सदमे में डाल दिया।
दिल्ली का यह हमला हमें याद दिलाता है
कि आतंकी किसी भी शहर, किसी भी परिवार,
किसी भी इंसान को निशाना बना सकते हैं…
लेकिन भारत की हिम्मत, एकता और हौसले को
कभी तोड़ नहीं सकते।
जब भी भारत की पवित्र धरती पर कोई आतंकी वारदात होती है,
दिल सिर्फ़ एक नागरिक का नहीं,
बल्कि एक इंसान का रोता है।
हर शहीद की शहादत,
हर बच्चे की चीख,
और हर परिवार के आँसू
हमारे दिल को चीर कर रख देते हैं।
हम उन सभी भाइयों–बहनों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं
जिन्होंने ऐसे कायराना हमलों में अपनी अनमोल जान गंवा दी।
दुख सिर्फ़ इस बात का नहीं कि वे चले गए—
दुख यह भी है कि उनके घर का चिराग बुझ गया,
उनकी हँसी खामोशी में बदल गई,
और समाज को एक बार फिर
भय और असुरक्षा के साये से गुज़रना पड़ा।
लेकिन एक सच्चाई हमेशा याद रखिए—
**आतंकी किसी देश से बड़े नहीं होते।
ना वो भारत से बड़े हैं, ना पाकिस्तान से।
आतंक की औकात इतनी नहीं कि मानवता को हरा सके।**
भारत और पाकिस्तान—दोनों देश मजबूत हैं,
दोनों की सेनाएँ बहादुर हैं,
और दोनों देशों के लोगों का असली सपना एक ही है—
सुख, शांति और चैन।
इसलिए—
नफरत नहीं, मोहब्बत को जगह दीजिए।
युद्ध नहीं, शांति को चुनिए।
खून नहीं, इंसानियत को बचाइए।
दोनो देशों के लोग शांति चाहते हैं,
सुरक्षा चाहते हैं,
और एक ऐसा भविष्य चाहते हैं
जहाँ बच्चे डर के साये में नहीं,
उम्मीद की रोशनी में जी सकें।
आइए मिलकर प्रण लें—
**हम आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहेंगे।
हम शांति का संदेश फैलाएँगे।
और हम आने वाली पीढ़ियों के लिए
एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और खुशहाल संसार छोड़कर जाएँगे।**
क्योंकि—
**आतंक का कोई मजहब/धर्म नहीं होता,
और इंसानियत की कोई सीमा नहीं होती।**