अनामिका

  • Home
  • अनामिका

अनामिका बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय।

VIJAY KI KAVITAAYEIN 2025 1.शिव -अदभुत, अनंत,नियंत्रित करतेअसंख्य परमाणु रिएक्टर जैसे शिवलिंगों को।विश्व शांति हेतु,हलाह...
14/01/2026

VIJAY KI KAVITAAYEIN 2025

1.शिव -
अदभुत, अनंत,
नियंत्रित करते
असंख्य परमाणु रिएक्टर जैसे शिवलिंगों को।
विश्व शांति हेतु,
हलाहल पान कर,
विश्व को संरक्षित करनेवाले,
शिव की जय हो।
"मृत्योर्मुक्षीय मामृतात" .
-विजयप्रकाश शर्मा
2. गलत बात है
ब्राह्मणों को कुंठित कहना
इरश्यालू कहना ग़लत बात है. अगला ब्राह्मण - पिछला ब्राह्मण
बामन जी पहला ब्राह्मण, किया बाली का मान मर्दन, दूजे ब्राह्मण,परशुराम पकड़ ली क्षत्रियों की गर्दन,
तीजे ब्राह्मण गुरु वशिष्ठ, उदंड विश्वामित्र को बनाया शिष्ट। कभी आपस में नहीं लड़ते ब्राह्मण
नई दुनिया गढ़ते हैं ब्राह्मण.
विजयप्रकाश शर्मा
8/11/2025
3. किसे तुम ढूंढ रहे हो?
नहीं वो खेत नहीं खलिहान,
नहीं वो सांझ नहीं विहान,
नहीं वो मुर्गे वाली बांग,
जिसे तुम ढूंढ रहे हो।
नहीं वो लकड़ी के दातून,
नहीं वो लंबे से नाख़ून,
नहीं अब अमरूद वाले बाग,
नहीं वो गन्ने वाले खेत,
जिसे तुम ढूंढ रहे हो।
नहीं वो बुधमनिया बुआ,
नहीं है तेतरी नानी,
जब मुरक जाते थे पांव,
लगा देती थी हल्दी -चुनापानी,
नहीं अब बतरे में बहाओ,
जिसे तुम ढूंढ रहे हो।
नहिं सोहराय पासी की लबनी,
नहिं भगन के चिनिया बादाम ,
कछकछवा बाबा के वो बेर,
गालियां सुनते थे जब ढेर,
किसे तुम ढूंढ रहे हो?
किसे तुम ढूंढ रहे हो?
जिसे तुम ढूंढ रहे हो
नहीं वो गाँव नहीं, वो छाँव,
नहीं वो गेह नहीं वो नेह,
किसे तुम ढूंढ रहे हो?
-डॉ. विजय प्रकाश शर्मा
4.
लोग कहते हैं
यह संसार सुखमय है,
साधु कहते हैं
ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या,
धोखेबाज़ कहते हैं
झूठ ही लेना, झूठ ही देना,
मरीज कहते हैं
झूठ ही भोजन झूठ चबेना,
अन्य धर्मों के लोग कहते हैं –
सनातन है मात्र एक कल्पना,
तुम भी कुछ कहो ना.
डॉ. विजय प्रकाश शर्मा
5.
जीवन की
ई पहली झलक
चुरा ही लेती है,
बिना बताए,
सुख-चैन,
हो जाते हैं दो नैना बेचैन,
लूट जाता है सबका चैन
सिर्फ आश और प्यास ही
साथी बने रहते हैं,
जीवन के अधूरेपन की,
ई- प्रेम की .

डॉ. विजय प्रकाश शर्मा
6.
वृद्धावस्था
अल्प विराम,
जीवनयात्रा का अंतिम सोपान,
हंसे हम बालपन में,
फंसे गार्हस्थ्य जीवन में,
सुलझे वानप्रस्थी बंध,
शांति-संन्यास में सक्षम,
लौटाना है, लिया जो भी जगत से,
खोलना है गठरी यादों के,
तय करना है अंतिम सोपान,
भजगोविंदम।
डॉ. विजय प्रकाश शर्मा
7.
बुढ़ापा
बुढ़ापा न अभिशाप न वरदान
बुढ़ापा जीवन की आन -बान
यह जीवन के अमृत का
आनंद लेने का समय है।
बचपन का आनंद लिया।
जवानी में बाधाओं से लड़ा।
अब बुढ़ापे में हूँ।
अब मैं शिखर पर खड़ा हूँ।
मेरा कर्तव्य है
अपनी जीवन कहानी साझा करना।
संघर्षों से सीखना ही जीवन है।
निरंतर आगे बढ़ना ही बुढ़ापा है।
यह जीवन यात्रा का अंतिम पड़ाव है।
न नीचे, न ऊपर, बल्कि सर्वोच्च ,
अति उत्कृष्ट।
डॉ. विजय प्रकाश शर्मा

13/01/2026
21/08/2025
With Vibhooti-विभूति – I just got recognised as one of their top fans! 🎉
28/06/2025

With Vibhooti-विभूति – I just got recognised as one of their top fans! 🎉

Address

KHAIRA, Aurangabad

822131

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when अनामिका posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

  • Want your organization to be the top-listed Government Service?

Share