27/10/2025
भोरे विधानसभा के राजनीतिक माहौल में एक नई प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। फेसबुक पर, कुछ लोग बिना तथ्य और साक्ष्य के जो मन में आ रहा है वही लिख दे रहे हैं। विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन झूठे व मनगढ़ंत आरोप लगाना न केवल गलत है बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से गैरज़िम्मेदाराना है।
कुछ लोग शिक्षा मंत्री सुनील कुमार पर “हज़ारों करोड़ के घोटाले” का आरोप लगा रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि जिस 12,000 करोड़ रुपये का उल्लेख किया जा रहा है, उसका ज़िक्र CAG की रिपोर्ट में हुआ है कि इस राशि का हिसाब विभागीय स्तर पर अब तक प्रस्तुत नहीं किया गया है। यह रिपोर्ट सिर्फ सुनील कुमार के कार्यकाल की नहीं है, बल्कि यह पिछले कार्यकाल मतलब 2020 से पहले से भी संबंधित है। हिसाब लंबित होना घोटाले का प्रमाण नहीं होता, जब तक कि उसकी पुष्टि जांच एजेंसियां न करें।
इसके बावजूद भी कुछ लोग यह आरोप लगा रहें हैं की सुनील कुमार अन्य कामों में भी बहुत गड़बड़झाला किये हैं। जबकी अभी तक कुछ प्रमाणिक घोटाला सामने नहीं आया है।
हो सकता है की इनके साथ रहने वाले कुछ एजेंट ठीकेदारी या कुछ अन्य कामों में गड़बड़झाला करते हों,तो ये अलग बात हो गया।
ऐसा आरोप लगाकर कुछ लोग जानबूझकर या अनजाने में बिना साक्ष्य के आरोप गढ़ रहे हैं। अगर किसी के पास ठोस प्रमाण है तो उसे उचित मंच पर प्रस्तुत करना चाहिए। राजनीतिक विरोध करते-करते कुछ लोग तथ्यहीन आरोपों के स्तर तक पहुँच गए हैं।
सुनील कुमार के विरोध में हम भी लिखते हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता है की हम कुछ भी या तथ्यहीन आरोप उनपर लगा दें बल्कि हम जो भी लिखते हैं उसका साक्ष्य होता है हवा-हवाई किसी पर हम कोई आरोप नहीं लगातें हैं।
विपक्ष का काम सवाल उठाना है, गलतियों को उजागर करना है लेकिन तथ्यों, दस्तावेज़ों और प्रमाणों के साथ, न कि हवा-हवाई दावों के आधार पर।
इसलिए आप हवाबाज़ी कीजिये लेकिन हकीकत हवाबाजी!