Department of Forest, Madhya Pradesh

Department of Forest, Madhya Pradesh Official Handle of Forest Department , Government of Madhya Pradesh

विश्व पर्यावरण दिवस 2026   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा  ेड़_मां_के_नाम 2.0" अभियान का शुभारंभ  🗓️5 जून, 2026 📍 कुशा...
05/06/2026

विश्व पर्यावरण दिवस 2026

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा ेड़_मां_के_नाम 2.0" अभियान का शुभारंभ

🗓️5 जून, 2026 📍 कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सभागार, भोपाल

Dr Mohan Yadav CM Madhya Pradesh
Department of Environment, Madhya Pradesh
Jansampark Madhya Pradesh


माचिस और गोंद बनाने में काम आने वाले सलई की 5 हजार कलमें लगाएगा वन विभाग पर्यावरण संरक्षण की मुहिम, जुलाई तक चलेगा वन वि...
05/06/2026

माचिस और गोंद बनाने में काम आने वाले सलई की 5 हजार कलमें लगाएगा वन विभाग

पर्यावरण संरक्षण की मुहिम, जुलाई तक चलेगा वन विभाग का महाभियान

Dr Mohan Yadav CM Madhya Pradesh
Jansampark Madhya Pradesh PRO Alirajpur

. #विश्व_पर्यावरण_दिवसनगर वन : पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहलप्रदेश में 3,141 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जा...
05/06/2026

. #विश्व_पर्यावरण_दिवस

नगर वन : पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल

प्रदेश में 3,141 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जा रहीं 94 नगर वन-वाटिकाएं

ेड़_माँ_के_नाम अभियान 2.0 के अंतर्गत नगर वनों में पौधारोपण

Dr Mohan Yadav CM Madhya Pradesh
Jansampark Madhya Pradesh
Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Government of India

05/06/2026

बाघों का घर #मध्यप्रदेश

यहां हैं 9 टाइगर रिजर्व

30 जून 2026 तक ले सकते हैं टाइगर सफारी का आनंद

तो आइए कीजिए, मध्यप्रदेश के समृद्ध वनों और वन्य प्राणियों का दीदार

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Dr Mohan Yadav CM Madhya Pradesh
Jansampark Madhya Pradesh

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वन्यजीव मगरमच्छ की वीडियो वायरल कर सुर्खियां बटोरने वाले व्यक्ति को एसटीएसएफ ने दबोचाJansampar...
04/06/2026

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वन्यजीव मगरमच्छ की वीडियो वायरल कर सुर्खियां बटोरने वाले व्यक्ति को एसटीएसएफ ने दबोचा

Jansampark Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश भारत का - टाइगर स्टेट 2022 की वन्यप्राणी गणना आंकलन में मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 785 बाघ Dr Mohan Yadav CM Mad...
04/06/2026

मध्यप्रदेश भारत का - टाइगर स्टेट

2022 की वन्यप्राणी गणना आंकलन में मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 785 बाघ

Dr Mohan Yadav CM Madhya Pradesh
Jansampark Madhya Pradesh
Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Government of India

मगरमच्छ की वीडियो वायरल करने वालों को एसटीएफ ने पकड़ा Jansampark Madhya Pradesh PRO Shivpuri
04/06/2026

मगरमच्छ की वीडियो वायरल करने वालों को एसटीएफ ने पकड़ा

Jansampark Madhya Pradesh PRO Shivpuri

सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वन्यजीव मगरमच्छ की वीडियो वायरल कर सुर्खियां बटोरने वाले व्यक्ति को एसटीएसएफ ने दबोचाभोपाल : प...
03/06/2026

सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वन्यजीव मगरमच्छ की वीडियो वायरल कर सुर्खियां बटोरने वाले व्यक्ति को एसटीएसएफ ने दबोचा

भोपाल : प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्यप्रदेश के निर्देशन में मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, मध्यप्रदेश द्वारा डिजिटल प्लेटफार्म पर वन्यजीव से संबंधित अवैधानिक वीडियो बनाकर वायरल करने वाले व्यक्ति पर कड़ी कार्यवाही की गई। एसटीएसएफ ने सोशल मीडिया एप्लीकेशन, इंस्टाग्राम पर अनुसूची-1 में दर्ज वन्यजीव मगरमच्छ को पकडने, अवैध तरीके से अपने कब्जे में रखने, उसके साथ छेडछाड़ करने, उसको उठाकर पटकने, घसीटने का वीडियो (Reel) बनाकर सुर्खियां (Likes) प्राप्त करने एवं अपने Followers बढ़ाने के उद्देश्य से अपलोड कर वायरल कर दिया गया। इसके संबंध में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जांच कर, उक्त शरारती व्यक्ति के संबंध में और अधिक जानकारी प्राप्त कर उसे मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के होने की पुष्टि हुई।

एसटीएसएफ की क्षेत्रीय इकाई शिवपुरी एवं वनमंडल शिवपुरी के वन अमले द्वारा संयुक्त कार्यवाही करते हुए ग्राम गरेठा तहसील पिछोर से 2 आरोपी सुखनंदन केवट एवं गुलई सिंह को अभिरक्षा में लिया गया। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि ग्राम गरेंठा से लगी बुधना नदी में बिजली का करंट लगाकर मगरमच्छ को मारने का प्रयास करना स्वीकारा एवं यह भी बताया कि वह मछली मारने के लिए निरंतर विद्युत करंट का उपयोग करता है, जिससे मगरमच्छ भी चपेट में आ जाते है। पूछताछ में इंस्टाग्राम में अपलोड वीडियो में दिखाये जा रहे Content संबंधी अपराध को स्वीकारा। इसके उपरांत दोनों व्यक्तियों पर वन मंडल शिवपुरी द्वारा वन अपराध प्रकरण 2 जून 2026 वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं में पंजीबद्ध किया गया। विधिवत कार्यवाही के उपरांत दोनों आरोपियों को माननीय न्यायालय पिछोर जिला शिवपुरी म.प्र. के समक्ष पेश किया गया।

वन्यजीव मगरमच्छ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में आता है, जिसको मारना या छेडछाड़ करने का कृत्य गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके लिये न्यूनतम 3 वर्ष एवं अधिकतम 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है। उक्त दोनों व्यक्तियों के द्वारा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 का उल्लंघन किया गया है। उक्त कृत्य के संबंध में आम नागरिकों को भी सूचित किया जाता है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सुर्खियां बटोरने के लिये निरीह वन्यजीवों के साथ छेडछाड न की जाये और न ही उनके साथ कोई अमानवीय कृत्य किया जाये।

Jansampark Madhya Pradesh

शहरों को प्रकृति से जोड़ने का सशक्त ब्लू-प्रिंट है ‘नगर वन योजना’: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  जन-भागीदारी और नवाचारों से...
03/06/2026

शहरों को प्रकृति से जोड़ने का सशक्त ब्लू-प्रिंट है ‘नगर वन योजना’: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

जन-भागीदारी और नवाचारों से पर्यावरण संरक्षण और सतत शहरी विकास का मॉडल बन रहे नगर वन

3141 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित 94 नगर वन और वाटिकाएं बन रहीं हरित विकास की पहचान

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में हरित एवं सतत शहरी विकास को नई दिशा मिली है। वन विभाग द्वारा संचालित ‘नगर वन योजना’ जन-भागीदारी आधारित मॉडल के रूप में विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रभावी पहल बन गई है। वन विभाग ‘नगर वन योजना’ को जन-आंदोलन का स्वरूप देते हुए इसे जन-भागीदारी आधारित मॉडल के रूप में विकसित कर रहा है। शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में ‘नगर वन योजना’ एक दूरदर्शी और प्रभावशाली पहल के रूप में उभरकर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, घटते हरित आवरण और बढ़ते पर्यावरणीय दबावों के बीच यह योजना शहरों को प्राकृतिक हरियाली से जोड़ने का एक सशक्त ब्लू-प्रिंट है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा वर्ष 2020 में प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत नगर वनों और नगर वाटिकाओं का विकास कर शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण-अनुकूल वातावरण निर्मित किया जा रहा है। प्रदेश के प्रमुख शहरों और जिला मुख्यालयों के समीप विकसित किए जा रहे नगर वन, नागरिकों को प्राकृतिक वातावरण का अनुभव कराने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित भी कर रहे हैं। योजना का प्रमुख उद्देश्य शहरों में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के साथ शहरवासियों को प्रकृति के करीब लाकर पर्यावरण जागरूकता और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देना है।

यह योजना केवल पौध-रोपण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य नागरिकों, विद्यार्थियों और स्थानीय समुदायों को प्रकृति से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। ‘नगर वन योजना’ से शहरों में हरित क्षेत्रों का विस्तार, वायु प्रदूषण में कमी, शहरी तापमान के दुष्प्रभावों पर नियंत्रण तथा जैव-विविधता संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह पहल नागरिकों को मनोरंजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रकृति के साथ आत्मीय जुड़ाव के लिए हरित सार्वजनिक स्थल उपलब्ध करा रही है।

प्रदेश में 94 नगर वन और वाटिकाओं का विकास

‘नगर वन योजना’ में प्रदेश में अब तक 94 नगर वन एवं नगर वाटिकाओं के विकास को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनका कुल क्षेत्रफल लगभग 3141 हेक्टेयर है। योजना का विस्तार प्रदेश के विभिन्न वन वृत्तों और जिलों में किया गया है, जिससे शहरी क्षेत्रों में हरित अवसंरचना का व्यापक नेटवर्क विकसित हो रहा है।

योजना में विकसित किए जा रहे नगर वनों में पौध-रोपण, फेंसिंग, मिट्टी और नमी संरक्षण कार्य, जन-उपयोगी संरचनाएं, मनोरंजन सुविधाएं तथा पर्यावरण शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों को समाहित किया गया है। प्रत्येक नगर वन को स्थानीय भौगोलिक, पारिस्थितिकीय और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।

बहुआयामी सुविधाओं से सुसज्जित नगर वन

नगर वनों को नागरिकों की सुविधा, सहभागिता और पर्यावरण शिक्षा को ध्यान में रखते हुए बहुआयामी सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है। इनमें एंट्री गेट, वॉकिंग ट्रैक, आर.सी.सी. सड़कें, ब्रिज, स व्यू-पॉइंट्स, वॉच टॉवर, साइन बोर्ड, तालाब, जल संरचनाएं, गेबियन संरचनाएं, पानी की टंकियां, प्रकृति पथ, खुले में बैठने की व्यवस्था, गज़ेबो, टॉइलेट्स और पेयजल सुविधाएं शामिल हैं।

कई नगर वनों में बटरफ्लाई गार्डन, नक्षत्र वाटिका, औषधीय पौधों के क्षेत्र, मियावाकी तकनीक से पौधरोपण, प्रकृति व्याख्या केंद्र और जैव विविधता प्रदर्शन क्षेत्र भी विकसित किए गए हैं। बच्चों और युवाओं के लिए किड्स जोन, जिप लाइन, नेचर ट्रेल और अन्य मनोरंजक गतिविधियों की व्यवस्था की गई है, जिससे ये स्थल पर्यावरण शिक्षा और इको-टूरिज्म के महत्वपूर्ण केंद्र बन रहे हैं।

प्रदेश में विकसित हो रहे नगर वन बन रहे आकर्षण का केंद्र

भोपाल के जैतपुर और लहारपुर नगर वन, उज्जैन का नीलगंगा नगर वन, इंदौर के देवगुराड़िया और आई.आई.टी. क्षेत्र के नगर वन, जबलपुर का शंकरगढ़ हिल्स नगर वन, देवास का कैलाशनगर-बागली और दीवतपुर नगर वन, नरसिंहपुर का नर्मदा खेल पार्क नगर वन, मंडला का मंडलेश्वर नगर वन तथा उमरिया, नीमच, श्योपुर, सागर, खंडवा, खरगोन, आलीराजपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा और अन्य जिलों में विकसित हो रहे नगर वन इस योजना की सफलता की मिसाल बन रहे हैं।

इन नगर वनों में स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण के साथ जल संरक्षण, भूमि उपचार, हरित पर्यटन और सामुदायिक सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। नगर वन अब स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं।

जन-भागीदारी बनी योजना की सबसे बड़ी ताकत

‘नगर वन योजना’ की सफलता में जन-सहभागिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वन विभाग द्वारा समय-समय पर वृक्षारोपण अभियान, पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम, प्रकृति भ्रमण, छात्र गतिविधियां और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ‘हरित सेवा का श्रम अभियान’ के माध्यम से जन-प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को पौध-रोपण और संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा गया है।

प्रदेश में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2.0 के तहत भी नगर वनों में व्यापक पौध-रोपण किया गया। इस अभियान से पर्यावरण संरक्षण के साथ प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का संदेश दिया गया। बड़ी संख्या में जन-प्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं, युवाओं और महिलाओं ने इसमें सहभागिता की।

‘हरित योग’ से प्रकृति और स्वास्थ्य का संगम

नगर वन अब केवल हरित क्षेत्र नहीं रह गए हैं, बल्कि स्वास्थ्य और जीवन शैली सुधार के केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रदेश के अनेक नगर वनों में ‘हरित योग’ कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। प्राकृतिक वातावरण में आयोजित योग एवं ध्यान गतिविधियों ने स्वास्थ्य, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता को और अधिक सशक्त बनाया है।

हरित और सतत् शहरी विकास का मॉडल

‘नगर वन योजना’ शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, जल संरक्षण, जनस्वास्थ्य और नागरिक सहभागिता का एक सशक्त मॉडल बनकर उभरी है। यह योजना न केवल शहरों में हरित आवरण बढ़ा रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति के संरक्षण का मजबूत आधार भी तैयार कर रही है।

प्रदेश सरकार और वन विभाग के सतत प्रयासों से ‘नगर वन योजना’ आज शहरी विकास और पर्यावरणीय संतुलन का सफल उदाहरण बन चुकी है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना के निरंतर विस्तार की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे प्रदेश हरित, पर्यावरण-अनुकूल और सतत शहरी विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान और मजबूत कर रहा है।

Dr Mohan Yadav CM Madhya Pradesh
Jansampark Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश में पर्यटन का नया अध्याय  #पीएमश्री_हेली_पर्यटन_सेवा के माध्यम से वन्यजीव पर्यटन का तेज, सुरक्षित और यादगार य...
03/06/2026

मध्यप्रदेश में पर्यटन का नया अध्याय

#पीएमश्री_हेली_पर्यटन_सेवा के माध्यम से वन्यजीव पर्यटन का तेज, सुरक्षित और यादगार यात्रा का अनूठा अनुभव

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कार्यालय अ. प्र. मु. व. सं. (कक्ष-सूचना प्रौद्योगिकी), आधार/तल खंड ‘डी’, सतपुडा भवन
Bhopal
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