19/04/2024
जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल में आज ईको क्लब के माध्यम से महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ विजेता चौबे के नेतृत्व में विद्यार्थियों को पर्यावरण हितैषी जीवन शैली अपनाने के उद्देश्य से प्राकृतिक कृषि के बारे में जानकारी दी गई ।प्राकृतिक कृषि के लिए जो जीवामृत तैयार किया जाता है उसे तैयार करने की विधि बतलाई गई ।MSC 4th Same के दो विद्यार्थी कुमारी वैष्णवी बोरवन एवं कुमारी सुनीता मालवीय के द्वारा डॉ अलका पांडे के मार्गदर्शन में यह प्रोजेक्ट कार्य किया जा रहा है , उनके द्वारा बीएससी स्नातक प्रथम वर्ष के विद्यार्थी जिन्होंने ऑर्गेनिक फार्मिंग वोकेशनल सब्जेक्ट के रूप में लिया है उन्हें भी यह प्रशिक्षण दिया गया । जीवामृत को तैयार करने के लिए प्लास्टिक की टंकी ली जाती है और इसमें 20 लीटर पानी लेकर इसके पश्चात इसमें 10 किलोग्राम गाय का गोबर 10 लीटर गोमूत्र 2 किलोग्राम गुड़ और 2 किलो दाल का पाउडर मिलाया जाता है और एक मुट्ठी किसी भी खेत की मेड की मिट्टी मिलाई जाती है सभी चीजों को मिलाने के पश्चात पूरे मिश्रण को क्लाक वाइज और फिर एंटी क्लाकवाइज कुछ देर के लिए घुमाया जाता है तत्पश्चात इसे ढक्कन से बंद कर रख दिया जाता है अब तीसरे दिन से ढक्कन को प्रतिदिन खोलकर उसे कुछ देर क्लाकवाइज और कुछ देर एंटी क्लाकवाइज घुमाया जाता है । 6 -7 दिनों में यह जीवामृत तैयार हो जाता है इसे छानकर डिब्बो में इकट्ठा कर लिया जाता है और इस जीवामृत को आवश्यकता अनुसार पानी मिलाकर पौधों को या फसल को दिया जाता है जो पौधों के लिए बहुत पोषण युक्त होता है। जीवामृत बनाने के लिए टंकी ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां पर सीधे धूप न पड़े। खेतों में इस जीव अमृतके लगातार प्रयोग से उत्तम क्वालिटी की फसल प्राप्त होने के साथ-साथ उर्वरकता भी बढ़ जाती है और मिट्टी की क्वालिटी में भी सुधार हो जाता है तथा किसी भी प्रकार के केमिकल फ़र्टिलाइज़र के उपयोग की आवश्यकता नहीं पड़ती, महाराष्ट्र के किसानों के द्वारा बड़ी संख्या में इस पद्धति को अपनाया जा रहा है ।इस पद्धति के जनक श्री सुभाष पालेकर जी हैं जिन्हें इस उपलब्धि पर पद्मश्री की उपाधि भी प्राप्त हो चुकी है,। 30 अप्रैल 2010 में मेरे द्वारा जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग विषय पर जयंती हाक्सर शासकीय महाविद्यालय में एक सेमिनार आयोजित किया गया था जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में श्री सुभाष पालेकर जी उपस्थित हुए थे आपके मार्गदर्शन के पश्चात बैतूल में भी कुछ किसानों ने इस पद्धति को अपनाया है और उन्हें सफलता भी प्राप्त हुई है वर्तमान में NEP के अंतर्गत इसे फर्स्ट ईयर के ऑर्गेनिक फार्मिंग के पेपर में शामिल किया गया है।
प्रशिक्षण में स्नातक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के साथ-साथ महाविद्यालय के अन्य विद्यार्थी भी उपस्थित हुए ,बॉटनी विभाग की प्रोफेसर अर्चना सोनारे ,डॉ अर्चना मिश्रा प्रो सुनीता गडेकर एवं डॉ महेंद्र नावंगे भी उपस्थित थे। प्रशिक्षण इको क्लब प्रभारी डॉ अलका पांडे द्वारा दिया गया । दिनांक 18/04/2024