21/07/2023
*यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता..*
*बचपन सिखाया गया यह श्लोक सही है, तो इस देश मे अब देवताओं का वास नही रह गया है। यहाँ गली गली हैवान बसते है, राक्षसों का राज है औऱ पिशाचों ने अपना अड्डा बना लिया है।*
*यहां जो कम है, उसी पर दम है।*
*कहीं सिख कम है, कहीं मुसलमान कम है, कहीं कुकी कम हैं, कहीं किसी और नाम का समुदाय कम है। पर अब सचाई यह है शायद, कि हर जगह इंसान कम है।*
*और जो कम है, वह खतरे में है।*
*आपकी बदकिस्मती यह कि जो ज्यादा है, वह ज्यादा खतरे में है- न भूलिएगा।*
*मणिपुर में ईसाई कम है। जाहिर है, यह महिला ईसाई है। मणिपुर उस प्रयोग की पराकाष्ठा है जो गुजरात के अहमदाबाद से शुरू हुआ था।*
*जिसका तरीका है-कम और ज्यादा के बीच डर, नफरत और हिंसा भड़काना। और ज्यादा को ऐसी खुली छूट देना, कि वह गंदे काम करके खुद भी भयभीत रहे, औऱ सुरक्षा के लिए, नीच राक्षसों को थोकबंद वोट करे।*
*यह प्रयोग ही "हिंदुत्व की प्रयोगशाला" में ईजाद किया गया था। भारत के पश्चिमी छोर से शुरू होकर, यह प्रयोग देश के पूर्वी किनारे तक पहुँच चुका है।*
*कभी नाजी जर्मनी में तस्वीरो, डॉक्यूमेंटरी में दिखने वाला दृश्य, यहां मेरे भारत मेरे हिंदुस्तान में दिखेगा,*
*..कतई-कतई कल्पना नही की थी।*
*मैं आज खुलकर कहता हूँ- अगर यह हिंदुत्व है, तो मुझे हिन्दू नही होना है। मैं शर्मिंदा हूँ हिन्दू होने पर। और अगर पुनर्जन्म हो, तो ईश्वर मुझे हिन्दू न बनाये।*
*और इस जीवन मे कसम खाता हूं, इस अनजान महिला की कसम खाता हूं, कभी इस नफरत की तिजारत को अपना समर्थन न दूंगा। इससे जुड़े हर आदमी का बहिष्कार करूँगा।*
*मेरे इर्द गिर्द का जो व्यक्ति इनको अब भी समर्थन देगा, वह मेरे रिश्तों, दोस्ती, प्रेम से अलहदा कर दिया जायेगा।*
*आपके अंदर इंसानियत बची हो, तो आप भी यही कसम लें। लड़ाई अब चुनावी या राजनीतिक चयन की नही, इंसान होने या पिशाच होने के चयन के बीच है।*
*देश की जनता*