बैचेन बैतूल

बैचेन बैतूल विचारणीय हास्य-व्यंग्य और गम्भीरता

07/01/2025

क्या फिर से वो ही ......

24/10/2024
पृथ्वी तत्व, आकाश तत्व, जल तत्व में आश्चर्यजनक शक्तिपृथ्वी की आश्चर्यजनक शक्ति...(१) नंगे पांव चलकर पृथ्वी तल से सीधा स्...
14/08/2024

पृथ्वी तत्व, आकाश तत्व, जल तत्व में आश्चर्यजनक शक्ति

पृथ्वी की आश्चर्यजनक शक्ति...

(१) नंगे पांव चलकर पृथ्वी तल से सीधा स्पर्श होता है। नंगे पांवों चलने वाला पांवों को दृढ़ करता है और पृथ्वी से प्राणशक्ति खींचता है। नंगे पांवों चलने से रुधिराभिसरण बराबर होता है।
कमरे के फर्श, पत्थरों या हरी घास पर नंगे पाँव चलने से शक्ति प्राप्त होती है। जमीन पर सोने से जो सुख शान्ति मिलती है, वृक्षों तथा घर की शय्या पर वैसी दुर्लभ है। रात्रि में पृथ्वी पर सोने से निद्रा और शरीर में शान्ति होने के कारण पृथ्वी का बलदायक प्रभाव सूर्य स्नान या नंगे बदन सोने की अपेक्षा अधिक चमत्कारिक होता है।
कोई भी योगी तथा क्रिया योगी ईश्वर की ऐसी अनुभूतियों से स्वतः ही जुड़े होते है तभी कोई रोग उनके ध्यान तथा ज्ञान में कभी अड़चन नही बनता

(२) कई रोगों में पृथ्वी पर सोने से चमत्कारपूर्ण लाभ होता है। सोने के लिए ऐसी भूमि पसन्द करनी चाहिए, जहाँ घास कम उगी हुई हो। स्वाभाविक जीवन प्रारम्भ करने वालों को कुछ दिन हवादार पर्णकुटी में सोना चाहिए।
आनन्दी और फुर्तीला रहने के लिए यथासम्भव प्रकृति का अनुसरण करना चाहिए। प्रकृति में पशु कम सोते हैं; किन्तु गहरी निद्रा लेते हैं। हमें भी यथा शक्य आराम के लिए, नवजीवन संचार के लिए विश्राम करना चाहिए, थोड़ी और आवश्यक नींद लेने से दृढ़ता, दीर्घायु एवं नवजीवन आता है। अधिक नींद से आलस्य बढ़ता है आयु और समय का नाश होता है। कृत्रिम शिथिलता अधिक निद्रा का परिणाम है।

पृथ्वी का कोई जानवर मादक द्रव्यों का सेवन नहीं करता। मनुष्य ही इन मादक पदार्थों का विष सेवन करता और प्रकृति के द्वारा सजा पाता है। पृथ्वी पर अधिक से अधिक बैठिये, सोइये, चलिये, विश्राम कीजिये। रात्रि के समय पृथ्वी की शक्ति अति प्रबल होती है इसलिए योगी रात्रि समय अधिक ध्यान में रहते थे

आकाश तत्व...
खुले आकाश के नीचे सोना श्रेयस्कर है, योंकि आकाश में अद्भुत शक्ति है। आकाश तत्व को ग्रहण करने के लिए मैदान में अधिक से अधिक समय व्यतीत करना चाहिए।अधिक योगी जन खुले आकाश के नीचे जप तप ध्यान किया करते थे.

जल तत्व...
ईश्वर प्रदत्त सर्वोत्तम पेय पदार्थ स्वच्छ, निर्मल, शीतल, (बिना स्वाद का) जल है, प्राणियों का जीवन धारण जल पर निर्भर है। वायु के पश्चात् यही प्रमुख तत्व है। जल-प्राणियों का प्राण है। सम्पूर्ण संसार ही जलमय है। जल सर्वप्रधान औषधि है। इसके सेवन से जीवन सुखमय बनता है और शरीर की अग्नि भी आरोग्यवर्द्धक होती है।
जल शरीर के लिए एक सर्वांगपूर्ण शक्ति है। यह रक्त, स्रायु, मांसपेशी तथा प्रत्येक कोष को सतेज और सशक्त करता है। शरीर की समस्त प्रणाली जैसे- भोजन, श्वास, रक्त संचालन के लिए अनिवार्य है। यह मन को शान्ति, स्फूर्ति और प्रफुल्लता प्रदान करता है।

(बैतूल) खेड़ी सांवलीगढ से ताप्ती नदी के मध्य परतवाड़ा स्टेट हाईवे पर हुई मंदिर से मूर्ति चोरी की वारदात  ,              ...
20/07/2024

(बैतूल) खेड़ी सांवलीगढ से ताप्ती नदी के मध्य परतवाड़ा स्टेट हाईवे पर हुई मंदिर से मूर्ति चोरी की वारदात , - हे हनुमान जी ! उन भक्तों को माफ मत करना और गदा से गदागद देना जो प्रतिमा चोरी पर मौन है..? https://headline24x7.com/news.php?id=नवल-वर्मा-1-500771

अदभुत है जपयोग...'ज' का अर्थ जन्म का रुक जाना और 'प' का अर्थ पाप का नष्ट हो जाना। किसी शब्द या मंत्र को बार-बार उच्चारित...
09/07/2024

अदभुत है जपयोग...
'ज' का अर्थ जन्म का रुक जाना और
'प' का अर्थ पाप का नष्ट हो जाना।
किसी शब्द या मंत्र को बार-बार उच्चारित करना या मन ही मन दोहराना #जपयोग कहलाता है।
इसे #मंत्रयोग भी कहते हैं। मंत्र का अर्थ होता है मन को एक तंत्र में बाँधना।
जब मन एक तंत्र में बंध जाता है, तो व्यक्ति मानसिक रूप से शक्तिशाली बन जाता है।
जपयोग सबसे प्राचीनतम योग है और सभी धर्म इस योग का अनुसरण करते हैं। यह एक चमत्कारिक योग है। इसका असर व्यक्ति के मन और मस्तिष्क पर पड़ता है। जपयोग हर तरह के रोग और शोक को मिटाने की क्षमता रखता है।

- जपयोग के तीन प्रकार हैं...
1. वाचिक
2. उपांशु और
3. मानस

वाचिक का अर्थ मुँह से स्पष्ट उच्चारण के साथ किया जाने वाला जप।
उपांशु का अर्थ मंद स्वर से मुँह के अंदर ही किया जाने वाला जप और
मानस अर्थात मन ही मन किए जाने वाला जप।

- कैसे मिटते हैं शोक...
जब व्यक्ति बहुत व्यग्र या चिंतित रहता है तो तरह-तरह के नकारात्मक विचारों से घिर जाता है और पहले की अपेक्षा परिस्थितियों को और संकटपूर्ण बना लेता है।
निरर्थक विचारों से बचने के लिए किसी भी मंत्र का जप करते रहने से मन में विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है। इससे शोक और संताप मिट जाता है। यह व्यक्ति को मानसिक रूप से शांत कर देता है।

- मानसिक शक्ति बढ़ाता है ...
अच्छे विचार, मंत्र और भगवान का बार-बार जप करने या ध्यान करते रहने से व्यक्ति की मानसिक शक्ति बढ़ती जाती है। मानसिक शक्ति के बल पर ही व्यक्ति सफल, स्वस्थ और शक्तिशाली महसूस कर सकता है।

- ईश्वर से जोड़ता जप...
अपने ईष्ट या किसी शक्तिशाली मंत्र का निरंतर जप करने से व्यक्ति ईश्वर के माध्यम की सकारात्मक ऊर्जा और शक्तियों से जुड़ जाता है।
जपयोग व्यक्ति के अवचेतन को जाग्रत कर उसे दिव्य दृष्टि प्रदान करता है। ऐसा व्यक्ति स्वयं को किसी भी रूप में स्थापित करने में सक्षम हो जाता है। इससे व्यक्ति टेलीपैथिक और परा मनोविज्ञान में पारंगत हो सकता है।

जपयोग के चमत्कार के संबंध में सभी धर्मों के शास्त्रों में ढेर सारे उल्ले‍ख मिलते हैं। वेदों में विभिन्न प्रकार के मंत्रों का प्रयोग किया गया है।
इनमें प्रयोग किए जाने वाले मंत्रों में अत्यंत शक्ति होती है, क्योंकि इन मंत्रों को पढ़ने से जो ध्वनि तरंग उत्पन्न होती है, उससे शरीर के स्थूल व सूक्ष्म अंग तक कंपित होते हैं।
अनेक परिक्षणों से यह सिद्ध हो गया है कि मंत्रों में प्रयोग होने वाले शब्दों में भी शक्ति होती है।
मंत्रों में प्रयोग होने वाले कुछ ऐसे शब्द हैं, जिन्हे 'अल्फा वेव्स' कहते हैं। मंत्र का यह शब्द 8 से 13 साइकल प्रति सैंकेंड में होता है और यह ध्वनि तरंग व्यक्ति की एकाग्रता में भी उत्पन्न होती है।
इन शब्दों से जो बनता है, उसे मंत्र कहते हें। मंत्रों के जप करने से व्यक्ति के भीतर जो ध्वनि तरंग वाली शक्ति उत्पन्न होती है, उसे ही जप योग या मंत्र योग कहते हैं।

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