Santosh Sahharan

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Santosh Sahharan अध्यक्ष, राजस्थान जाट महासभा, महिला।प्रदेश अध्यक्ष, श्री वीर तेजा कार्मिक संघ (म.)। सचिव, नवोदय विद्यालय एलुमनी पचपदरा, संस्थापक JNU समूह
सचिव FNNS

📍अम्बाजी, गुजरात कुछ दिनों पहले माँ अंबाजी के दिव्य दर्शन की छवि इस पावन स्थल से जुड़ी एक बेहद गौरवशाली खबर आई हैं कि शक...
14/10/2026

📍अम्बाजी, गुजरात

कुछ दिनों पहले माँ अंबाजी के दिव्य दर्शन की छवि

इस पावन स्थल से जुड़ी एक बेहद गौरवशाली खबर आई हैं कि शक्तिपीठ अंबाजी मंदिर के पारंपरिक 'मोहनथाल' प्रसाद को अब ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग मिल गया है, जिससे इसकी धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान मिली है! गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित इस विशिष्ट प्रसाद को अब तिरुपति के लड्डू और पलानी के पंचामृतम की श्रेणी में गौरवशाली स्थान मिला है। इस जीआई टैग से इसकी शुद्धता और गुणवत्ता को संरक्षण मिलने के साथ-साथ कानूनी सुरक्षा भी मिलेगी।
जय माता दी!🙏


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📍कानासर , अपना खेत वक्त के तराजू पर जब ज़िंदगी तुलती है, तो बाहरी चमक-दमक के सारे बाट हल्के पड़ने लगते हैं।तब जाकर यह भे...
04/10/2026

📍कानासर , अपना खेत
वक्त के तराजू पर जब ज़िंदगी तुलती है, तो बाहरी चमक-दमक के सारे बाट हल्के पड़ने लगते हैं।
तब जाकर यह भेद खुलता है कि—
हज़ार रंगों और उलझे डिज़ाइनों के शोर से कहीं ज़्यादा शालीनता उस सादे, एकांगी वस्त्र में है, जो आँखों को नहीं सीधे रूह को ठंडक देता है।
और बिल्कुल यही दास्ताँ इस जीवन की भी है…
चकाचौंध और दिखावे की उस कृत्रिम लक्ज़री से कहीं अधिक ऊँचा मुक़ाम गाँव की उस मिट्टी का है, जहाँ ज़िंदगी अपने सबसे सच्चे और सुंदर रूप में सांस लेती है।
गाँव का यह खुला आँगन, पेड़ों की मीठी छाँव और अपनों के साथ चाय की एक गर्म तासली —इनमें कोई आडंबर नहीं होता, फिर भी कायनात का सारा सुकून यहीं आकर ठहर जाता है।
शायद इस लंबे सफ़र का निचोड़ बस इतना सा है—
जितना हम जीवन की गहराइयों को समझते जाते हैं,
उतना ही दुनिया की इस अंधी दौड़ को छोड़कर, अपनी जड़ों और सादगी के आँचल में लौट आते हैं।



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परंपरा जब वर्तमान का हाथ थामती है,तो अतीत स्मृति नहीं रहता—जीवंत अनुभूति बन जाता है।यह क्षण उसी सांस्कृतिक चेतना का साक्...
28/09/2026

परंपरा जब वर्तमान का हाथ थामती है,
तो अतीत स्मृति नहीं रहता—
जीवंत अनुभूति बन जाता है।
यह क्षण उसी सांस्कृतिक चेतना का साक्षी है,
जहाँ लोक की सरलता, भारतीयता की गरिमा और राजस्थान की आत्मा एक साथ दिखाई देती है।

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📍RIC, जयपुर स्वास्थ्य सेवा के क्षितिज पर तकनीक का नया सवेरा—जहाँ रोबोटिक्स और AI की आधुनिकता, सेवा की मानवीय संवेदनाओं स...
08/09/2026

📍RIC, जयपुर
स्वास्थ्य सेवा के क्षितिज पर तकनीक का नया सवेरा—जहाँ रोबोटिक्स और AI की आधुनिकता, सेवा की मानवीय संवेदनाओं से हाथ मिलाती है। ‘ग्लोबल नर्सिंग समिट 2026’ के मंच से भविष्य के हेल्थकेयर की एक ऐतिहासिक झलक।


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📍राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सादगी की मिसाल से मुलाकात! 🇮🇳ग्लोबल नर्सिंग समिट 2026 के प...
08/09/2026

📍राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर
अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सादगी की मिसाल से मुलाकात! 🇮🇳
ग्लोबल नर्सिंग समिट 2026 के पावन मंच पर आज कामा हॉस्पिटल, मुंबई की जांबाज नर्सिंग ऑफिसर श्रीमती अंजलि विजय कुलथे जी से रूबरू होने का अविस्मरणीय सौभाग्य प्राप्त हुआ।
अंजलि जी वही वीरांगना हैं, जिन्होंने 26/11 के भीषण आतंकी हमले के दौरान गोलियों की गूंज और बारूद के साए में भी अपनी जान की परवाह किए बिना दर्जनों गर्भवती महिलाओं और मरीजों की जान बचाई थी। उनके इस अदम्य साहस को फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' में कंगना रनौत जी ने बड़े पर्दे पर बेहद सशक्त अंदाज में जीवंत किया है।
रील लाइफ की प्रेरणा को जब रियल लाइफ में सामने देखा, तो गर्व से सीना चौड़ा हो गया। उनकी सादगी, चेहरे पर सौम्यता और दिल में देश व मरीजों के प्रति सेवा भाव दिल को छू लेने वाला है। वर्दी और सेवा का यह संगम हमेशा नई ऊर्जा और प्रेरणा देता रहेगा।
मां भारती की इस वीर बेटी के जज्बे को कोटि-कोटि नमन! 🙏🇮🇳

जिस स्कूल ने हमें उड़ना सिखाया… आज उसी स्कूल के लिए कुछ करने का वक्त आया है! कुछ रिश्ते जिंदगी के साथ नहीं चलते…जिंदगी भ...
04/09/2026

जिस स्कूल ने हमें उड़ना सिखाया… आज उसी स्कूल के लिए कुछ करने का वक्त आया है!

कुछ रिश्ते जिंदगी के साथ नहीं चलते…
जिंदगी भर साथ रहते हैं।

ऐसा ही रिश्ता है नवोदय और नवोदयन का।
आज जवाहर नवोदय विद्यालय, पचपदरा,बाड़मेर के परिसर में हमारे 2001 बैच की ओर से एक ऐसे ही रिश्ते को निभाने की खूबसूरत शुरुआत हुई और
‘पैरेंट्स वेटिंग हॉल’ के निर्माण की नींव रखी गई।

यह सिर्फ ईंट-पत्थरों से बनने वाला एक हॉल नहीं है…
यह हमारी मातृसंस्था के प्रति कृतज्ञता, अपनापन और जिम्मेदारी की नींव है।

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस भव्य हॉल का निर्माण कार्य पूरा कर दिसंबर 2026 के एलुमनी डे पर इसे विद्यालय परिवार को समर्पित किया जाएगा। 🙏

इस दौरान विद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया गया, क्योंकि हम चाहते हैं कि आज की हमारी छोटी-सी पहल आने वाली पीढ़ियों को भी यह एहसास कराए कि—
“नवोदय से निकलने के बाद नवोदय को भूलना नहीं है,
बल्कि अपनी सफलता का थोड़ा-सा हिस्सा उस आँगन को लौटाना है,
जहाँ से हमारी कहानी शुरू हुई थी।”

इस ऐतिहासिक एवं भावुक अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य श्री हरनाथ सिंह चारण, डॉ. बाबूलाल चौधरी, दिलीप गहलोत, नवीन डाभी, उपेन्द्र कुमार पुनड, जेठा राम तंवर, रवि खारवाल, डॉ. अशोक माली सहित विद्यालय फैकल्टी, हॉस्टल वार्डन, वर्तमान विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में पूर्व नवोदयन उपस्थित रहे।

🙏 हमारे 2001 बैच के सभी साथियों को दिल से साधुवाद।

कभी हम इस विद्यालय के विद्यार्थी थे…
आज इस विद्यालय के लिए कुछ करने का सौभाग्य मिल रहा है।
इससे बड़ी खुशी और क्या होगी!

पौधा आज लगाया है, छांव आने वाली पीढ़ियाँ पाएंगी।
हॉल आज बन रहा है, सुविधा आने वाली पीढ़ियाँ पाएंगी।
और नवोदय से रिश्ता… हमेशा यूँ ही बना रहेगा।

नवोदय हमारा विद्यालय नहीं…
हमारी पहचान है।

ोदय
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🌱 जो आज पौधे हैं… कल यही पेड़ हमारी पहचान होंगे। 🌳कुछ तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं होतीं, उनके पीछे मेहनत, संकल्प, संघर्...
02/09/2026

🌱 जो आज पौधे हैं… कल यही पेड़ हमारी पहचान होंगे। 🌳

कुछ तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं होतीं, उनके पीछे मेहनत, संकल्प, संघर्ष और अपनों का समर्पण छिपा होता है।

2024 में लगाए गए पौधे अब धीरे-धीरे पेड़ बनने की ओर अग्रसर हैं।
इन पौधों को बढ़ते हुए देखना जितना सुखद है, इनके पीछे की कहानी उतनी ही संघर्षपूर्ण है।

सुदूर रेगिस्तानी इलाके में, जहाँ आज भी JJM से पानी नहीं पहुँचा है और पानी का कोई स्थायी साधन नहीं है, वहाँ पौधे लगाना आसान नहीं था। तपती गर्मियों से लेकर कड़ाके की सर्दी तक, पौधों को जीवित रखने के लिए पूरे वर्ष पानी की टंकियाँ खरीदकर दूर से पानी पहुँचाना पड़ा।

सबसे बड़ी चुनौती तब थी, जब गाँव की ढाणी में कोई रहने वाला ही नहीं था।
ऐसे में पौधे लगाना और फिर उनकी नियमित देखभाल करना शायद किसी पौधे को लगाने से भी बड़ा संकल्प था।

लेकिन कहते हैं ना—
जहाँ संकल्प सच्चा हो, वहाँ रास्ते अपने आप बनते जाते हैं।

माताजी-पिताजी ने पौधों के लिए गाँव में अधिक समय रहना शुरू किया। उनकी मेहनत, चिंता और निरंतर देखभाल आज इन हरे-भरे नन्हें पेड़ों के रूप में दिखाई देने लगी है।

और इसी सुखद यात्रा को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष भी छुट्टियों का सदुपयोग करते हुए पौधारोपण किया।
आज छोटे-छोटे पौधे मिट्टी में हैं, लेकिन उम्मीद बहुत बड़ी है—
कि आने वाले वर्षों में यही पौधे छाँव देंगे, हवा देंगे, पक्षियों को आश्रय देंगे और हमारी आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर पर्यावरण देंगे।

पेड़ लगाना सिर्फ पर्यावरण बचाना नहीं है,
यह आने वाले कल के लिए अपनी एक खूबसूरत विरासत छोड़ना है।

माताजी-पिताजी के संघर्ष को सलाम,जिनकी मेहनत इन पौधों में साँस बनकर दौड़ रही है। 🙏

आज एक पौधा लगाया है…
कल एक पूरा संसार छाँव में होगा।

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रंगों के कोलाहल से परे, श्वेत रंग का यह मौन... एक गहरी शांति और सुकून का अहसास।Radiating confidence and cherishing every...
11/08/2026

रंगों के कोलाहल से परे,
श्वेत रंग का यह मौन...
एक गहरी शांति और सुकून का अहसास।

Radiating confidence and cherishing every moment of my journey.

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