24/06/2026
आज दिल बहुत भारी है…
शब्द साथ नहीं दे रहे,
दिल टूटा हुआ है और आँखें नम हैं।
Birpur,
Bhawarkol,
Ghazipur — Uttar Pradesh
यह सिर्फ एक पता नहीं,
यह मेरी पहचान, मेरी जड़ें और आज मेरा दर्द है।
गाजीपुर की धरती पर दिनदहाड़े हुई यह नृशंस घटना
सिर्फ एक परिवार का नहीं, मेरे गाँव के एक बेटे ( अजय यादव- २० वर्ष) को खोने का दर्द है।
आज मेरे गाँव का एक बेटा हमसे छीन लिया गया।
वह किसी फाइल का नाम नहीं था,वह किसी FIR का नंबर नहीं था वह किसी का बेटा था,किसी माँ की पूरी दुनिया था,किसी घर का उजाला और सहारा था।
जिस उम्र में सपने पंख फैलाते हैं,उसी उम्र में उसकी साँसें छीन ली गईं। आज उसकी खामोशी पूरे समाज से सवाल कर रही है।
जब खुलेआम कानून को चुनौती दी जाती है,जब एक माँ की गोद उजड़ती है,जब एक घर का चिराग बुझा दिया जाता है —तो चुप रहना सबसे बड़ा अपराध बन जाता है।
एक जनप्रतिनिधि और समाज के जिम्मेदार सदस्य होने से पहले मैं इस मिट्टी का बेटा हूँ।और आज दर्द के साथ,लेकिन पूरे साहस और ज़िम्मेदारी से कहता हूँ:
👉 हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
👉 कानून से बड़ा कोई नहीं।
👉 दोषी चाहे जो भी हों, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए।
👉 न्याय सिर्फ मिलना नहीं चाहिए, दिखना भी चाहिए।
मैं पीड़ित परिवार के साथ केवल शब्दों में नहीं,हर लड़ाई में पूरी मजबूती से खड़ा हूँ।
यह सिर्फ न्याय की मांग नहीं है,यह मेरे गाँव की सुरक्षा, सम्मान और भरोसे की लड़ाई है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे,और हमें इतना साहस दे कि हम अन्याय के खिलाफ कभी चुप न रहें।
न्याय चाहिए। अभी चाहिए।
मेरे गाँव के बेटे के लिए।