28/05/2026
गंभीर मुद्दा है साथियों ग्राम पंचायत जैसे स्थानीय स्तर पर जब भी रोजगार के अवसर निकलते हैं, तब सैकड़ों पढ़े-लिखे युवक-युवतियां उम्मीदों के साथ आवेदन भरते हैं। मेरिट सूची में स्थान हासिल करने के बाद भी उनका भविष्य सुरक्षित नहीं रह पाता। बेरोजगारी की भयावह स्थिति यह है कि आज उच्च शिक्षित और मेरिटधारी युवा भी आकुशल मजदूरों से कम वेतन पर काम करने को मजबूर हैं, सिर्फ इसलिए ताकि किसी तरह रोजगार बना रहे।
इसी उम्मीद के साथ PESA एक्ट के अंतर्गत मोबिलाइजरों की नियुक्ति बड़े स्तर पर की गई थी। गांव-गांव में प्रचार-प्रसार हुआ, प्रशिक्षण दिए गए और इसे आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय शासन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया गया। युवाओं ने इसे अपने भविष्य और स्थायी रोजगार की उम्मीद माना। लेकिन विडंबना यह रही कि मात्र चार वर्षों के भीतर ही इन्हीं मोबिलाइजरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन युवाओं ने अपनी मेहनत, समय और ऊर्जा गांवों में शासन की योजनाओं को लागू करने में लगाई, उनके भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ अस्थायी प्रयोग बनकर रह जाएंगी? हर नई योजना के साथ युवाओं को सपने दिखाना और कुछ वर्षों बाद उन्हें बेरोजगारी की कतार में वापस खड़ा कर देना आखिर कब तक चलता रहेगा? आज जरूरत सिर्फ योजनाएं शुरू करने की नहीं, बल्कि उन योजनाओं से जुड़े युवाओं के रोजगार और भविष्य को सुरक्षित करने की भी है। क्योंकि बेरोजगारी केवल आर्थिक संकट नहीं, बल्कि युवाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन चुकी है।
CM Madhya Pradesh Indrapal Markam PMO India Rahul Gandhi Narendra Modi मध्यभूमि के बोल ,अखबार पंचायत सहायक सचिव / रोजगार सहायक संगठन मध्यप्रदेश