पूजारी प्रोटक्शन अक्ट लागू हो

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पूजारी प्रोटक्शन अक्ट लागू हो हमारा उद्देश्य पीड़ित ब्राह्मण - पूजारी को न्याय दिलाना है
आप और हम सभी कि एकता समाज कि अखंडता है 🙏

Jai dada bagwan parshuram ji
19/04/2026

Jai dada bagwan parshuram ji

विश्व के सबसे महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री ब्राह्मण आर्यभट्ट जी की जयंती पर उन्हें शत् शत् नमन।।🙏  #आर्यभट्ट जी का प्रार...
14/04/2026

विश्व के सबसे महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री ब्राह्मण आर्यभट्ट जी की जयंती पर उन्हें शत् शत् नमन।।🙏
#आर्यभट्ट जी का प्रारंभिक जीवन: आर्यभट के जन्मस्थान और जन्मवर्ष का अनुमान अभी भी उनके कार्यों और प्रभावों के आधार पर लगाया जाता है। उनके एक लोकप्रिय ग्रंथ 'आर्यभटीय' में उल्लेख है कि जब कलियुग के 3600 वर्ष पूरे हो चुके थे, तब उनकी आयु 23 वर्ष थी, जो कि 499 ईस्वी पूर्व का समय है। इस प्रकार उनके जन्मवर्ष का अनुमान 476 ईस्वी लगाया जाता है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि 'आर्यभटीय' ग्रंथ कलियुग के 3600 वर्ष बाद प्रकाशित हुआ था; उनके शोध और ग्रंथ बहुत बाद में मिले थे। वे हमेशा कुसुमपुरा, पाटलिपुत्र को अपना जन्मस्थान मानते थे, जो वर्तमान में पटना, बिहार में स्थित है। उनका वास्तविक जन्मस्थान और जिस परिवार में उनका जन्म हुआ था, वह अभी भी अज्ञात है। अबू रेहान अल-बिरूनी, जिन्हें अल-बिरूनी के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रसिद्ध इस्लामी गणितज्ञ थे जिन्होंने आर्यभट के कार्यों का अध्ययन किया था। उन्होंने कहा कि आर्यभट को आर्यभट प्रथम या आर्यभट बड़ा कहा जाना चाहिए। यह कथन इस दावे के साथ दिया गया था कि एक ही काल में आर्यभट नाम के दो वैज्ञानिक थे। इससे हंगामा और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई और आर्यभट के जीवन को समझने में कोई मदद नहीं मिली, बल्कि और भी अधिक भ्रम पैदा हो गया। यह भ्रम बहुत बाद में, 1926 में बी. दत्ता द्वारा दूर किया गया, जब उन्होंने कहा कि अल-बिरूनी द्वारा दो वैज्ञानिकों के समझे गए कार्य वास्तव में केवल एक ही वैज्ञानिक के हैं, और वह हैं आर्यभट।गुप्त साम्राज्य में कुसुमपुरा की राजधानी पाटलिपुत्र एक प्रमुख शिक्षा केंद्र और संचार नेटवर्क का केंद्र था। इसी कारण विश्वभर से ग्रंथ आसानी से यहाँ पहुँच जाते थे, जिससे आर्यभट को गणित और खगोल विज्ञान में महत्वपूर्ण प्रगति करने में सहायता मिली। ऐसा माना जाता है कि वे कुसुमपुरा में स्थित अपने विद्यालय कुलपा के प्रमुख थे। बाद में खगोल विज्ञान में अपनी रुचि को आगे बढ़ाने के लिए वे पाटलिपुत्र में स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन करने भी गए, और उनके विश्वविद्यालय के प्रमुख होने की अटकलें आज भी बरकरार हैं।

27/01/2026

#क्या_है?
UGC का पूरा नाम ( #विश्वविद्यालय_अनुदान_आयोग) है। यह #भारत #सरकार की एक #संस्था है जो देश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को फंड देती है, उनके स्टैंडर्ड तय करती है और नियम बनाती है। सरल शब्दों में: कॉलेज-यूनिवर्सिटी की "माँ" जैसी संस्था, जो शिक्षा की क्वालिटी और नियमों को देखती है।अभी क्या नया हुआ है (2026 में)?
जनवरी 2026 में ने नया नियम जारी किया है: ।
इसका मुख्य उद्देश्य: कॉलेज-यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव ( -based discrimination) को रोकना। खासकर SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांग छात्रों/कर्मचारियों के साथ होने वाले अन्याय को। हर कॉलेज में Equity Committee (समानता समिति) बनानी होगी।
शिकायत के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन, इक्विटी सेंटर और जांच की व्यवस्था।
अगर संस्थान नियम नहीं मानता तो फंड बंद, डिग्री देने पर रोक जैसी सजा हो सकती है।

#क्यों_विरोध हो #रहा है? (मुख्य बातें जो लोग कह रहे हैं)
बहुत से लोग (खासकर जनरल कैटेगरी/सवर्ण वर्ग के छात्र और सोशल मीडिया पर) इसे एकतरफा और खतरनाक बता रहे हैं। मुख्य कारण:एकतरफा नियम: सिर्फ SC/ST/OBC के खिलाफ भेदभाव की परिभाषा है। जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव की कोई सुरक्षा नहीं।
झूठी शिकायत का डर: शिकायत करने पर कोई सजा नहीं (ड्राफ्ट में थी, लेकिन फाइनल में हटा दी गई)। कोई भी कह सकता है "मुझे जाति से भेदभाव हुआ" और जांच शुरू हो जाएगी, बिना मजबूत सबूत के भी करियर खराब हो सकता है।
#दुरुपयोग का #खतरा: विरोध करने वाले कहते हैं कि यह SC/ST/OBC एक्ट जैसा कॉलेज में "हथियार" बन सकता है, जिससे सामान्य छात्र डरकर पढ़ाई-प्रतियोगिता में पीछे रह जाएंगे।
जाति की खाई बढ़ेगी: बजाय सबको जोड़ने के, यह नियम जाति को और ज्यादा हाईलाइट करेगा और कैंपस में डर-तनाव पैदा करेगा।

#कुछ #लोग इसे "कैंपस में SC/ST/OBC एक्ट" या #सवर्णों के ₹खिलाफ #कानून" कह रहे हैं। ट्रेंड इसी विरोध में चल रहा है। दूसरी तरफ: समर्थक कहते हैं कि रोहित वेमुला जैसे केस में भेदभाव होता रहा है, इसलिए सख्त नियम जरूरी हैं। UGC का कहना है कि यह सिर्फ भेदभाव रोकने के लिए है, न कि किसी को टारगेट करने के लिए। संक्षेप में: UGC का नया नियम अच्छे इरादे से आया (भेदभाव रोकने के लिए), लेकिन विरोध इसलिए क्योंकि लोग इसे असंतुलित और दुरुपयोग होने लायक मान रहे हैं।

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